मदर तेरेसा ( अग्नेस ) जी का जीवन चरित्र / Life Story of Mother Teresa (Agnes)

Life Story of Mother Teresa (Agnes)

मदर तेरेसाजी का परिचय / Introduction to Mother Teresa

नाम :- अग्नेस गोंझा  बोजाक्झिहु (Agnes Gonxha Bojaxhiu )

जन्म :- 26 अगस्त 1910

जन्म स्थल :- स्कोपजे, अल्बेनिया

पिताजी का नाम :- निकोली

माताजी का नाम :- बेर्नार्ड


मदर तेरेसाजी का पारिवारिक जीवन / Family Life of Mother Teresaji

मदर तेरेसाजी का जन्म '' अल्बेनिया(अभी का मेसिडोनिझा) '' देस के ' स्कॉपये ' में 26 अगस्त 1910 को हुआ। उनका नाम '' अग्नेस '' है। पिताजी का नाम '' निकोली बोजाही '' है। माताजी का नाम '' बर्नाड '' था।गोनइन्हा इस शब्द का अर्थ अल्बेनिया में '' Rossbud किंवा Little flower याने की गुलाब की कड़ी ऐसा होता है। अग्नेस को एक बहन और एक भाई था। सन 1904 में अगास्था ( बड़ी बहन ) का जन्म हुआ। सन 1907 में '' लाझरस '' (भाई) का जन्म हुआ। पिताजी का व्यवसाय किसानी का था। अग्नेस के माता - पिता धार्मिक वृति के थे, उनके पितजीज इतवार के दिन चर्च लेके जाते थे, उनकी मम्मी को लोग '' नाना लोको '' कहते थे।समाज के गरीब, अनाथ, अपंग और रुग्ण की, नि :स्पुह भावना से तेरेसाजी सेवा करते थे।125 देस में संस्था निर्माण कर के अपना सेवाकार्य चालु किया। मानव की सेवा करके , विश्व में ''शांतता प्रस्थापित'' की, भारत में तेरेसा जी 31 वर्ष रहे है, कलकत्ता के झोपडपट्टी में रहकर लोगो की सेवा की।

अल्बेनिया देश में ऑटोमन राजा का साम्राज्य था। अभी अल्बेनिया देश का नाम बदल के मेसिडोनिझा है और ' ' स्कोपजे ' राजधानी है। अग्नेस अपने भाई-बहन से बढ़ी थी उसके उम्र के 09 वे साल में उनके पिताजी का निधन हुआ। मदर तेरेसा का जन्म 26 अगस्त को हुआ लेकिन उसपर अच्छे संस्कार 27 तारिख से देना चालू  हुए इसलिए अपना जन्म दिन 27 तारीख को मनाती थी।



अग्नेस की पढ़ाई उनके गांव में हुई, स्कुल पढ़ते समय उन्हें लगता था ,की प्रभु येशु की सेवा करू ,गरीबों की सेवा करू , धर्म गुरु उपदेस बताते थे , तब उनके मन में कुछ देश सेवा करने की इच्छा होती थी। अग्नेस को लगता था की , मेरा जीवन गरीबों की सेवा करने में ही जाना चाहिए। स्कुल और चर्च में जाते, समय रास्ते पर गरीब , भिकारी को देख के उनके मन में दया आति थि। 12 साल की उम्र में उन्होंने '' प्रभु येशु को अपना जीवन समर्पित किया, गरीबों की सेवा करना चाहती है, तो यह काम मन से कर नही तो मत कर '' , ऐसा उनके माताजी ने कहा और गरीबों की सेवा करने की 'अग्नेस ' को अनुमति दी।

18 साल की उम्र में ' अग्नेस ' फकीर बनी , '' विश्वची माझे घर '' इस आदर्श विचार पर ''मानव में भगवन '' देखते हुए , अपना सेवा कार्य करने का व्रत लिया।1928 में अग्नेस का भाई '' लाझरस '' लेफ्टनंट था , इनका निधन कर्करोग से रोम में हुआ, अग्नेस को पता चला तब अग्नेस कलकत्ता के '' बकाल '' झोपड़पट्टी में दिनदुबडो की सेवा कर रही थी। यह सुनकर उनकी शांतता भंग नही हुई। 

