रवींद्रनाथ टैगोर जी का जीवन चरित्र | Life character of Ravindranath Tagore




Life charachter of ravindranath tagore


रवींद्रनाथ टैगोर जी का जन्म 07 मई 1861 में कलकत्ता के जोरंसको में हुआ था। पिताजी का नाम 'देवेन्द्रनाथ टैगोर' है। उनके माताजी का नाम 'शारदादेवी टैगोर' है। उनका परिवार कलकत्ता में रहता था। रविन्द्रनाथजी अपने माताजी की 14 वि संतान है। रविंद्रनाथजी आधुनिक भारत के विश्व कवी थे। उनका विवाह इ.स. 1912  में ''मृणालिदेवी'' के साथ हुआ है। विश्व के एक श्रेष्ठ साहित्यिक के नाम से जाने जातेथे। सत्य की हमेशा विजय होती है। इस पर उनका विश्वास था। इ.स. 1912 में ''जीवन स्मृर्ती '' ग्रंथ लिखा है। रविन्द्रनाथ टैगोर 1878 में इंग्लैंड चले गए। वहा पर '' शाहीबाग निवास '' में रहते थे। अपने घर की याद मे रविंद्रनाथजी ने '' भुकेलेले पाषाण '' कथा लिखि थि।लंडन युनिवर्सिटी कॉलेज में हेनरी मार्ली के मार्गदशनमें इंग्रजी साहित्य का अभ्यास किया। बोलेपुर में 1901 में '' शांतिनिकेतन की स्थापना की।


''शांतिनिकेतन '' में विदार्थियो को पढ़ाया जाता था। वहा पर वसंतउत्सव , शारदाउत्सव, वृक्षरोपण के कार्यक्रम लिए जाते थे।विद्यार्थी झोपड़ी में रहते थे। अध्यापक और विद्यार्थी साथ में खाना खाते थे। '' साधी राहानि और उच्च विचार'' के तत्वज्ञान पर रहने के लिए विद्यार्थीयो को बताया जाता था।शांतिनिकेतन में विद्यार्थियों को स्वालंबन,श्रमप्रतिष्ठा,और समता के आधार पर विद्यार्थियों को शिक्षण दिया जाता था। रविंद्रनाथ जी कलाकार होने के कारण संगीत,नृत्य,चित्र इ.शिक्षण स्वय पढ़ाते थे।बांधकाम, सुतरकम ,चर्मकाम , पुस्तकबांधनी और खेडनी बनाने का व्यावसायिक शिक्षण दिया जाता था।

''शांतिनिकेतन'' में शिक्षण '' मातृभाषा'' में पढ़ाया जाता था।सुरुल गांव में रविंद्रनाथ जी ने इ.सन १९२२ में '' श्रीनिकेतन ''नाम की ग्रामीण संस्था स्थापना की।ग्रामीण भाग मे चले आ रहे परम्परावादी हस्तोउद्योग , ग्रामोउद्योग करने वाले कामगारो को अपने उद्योग के प्रति लगाव रहना चाहिए ,इसलिए रविंद्रनाथ जी ने '' श्रीनिकेतन '' की स्थापना की। ''श्री'' याने '' संपत्ति, भारत खेडो का देश है। ग्रामीण जनता सुखी नहीं होगी, तब तक भारत का विकाश नहीं हो सकता ।'' श्री निकेतन'' में ग्रामीण जनता को उद्योग के बारे मे पढ़ाया जाता था। भारतीय संस्कृति का महान और श्रेष्ठ मूल्य का शिक्षण विश्व को मिलना चाहिए , यही ''शांतिनिकेतन'' के अभ्यास प्रणाली का उदेश था।

सन .१९११ में कलकत्ता मे राष्टीय कॉग्रेस के अधिवेसन में रविंद्रनाथ जी ने '' जन गन मन अधिनायक जय हे--'' यह गीत गाया था। इ.सन १९२१ में रविंद्रनाथ जी ने'' विश्वभारती विद्यापीठ ''की स्थापना की।रविंद्रनाथ टैगोर जी को १३ दिसंबर १९१३ को प्रथम नोबेल पुरस्कार ''साहित्य '' में दिया गया। भारत के प्रथम नोबेल पुरस्कार लेने वाले व्यक्ति है। रविंद्रनाथ टैगोर जी का मृत्यु जोरासांको में इ.सन.१९४१ में हुआ है।

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