अमर्त्य सेनजी का जीवन चरित्र / Life character of Amartya Sen

Life charachter of Amartya sen

अमर्त्य सेन का परिचय / Introduction to Amartya Sen

नाम :- डॉ. अमर्त्य सेन 

जन्म दिनांक :- 03 नोहंबर 1933 

जन्म स्थल :- शांतिनिकेतन, कलकत्त 

पिताजी का नाम :- प्रा. आशुतोष सेन 

माताजी का नाम :- अमिता सेन

नोबेल पुरस्कार :- वर्ष 1998 - अर्थशास्त्र

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डॉ. अमर्त्य सेन का पारिवारिक जीवन /  Family life of Dr. Amartya Sen

  बांगला देश के ढाका शहर के मानिकगंज नगर में प्रा आशुतोष सेन और अमिता सेन इनके विद्याविभूषित परिवार में अमर्त्य सेन का जन्म 03 नोहंबर 1933 में भारत देश के पश्चिम बंगाल के '' शांतिनिकेतन '' में बंगाली हिन्दू वैद्य परिवार में हुआ।अमर्त्य सेन का नाम रविंद्रनाथ टैगोर के कहने पर रखा गया। अमर्त्य याने की अमर !  .........

अमर्त्य सेन के दादाजी बांगला देश के वारी शहर के रहने वाले थे। उनके दादाजी क्षिति मोहन सेन यह रविंद्रनाथ टैगोर के बहुत ही घनिष्ठ थे। विश्वभारती विद्यापीठ के द्वितीय कुलगुरु थे। उनके दादाजी प्रथम भारतीय मुख्य निवडणूक आयुक्त सुकुमार सेन उनके काका, सुप्रसिद्ध डॉक्टर अमिता सेन के भाई और खासदार और न्याय तथा विधि खाते के कॅबिनेट मंत्री बैरि. अशोक कुमार सेन के भाई थे।

अमर्त्य सेन के पिताजी प्रा.आशुतोष सेन और माताजी अमिता सेन का जन्म मानिकगंज ढाका में हुआ है। उनके पिताजी शांतिनिकेतन में रसायनशास्त्र पढ़ाते थे। रसायनशास्त्र के प्राध्यापक और बाद में दिल्ली में बहुत साल तक कार्य किये उसके बाद उन्हों ने '' पश्चिम बंगाल लोकसेवा आयोग '' के अध्यक्ष थे।

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अमर्त्य सेन की पढ़ाई /   Amartya Sen's studies

बर्मा के मंडाले शहर में अमर्त्य सेन की तिसरी कक्षा से पढ़ाई चालू हुई। गणित , भौतिक , विज्ञान , ओर संस्कृत इ विषय में रूचि थी। उनके पिताजी कलकत्ता के ' शांतिनिकेतन ' में प्राध्यापक थे। अमर्त्य सेन की पढ़ाई शांतिनिकेतन में हुई। गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर जी के मृत्यु के बाद बंगाल में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई , हिंदु - मुस्लिम में दंगल चालू हुई। हिंसा इतनी बढ़ गई थी की , हिंदु मुस्लिम एक - दुसरे के सिमा में नही जा शकते थे। यह सभी दॄश्य अमर्त्य सेन ने अपने आँखो से देखा था, तभी उन्हों ने बोला था की ' मैं गरीब जनता की गरीबी दुर कर के , हर इंसान को आर्थिक आझादी दिलाकर रहूँगा ' यह दॄढ संकल्प उन्हों ने लिया था।