अपने सहकारीयो के साथ आत्मा को शांति मिलने के लिए, प्रभु येशु की प्राथना की, लेकिन सेवा कार्य छोड़ के रोम नहीं गए। आयर्लैंड के '' रयफमॉर्नलॉरिटो अबे मिशन कॉन्व्हेंट '' में अग्नेस ने प्रवेश लिया। इंग्रजी और धार्मिक शिक्षण होने के बाद, 06जनवरी 1929 में भारत के पूरब कलकत्ता बंदर में '' नन '' के साथ दाखल हुए , लॉरिटो मिसन प्रशिक्षण केंद्र में सेविका का शिक्षण मिला , उसके बाद उन्हें दार्जिलिंग भेज दिए, वहा पर दो साल धर्मकार्य का अभ्यास किए , इ सन 24 मे 1931 को धर्म कार्य की दीक्षा मिली। इसलिए उन्हें धर्म कार्य करने वाली '' जोगिन ( नन ) '' कहते है। सेवा धर्म का कार्य करते हुए , '' सिस्टर टेरेसा '' नाम धारण किए , तेरेसा याने लहान व्यक्ति ,क्योकि भगवान के आगे हम छोटे है , यह भावना हमेशा मन में रहना चाहिए इसलिए ''तेरेसा'' नाम अग्नेस ने रखा। इ सन 24 मे 1937को अंतिम दीक्षा लेके उम्र के 27 साल में , अग्नेस ' मदर तेरेसा' बने।

सन 1931 में सिस्टर तेरेसा कलकत्ता आए,  उस समय कलकत्ता शहर का शैक्षणिक, औद्योगिक और सांस्कृतिक कायापालट हुआ था। विकास हुआ, लेकिन झोपड़पट्टी की संख्या बड़ी, गरीबी, रोगराई, के प्रमाण बढ़े , बेकारी बढ़ी, यहाँ पर लॉरिटो मिशन की ' सेंट मेरी स्कुल ' थी, इस स्कुल में गरीब और अमीर लड़कियां पढ़ने के लिए आती थी , तेरेसा जी भूगोल और इतिहास पढाते थे। स्कुल में अमीर लड़कियों को हमेशा कहते थे की , त्याग करो, ट्रिप को मत जावो, ज्यादा खर्चा मत करो, वही पैसा गरिबो को दान करो, '' सेंट मेरी स्कुल'' में तेरेसा जी का कार्य अच्छा था, इसलिए उन्हें '' मुख्याध्यापिका '' बनादिए।सन 1946  में '' मदर तेरेसा '' जी गरिबो की सेवा करने , के लिए अपने आपको समर्पित किए। मदर तेरेसा जी मेडिकल की पढ़ाही करने को पाटना गए। केंद्र सरकार की तरफ से सन 1957 को टिटाघर में 1400 एकर जगह मुक्त मिली, वहा पर कुष्ठ रोगियों के लिए '' शांतिनगर '' नाम की वसाहत बनाए। और लघुउद्योग केंद , कुक्कडपालन , छापखाना, बकरी - मेंढी पालन , चालू किए।

भारत और विश्व के कुष्ठरोगी की सेवा अकेले तेरेसाजी नहीं कर शकते इसलिए समुदाहिक पटड़ी पे कुष्ठरोग केंद उपचार डॉ . हेमरिक के मार्गदर्शण से चालू किए। उन्हों ने मद्रास में सेवा केंद्र चालू किए, सरकार की मदत से कुष्टरोगी का निवारण कार्य चालू किया गया। बम्बई मेंसन 1963 से सेवाश्रम सुरु हुआ, और सन 1966 में थॉमस ने बिल्डिंग दी वहा पर '' आशादान '' नाम का सेवा केंद्र सुरु किए , यहा पर अपंग ,पोलियोग्रत , विद्रूप अभ्रक , वुद्ध स्त्री - पुरुष , इन की सेवा यहा पर करते थे। सेवा करने के लिए '' ब्रदर हॉउस '' की स्थापना की गई। वहा पर युवा ओंके आध्यात्मिक सेवा करने के किए तेरेसाजी प्रशिक्षण देते थे।



