डॉ.व्यंकटरमन रामकृष्णन जी का जीवन चरित्र / Life Character of Dr. Venkatraman Ramakrishnan

Dr.venkatraman
डॉ.वेंकटरामन ने अनुसंधान कार्य में सफलत वैज्ञानिक बने।कहते है, की किसी सफल पुरुष के पीछे किसी स्त्री का हाथ होता है, ठीक उसी तरह उनके सफलता के पीछे उनकी पत्नी ''वेरा रोजनबेरी '' का हाथ था ,वेंकटरामन ने अपने पिताजी के इच्छा नुसार '' भौतिकशास्त्र '' के विषय में अनुसंधान करके पी एच.डी प्राप्त किए। लेकिन वेंकटरामण को अपना करियर '' जीवशास्त्र '' में बनाना था। उन्हों ने जीवशास्त्र की पढ़ाई चालू कि तभी उनके तरफ ' तन्या ' और ' रामन '  नाम के दो लड़के थे। वेंकटरामन को जीवशास्त्र की पढ़ाई के लिए 3000 डॉलर( याने की आज के1,95,000 /-रु साल ) ( 16,260 /-रु माह) प्रतिसाल स्कॉलरशिप मिलती थी लेकिन चार लोगों का परिवार चलाने के लिए बहुत ही कम थी। परिवार चलाना बहुत ही मुश्किल था ऐसे समय में उनकी पत्नी ने   उनका आत्मविश्वास कमजोर नहीं होने दिया और उन्हें आगे की पढ़ाई करो मै परिवार सभांललुंगी आप चिंता मत करो आप अपने पढ़ाई के तरफ लक्ष्य केंद्रित करो और उन्होंने जीवशास्त्र की पढ़ाई पूरी करने का निश्चय किया।

डॉ.रामकृष्णन के पत्नी ने स्कॉलरशिप के पैसे से घर चलने का निर्णय लिया और बाजार से सब्जीका खरीदना बंद किया और घर के पीछे बाड़ी में ही सब्जीका लगाना चालू किया।

डॉ.वेंकटरामन ने दो साल में डॉक्टरेट किया और डॉक्टरेट होने के कारण उन्हें 30 ते 40 हजार डॉलर की स्कॉलरशिप देना एल. विद्यापीठने चालू किया। उनकी पत्नी बहुत खुश हुई और सब्जिका लगाना बंद किया।

दोस्तों इस लेख के माध्यम से यही कहना चाहूंगा की आप भी एक दूसरे को समझे और अपने परिवार में  ढेरसारी खुशियाँ लाए।

दो शब्द आपके लिए .......

पढ़ते-पढ़ते मेरे ये दो शब्द, याद रखना
कभी परिवार को  ना  भूलना ........ 

रास्ते में आएँगी बहुत मुश्किले,
कभी मुश्किलों से ना घबराना ....... 

डॉ.व्यंकटरामन रामकृष्णन परिचय / Introduction to Dr Venkatraman Ramakrishnan


नाम :- डॉ. व्यंकटरामन रामकृष्णन

जन्म दिनांक :- 01 जनवरी 1952

जन्म स्थल :- चिदंबरम, जिला :- कड्डालोर (तमिलनाडु राज्य )

पिताजी का नाम :- सी.व्ही रामन

माताजी का नाम :- राजलक्ष्मी

डॉ.व्यंकटरामन का पारिवारिक जीवन / Family life of Dr. Venkataraman  


सी.व्ही रामकृष्णन और रजलक्ष्मी का घराना उच्चविद्याविभूषित था उनके पिताजी वैज्ञानिक के पद पर कार्यरत थे। 1 जनवरी 1952 को कड्डालोर जिले के चिदंबरम गांव में वेंकटरामण का जन्म हुआ। वेंकटरामन के पिताजी को गुजरात राज्य में वडोदा के महाराजा सयाजीराव विद्यापीठ में जीवरसायनशास्त्र  विषय के

 उनका घराना ही '' शास्त्रज्ञानो'' का घराना कहलाता था।अपने लड़केनें अपने जैसा नाम कमान चाहिए, ऐसी इच्छा सभी के माता-पिताकी रहती है ठीक उसी तरह सी व्ही रामन की भी  इच्छा थी। मराठी में एक पंक्ति है , '' संस्काराचे मोती '' ठीक इस पंक्ति की तरह , सी व्ही रामन और राजलक्ष्मी जी इन दोनो के संस्कार से एक मोती निकला जिसका नाम है, व्यंकटरमन रामकृष्णन, व्यंकटरामन में छोटेपन से ही कुछ नया तलाश करने की वृत्ती नजर आती थी।


वेंकटरामन का  अध्यन / Venkataraman's studies

वेंकटरामन की पढ़ाई प्राथमिक ,माध्यमिक ,उच्च माध्यमिक बड़ोदरा में हुई। बड़ोदरा के जीजस अण्ड मेरी कन्व्हेंट स्कुल में उनकी पढ़ाई हुई। ऑस्ट्रेलिया के एडीलेड में भी बढ़ाई की। वहा का शैक्षणिक वातावरण अच्छा था साथ में  तज्ञ टीचर और अभ्यासू दोस्त मिले ,सन 1971 में ''सयाजीराव युनिव्हर्सिटी'' से बी.एस.सी फिजिक्स में डिग्री ली। व्यंकटरमन रामकृष्णन जी को '' नॅशनल सायन्स टॅलेंट स्कॉलरशिप'' मिलती थी।अमेरिका में 1976 को ''ओहिओ युनिव्हर्सिटी '' से ' फिजिक्स ' में पीएच.डी की डिग्री ली। लेकिन उनकी इच्छा '' जीवशास्त्र '' विषय में निर्माण हुई। उन्होंने कैलिफोर्निया के  '' युनिव्हर्सिटी ऑफ कैलफोर्निया '' में दो साल तक ' जीवशास्त्र ' की पढ़ाई की और 1978 में पदवी प्राप्त किए।