1951 में प्रेसिडेंसी कॉलेज में दाखल हुए। 1953 में '' अर्थशास्त्र '' में पदवी प्राप्त किए। आगे की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए, वहा पर केंब्रिज विश्वविद्यालय के ट्रिनिटी कॉलेज में दाखल हुए। वहा पर उन्हें मिखाइल , निकल्सन, चालर्स, फीन्सटीन, लाल जयवर्धने ओर महबूब अली हख जैसे दोस्त मिले। मार्क्सवादी मॉरिस डॉब , उदारवादी डेनिस रॉबर्ट्सन, महान अर्थशास्त्रज्ञ पियरो साफ जैसे विद्वान प्राध्यापको का मार्गदर्शन मिला। यह प्राध्यापक अर्थशास्त्र के प्रेरणास्थान बने, तीनों प्राध्यापक अर्थशास्त्र के खोज करता थे। उनके मार्गदर्शन पर विश्व की पूरी अर्थव्यवस्था का बारकाई से उन्होंने अध्यन कीए। गरीब का आर्थिक लाभ होना चाहिए , यही खोज का उद्देश था। इसलिए उन्होंने ' द चॉइस ऑफ़ टेक्निक्स ' समाजवादी अर्थव्यवस्था से संबधित विषय लिया। मॉरिस डॉब और प्रोफेसर जॉन रॉबिन्सन का पूरा सहकार्य था।

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अमर्त्य सेन ने बहोत परिश्रम करके खोज कार्य चालू किए।सन 1956 में अर्थशास्त्र विषय में एम.ए (ऑनर्स) पदवी प्राप्त किए।1970 में '' कलेक्टिव चॉइस अण्ड सोशल वेलफेयर '' पुस्तक प्रकाशित किए। ''गरीबों की आर्थिक आझादी '' के लिए खोज कार्य पुरे किए। इस मानवतावादी अर्थशास्त्रज्ञ ने अभी तक 125 खोज लेख और 24 पुस्तके प्रकाशित किए। विश्व के अर्थव्यवस्था का अभ्यास करके , ''आर्थिक आझादी '' किस तरह से लाना चाहिए, यह विचार अपने कलम से लिखे है। अमर्त्य सेन को '' कल्याणकारी अर्थव्यवस्था का जनक '' कहा जाता है। अमर्त्य सेन को सन 1998 को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पुरस्कार के धनराशि से भारत में ट्रस्ट स्थापन किए। जो उच्च शिक्षा के लिए, आर्थिक परिस्थिति के कारण विदेश में पढने के लिए नही जा शकते, ऐसे विद्यार्थियों की क्षमता देख के धनराशि से ट्रस्ट सहाय्यता करता है।



अमर्त्य सेन का '' आर्थिक सिद्धान्त '' देश - विदेश के राष्ट्र प्रमुखों ने अपनाया तो ' दारिद्र ' नष्ट होकर , देश का गरीब स्वालंबी बनेगा ओर आर्थिक संपन्नता प्राप्त होगी। भारत के गरीबी का मुख्य कारण शिक्षा का अभाव है। अंधश्रद्धा से बाहर निकल कर, शिक्षा लेके, उद्योगशील बनना चाहिए।धन कमाने के लिए श्रम करना जरूरी नही है, तो साथ मे शिक्षा चाहिए। व्यापार में भांडवल के साथ बुद्धि को भी बराबरी का स्थान है। बुद्धिमान मनुष्य आर्थिक नुकशान पर ध्यान देकर व्यापार करता है।

सन 2003 में '' प्रवासी भारतीय दिवस '' पर समारंभ में ' अमर्त्यजी ने भारतीय को मार्गदर्शन किए। भुखमरी , उपासमारी, गरीबी इनका मुख्य कारण सरकार की कमजोर आर्थिक नीति है। हमें समझना चाहिए की, किस योजना का लाभ कैसे लेना चाहिए, और सरकारने आर्थिक रोजगार के नीति में बदल करना चाहिए, तभी यहा के नागरीकों की आर्थिक परिस्थिति बदलेगी। सरकारने गरीबो की सत्यता देख के नीति बनाना चाहिए, तभी आर्थिक विकास होगा, अमर्त्य सेन जी के आर्थिक विकास धोरण, उनकी खोज पुरे विश्व को मार्गदर्शक , प्रेरणादायी ओर गरीबो की आर्थिक उन्नति के लिए उपयुक्त है। उनके नीति, धोरण, उपाय, इनका अभ्यास कर के अपने जीवन में उपयोग करना चाहिए।

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