08 डिसेंबर 1970 में लंदन के शहर में चालू किया। विश्व में प्रगत अमेरिका और यूरोप में दरिद्र , उपोषण , कुपोषण, उपासमार टेरेसाजी ने देखे और 26 जुलाई 1965 को दक्षिण अमेरिका में व्हेनेझूला के कैटकरू में प्रथम सेवा केंद्र चालू किया। 22 अगस्त 1968 ' रोम ' में चालू किए। 13सप्टेंबर 1969 को आस्ट्रेलिया के ' बोरक ' में चालू किया। 1972 में ' ग्रीनवेल ' में चालू किए, इस केंद्र में दारू, गांजा, अफु, मॉर्फिन, हेरोइन ऐसे मादक से ग्रस्थ लोगो के लिए वैद्यकिय और मानसशास्त्रिय सेवा चालू किए। तेरेसाजी खुद ख्रिचन धर्म के थे , लेकिन येमेन, सीरिय , जॉर्डन इस अरब राष्ट्र में सेवा केंद्र चालू किए। सन 16 जुलाई 1970 में जॉर्डन राष्ट्र के ओमान शहर में प्रथम सेवा केंद्र चालू किए। विश्व के 118 सेवा केंद्र पर जाकर उन्होंने निगरानी रखी, 1960 में येमेन के प्रधानमंत्री ने तेरेसाजी के स्वागत में '' तलवार '' गिफ्ट '' दिए।

 तेरेसाजी के सेवा कार्य का प्रचार - प्रसार सभी देसो में हुआ है। 94 देसो में 400 धर्मदाय संस्था, 'मिसनरी ऑफ़ चैरिटी ' संस्था ने 120 शिशु भवन निर्माण किए। 187 अनाथाश्रम संस्था, 17 स्कुल, 08 आध्यात्मिक विभाग , कुष्ठरोग सेवा केंद्र 117 और पुनर्वसन केंद्र 09 है। एड्स रोगप्रतिबंधक केंद्र 03, 809 दवाखाने, 56 क्षयरोग उपचार केंद्र , 03 व्यसनग्रस्त रुग्ण सेवा केंद्र और विश्व से दान (पैसा) आता था, यह सभी पैसा सेवा कार्य में लगाते थे।

मदर तेरेसाजी को सन 1979 में नोबेल पुरस्कार ( शांतता ) प्रदान किया गया।' दी स्टेट्समन ' , ' अमृतबजार ' , ' इलस्ट्रेटेड विकली ' , ' धर्मयुग ' इस साप्ताहिक के माध्यम से मदर तेरेसा के सेवा कार्य का शांति संदेश पुरे विश्व में दिया गया।

मदर तेरेसाजी का निधन / Death of Mother Teresaji

सन 05 दिसम्बर 1997 को मदर तेरेसाजी का निधन हुआ।

पुरस्कार / Award 

➤सन 1962 में भारत सरकार ने ''पदमश्री किताब '' दिया।

➤ सन 1962  में  फिलिपाइन्स देश की तरफ से '' रोमन मेगासेसे '' पुरस्कार।  

➤ सन 1969 में भारत सरकार की और से '' जवाहरलाल नेहरू '' पुरस्कार। 

➤ सन 1971 में प्रथम पोप जॉन शांति पुरस्कार। 

➤ सन 1971 में गुड़ सेमेरिटन पुरस्कार।  

➤ सन 1971 में जॉन केनेडी आंतरराष्ट्रीय पुरस्कार।  

➤ सन 1972 में '' टेम्पलटन '' पुरस्कार। 

➤ सन 1975 में अल्बर्ट श्वेटझर आंतरराष्ट्रीय पुरस्कार। 

➤ सन 1976 में पेसम इन टेरिस पुरस्कार। 

➤ सन 1978 में बालझम पुरस्कार। 

➤ सन 1979 में  नोबेल शांति पुरस्कार। 

➤ सन 1980 में '' भारतरत्न '' पुरस्कार।  

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