अनुसंधान कार्य और नोकरी/ Research work and job

डॉ. वेंकटरामन राधाकृष्णन को पीटर मुर के येल विद्यापीठ में राइबोसोमपर अनुशंधान करने के लिए इ.स.1978 में पोस्ट डॉक्टरेट फेलोशिप मिली। राइबोसोमपर अनुशंधान करा चालू किया। पोस्ट डॉक्टरेट फेलोशिप पूरी होने के बाद वेंकटरामन ने 49 विद्यापीठ में प्राध्यपक के नोकरी के लिए अर्ज किया। लेकिन उन्हें प्राध्यापक की नोकरि नहीं मिली और उन्होंने 1983 में ब्रुकहेवन के राष्ट्रीय प्रयोगशाला में वैज्ञानिक के तौरपर नौकरी मिली। उन्होंने इ.स.1983 ते 1985 इस कालावधी में रबोसोमपर अनुसंधान कार्य किए।       

 सन 1995 में ''उटाह विद्यापीठ '' में  जीवरसायनशास्त्र  के प्रध्यापक पद पर नियुक्त हुए। उन्होंने वहा पर चार साल नोकरी किए। नोकरी करते समय सन 1991-92 में '' मेडिकल रिचर्स कौंसिल लैबॉरेटरी ऑफ मॉलिक्युलर बायॉलॉजी केम्ब्रिज ''  इस इंग्लैंड के संस्था में व्हिजिटर के पद पर काम किए।


'' एम.आर.सी.कौंन्सिल लेबॉरटरी ऑफ़ मोलेक्यूलर बॉयोलॉजी '' यह संथा छोटी है, ,मराठी में एक कहावत है, '' मूर्ति छोटी और कीर्ति महान ''  संस्था में बहुत ही अनमोल अनुशंधान के कार्य होते है इस संस्था ने वेंकटरामन को बुलावा भेजा। बुलावा याने की, उन्होंने किए हुए अनुसंधान का फल था। वेंकटरामण ने बुलावा का स्वीकार किया क्यों की इस संस्था में मात्र 25 वैज्ञानिक '' रिसर्स प्रोजेक्ट '' पर कार्य करते है। वैसे ही इस संस्था के 18 वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार मिला है। इ.स. 1999 में एसी संस्था में वैज्ञानिक के पद पर नोकरी करने लगे और आजभी इसी संस्था में कार्यरत है।      



सन 1999 में अनुसंधान संस्था ने रामकृष्णन के अनुशंधान निबंध प्रसिद्ध किए। '' 305 के उपयुनिट के रचना का पुर्ननिर्माण, कंप्लिट मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर ऑफ द 305, सबयुनिट ऑफ द रीबोझम और कॉम्प  कॉम्पलैक्सेस विथ सेव्हरल एंन्टीबॉयोटिक्स इ.सोध प्रसिद्ध हुए। प्रोटीन के घटक, पृथकरण, उनकी संरचना , निर्मिति इ. का अनुसंधान चालू किया और पेशीकी ऑटोमॅटिक संरचना होती है यह सिद्ध करके दिखाया इन अनुसंधान कार्य में उनके शास्त्रज्ञ दोस्त सामिल थे।सन 2009 में रसायनशास्त्र में थॉमस ए.स्टेटिस और अदा  इन के साथ, डॉ.व्यंकटरामन रामकृष्णन को विश्व का सर्वोच्च नोबेल पुरस्कार देकर सन्मानित किया गया।   

डॉ.व्यंकटरमन रामकृष्णन जी का विवाह '' वेरा रोझनबेरी '' से हुआ ,उन को ''तानिया कपका''नाम की लड़की है और  ''ऑरेगॉन ''में डॉक्टर है। एक लड़का है, जिसका नाम ''रामन रामकृष्णन'' है ,और न्यूयॉर्क में प्रसिद्ध पेशी तज्ञ डॉक्टर है।


डॉ. वेंकटरामन  पुरस्कार 

 ➤ रॉयल सोसायटी के फेलो लन्दन

➤ मेंबर ऑफ़ यु.एस.नॅशनल अकैडमी ऑफ सायन्स

➤ ट्रिनिटी कॉलेज ,केम्ब्रिज के फेलो

➤ सन 2007  में '' ल्यूइस जीएनटेट प्राइज़ फॉर मेडिसिन ''

➤सन 2008  में ब्रिटिश बायोकेमिकल सोसायटी की तरफ से '' हेल्दी मेडल '' से सन्मानित

,➤सन 2009 को  (रसायनशास्त्र  )'' नोबेल पुरस्कार'' से सन्मानित ,

➤ सन 2010 को '' पद्मविभूषण ''से सन्मानित किया गया। 

➤सन 2012 में मोलेक्युलर बॉयोलॉजी में सेवा दी इसके लिए '' नया साल सन्मान ''  

     
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