डॉ. सी.व्ही.रामन जी का जीवन चरित्र / Biography of Dr. C. V. Raman

Biography of Dr. C.V.Raman
     
डॉ. सी. व्ही रामन जी का जन्म 07 नोहबर 1888 में ' त्रिचनपली' में हुआ है। पिताजी का नाम रामनाथ चन्द्रशेखर अय्यर है। बी.एस.सी पास होने के बाद उन्हें विशाखापट्नम कॉलेज में अध्यापक के लिए बुलाया गया। Maths और Materials Science में उनकी रूचि थी। उनके पिताजी को Music और Astronomy में रूचि थी। रात में आकाश की तरफ देखते रहते थे।उस समय रामन भी उनके साथ रहता था। उनके भी मन में कुछ करने की इच्छा प्रगट होती थी। पिताजी की तरह उन्हें भी संगीत में रूचि थी। उनका विणा और मृदुंग पर उनका प्रभुत्व था। स्कूल में हुशार और बुद्धिमान विद्यार्थी के नाम से पहचान ने लगे। पिताजी प्राध्यापक थे। इसलिए घर का वातावरण अभ्यासमय रहता था। पढ़ाई में कम और अध्यात्म मेंज्यादा ध्यान देते थे। अध्यात्मकि पुस्तकें पढ़ते थे।

रामन मैट्रिक की परिक्षा प्रथम क्रमांक से पास हुए। कॉलेज में '' प्राचीन काव्य '' पर एक निबंध लिखा , और उन्हें प्रथम बक्षीस दिया गया। बी.एस. सी में '' पदार्थविज्ञान '' में सब से ज्यादा अंक आने पर उन्हें '' एनी '' नामक सुवर्णपदक दिया गया। ''पदार्थविज्ञान'' में प्रगति देख के उन्हें विदेश भेजने की तयारी थी। लेकिन वैद्यकीय चाचणी में फेल हुए। भारत सरकार के अर्थ खाते के परीक्षा को बैठे। इस परीक्षा में इतिहास, संस्कृत, इनके साथ-साथ राजकीय अर्थशास्त्र यह मुख्य विषय थे। ''पदार्थविज्ञान'' में पदवी लेने के बाद , इस परीक्षा में पास होना , उनके आगे एक आव्हान था, लेकिन रामन प्रथम अंक से पास हुए, उस समय उनकी आयु केवल १८ साल की थी, रामन को वरिष्ठ आमलदार की नौकरी कलकत्ता में दी गई, और उन्हों ने अपना नाम इतिहास में दर्ज कीया।

सी.व्ही. रामन जी की शादी ''लोकसुंदरिशि'' नाम के लडकि से हुई । सी व्ही रामन को कलकत्ता में नौकरी थी , कलकत्ता में ही रहते थे लेकिन उनका मन वहा पर नहीं लगता था , क्योकि उनका मुख्य उद्देश खोज करना था , उस समय कलकत्ता विद्यापीठ के कुलगुरु आशुतोष मुखर्जी थे। '' फिलॉसाफिकल मैगजीन '' और ''नेचर'' यह विषय कुलगुरु पढाते थे। सी. व्ही. रामन के हाथ में प्रयोगशाला की जबाबदारी सोप दी , और उन्हों ने खोज करने को प्रारंभ किया। सी.व्ही .रामन ने इ सन १९१४ में अर्थखाते की नौकरी छोड़ दी। कलकत्ता मे ''पदार्थविज्ञान '' के प्राध्यापक बने। भारतीय रसायनशास्त्र के पिता ' आचार्य '' प्रफुलचन्द्र रॉय '' और वनस्पतिशास्त्र के पिता आचार्य '' जगदीशचंद्र बोस '' इसी विद्यापीठ में खोज कर रहे थे। विज्ञान प्रेमी विद्यार्थी प्रवेश लेने के लिए आने लगे, उस समय सी.व्ही.रामन को '' डॉक्टर'' पदवी से सम्मानित कीया गया।



इ.सन १९६१ में इंग्लैंड के ऑक्सफर्ड में शास्त्रोंज्ञानो के परिषद में प्रतिनिधि बनके गए थे। रॉयल सोसायटी की तरफ से उन्हें '' फेलो '' से सम्मानित किया गया। यह सम्मान विश्व में बहोत कम लोगो को मिलता है। रेनू से विवर्तन होता है ,और प्रकाश लहर की लंबाई बदलती है,यह सिद्ध कर के दिखाया ,यही खोज ''रामन परिणाम ( रामन इफेक्ट ) '' के नाम से प्रसिद्ध हुई। यह खोज १९२८ में '' भारतीय पदार्थ विज्ञान '' के नियंतकालिक में प्रसिद्ध हुई।१९२९ के मद्रास अधिवेसन के अध्यक्ष थे। डॉ. सी. व्ही. रामन जी को इ.सन १९३० में नोबेल पुरस्कार ( भौतिकशास्त्र ) देकर सम्मानित किया गया। बैंगलोर के कुछ विज्ञान प्रेमी लोगो ने १९०९ में '' इंडियन इंन्स्टीट्यूड ऑफ सायन्स '' नाम की संस्था स्थापन किए,इस संस्था के प्रमुख डॉ. सी.व्ही.रामन को रखा गया। इ.सन १९४४ में इंडियन अकैडमी ऑफ़ सायन्स ''की स्थापना बैंगलोर में की।डॉ.सी.व्ही.रामन ने बैंगलोर में '' रामन रिसर्च इंन्स्टीट्यूड ''की स्थापना की।     

इ.सन १९२९ में ब्रिटिश सरकार ने  '' सर '' पदवी से सम्मानित किए।
   
इ.सन १९३२ में पेरिस युनिव्हर्सिटि ने एस्सी. डी की पदवी दी। और ग्लासको विद्यापीठ ने पीएच.डी की  पदवी दी।

इ.सन १९३५ में म्हैसूर के महाराजा ने '' राजभाषा भूषण '' का किताब दिया।
 
इ.सन १९५४ में '' भारतरत्न '' देकर उन्हें सम्मानित किया गया।      
    
डॉ.सी.व्ही. रामन जी का निधन इ.सन २१ नोहेम्बर १९७० को हुआ। 
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