व्ही. एस. नॉयपॉल जी का जीवन चरित्र / Life of NeoPaul

 
DR. V.S. Naypal


व्ही.एस. नॉयपॉल परिचय / Introduction to v. s . Naypal 

नाम :- विद्याधर सूरजप्रसाद नायपॉल ( व्ही.एस नायपॉल )

जन्म दिनांक :- 17 अगस्त 1932 

जन्म स्थल :- त्रिनिदानद के छगुआनस गांव में 

पिताजी का नाम :- सूरजप्रसाद 

नोबेल पुरस्कार प्रदान दिनांक :- 11 अक्टूंबर 2001  ( साहित्य - क्षेत्र )


व्ही एस नायपॉल का पारिवारिक जीवन / Family life of V. S Naipaul


व्ही.एस.नॉयपॉल जी का जन्म 17 अगस्त 1932 को त्रिनिदाद के '' चागौनास '' गांव में हुआ। पिताजी  का  नाम  सूरज प्रसाद है। नॉयपॉल जी के दादाजी ढाका शहर के निवासी थे। ढाका अभी बंगाल में है। नॉयपॉलजी  ब्रामन  समाज के थे। सूरज प्रसाद पत्रकार थे।विद्याधर को अछी शिक्षा देने की उनकी इच्छा थी इसलिए विद्याधर  को प्राथमिक पढ़ाई के लिए त्रिनिदान के स्कुल में दाखल किया। त्रिनिदान एक ऐसा देश है की वहा पर सभी प्रकार के विचार, संस्कृति, जातिधर्म,वंश अठरापगड़ जात के लोग रहते है।इन लोगो के कारण विविध रंगों से  नटा हुआ देश के नाम से पहचान है।सन 1948 में सूरप्रसाद परिवार के साथ स्पेन बंदरगाह के पास रहने को आया था उस समय विद्याधर 16 साल का था। उनकी शिक्षा स्पेन के ' क्किन्स रॉयल ' कॉलेज में हुई।सूरज प्रसाद ने मेहनत कर के, भूखा - प्यासा रहकर अपने बच्चो को पढ़ाया। उनकी इच्छा थी, की  ''साहित्य '' क्षेत्र में  मैने जो कार्य नही किया यह कार्य मेरा लड़का विद्याधर और शिवा कर के दिखाएगा।

घर के अच्छे संस्कार, सुशिक्षित घराना,पिताजी का मार्गदर्शन उनको मिला, ओर उनके पिताजी को लेटर आते  थे, वहा के विचार उन्हें प्रभावित करते थे मुरलीधर को लेखक बनाने के लिए उनके पिताजी मार्गदर्शन करते थे मार्गदर्शन के विचार इस प्रकार है :-  लेखक के कलम के बारे मे कहते है,की  '' महान  लेखक  लिखने  बैठता  है , तो लिखतेच रहता है, उसको  कितना लिखना है, इस का उनको ध्यान  ही नही रहता है, क्योकि, प्रकाशक  उनकी राह देखते रहते है।लिखते समय,प्यास, भूख ,वैयक्तिक काम भुलाकर लिखने का काम करते है काम   नही है तो गॉर्डन में घुमने जाओ काम है तो काम करो प्यारे  मुरलीधर तुभी मेरे जैसा लिखा कर दो - तीन  साल  में अच्छा लेखक बनेगा मैंने  साहित्य में  कुछ नही किया लेकिन तू करके दिखाना साहित्य में नाम कमा के तुझे दिखाना है अभी पढ़ाई चालू है, तो कोई बात नही पढाई पूरी होने के बाद घर नही लौटा तो चलेगा लेकिन  तूझे अपना लेखन कार्य चालू रखना है। मुझे लगता है, की लेखन कार्य में ही तुझे सफलता मिलेगी।आनंद , सुख, प्रसिद्धि '' लेखन''  कार्य  से   मिलेगी यह प्रसिद्धि किसी काम से कम नही मिलेगी मेरे विचारो पर विचार  कर ओर भविष्य में लेखन कार्य चालू करना यह पत्र उनके पिताजी ने  08 मार्च 1952 में लिखा था।
 
अपने लड़के के प्रति भविष्य के बार में चिंता, मार्गदर्शन ,प्रेम इसी पत्र के कारण विद्याधर '' महान  '' साहित्यक '' बने।ब्रिटिस समाज में अपनी इज्जत बनाने के लिए ब्रिटिशलड़की से शादी  किया। कुछ दिन केबाद पहली  पत्नी को तलाक दिया। उसके बाद पाकिस्तानकी ' नदिर  ' ( पत्रकार ) लड़की के साथशादी  की।अभी ब्रिटन में  रहते है।



 सन 1953 में उनके जीवन में  दुःखद  घटना घटी उनके पिताजी सूरज प्रसाद का निधन हुआ। मन  के  विचारो  को कलम से लिखने का  विद्याधर ने निर्णय लिया उन्हों ने शपथ ली की , '' मैं अपने पिताजी का सपना पूरा करूंगा ओर विश्व साहित्य में ऐसा काम करूंगा की मेरे पिताजी  के आत्मा  को  शांति  मिलेगी''। उसी  दिन  से लेखन  कार्य  चालू  किया।  उस  समय  उनकी उम्र 21 साल थी।  ऑक्सफ़र्ड  विश्वविद्यालय लंदन से स्नातक की परीक्षा पास किए। सन  1954 में बी.बी सी. के  '' कैरेबियन  वायस '' में पत्रकार का काम करने का मौका  मिला सन 1957 में  एक साहित्यिक  पत्रिका  '' द  न्यू  स्टेटसमैन  '' में काम करने लगे। वहा पर ' द मिस्टिक मेस्यूर ' कादंबरी प्रकाशित की। लेकिन आर्थिक फायदा  नही  हुआ।सन  1958  में  '' द सफरेज  ऑफ  एलवीरा '' यह  दूसरी कादंबरी  प्रकाशित  किए।  यहा से उनका लेखन कार्य चालू  हुआ।  उसके  बाद  उसकी  लेखनी  कभी नही रूखी '' द  मिस्टिक  मेस्यूर '' इस  कादम्बरी  पर  फिल्म  बनाया  गया।

भारतीय सभ्यता ओर संस्कृति पर विद्याधर ने तीन पुस्तक लिखे भारतीय समाज अपने कमजोरी के कारण अपनो मेफसा है।विकसित देश के साथ स्पर्धा नही कर सकते इस विषय पर ''ऑन एरिया ऑफ डार्कनेस '' यह पहली पुस्तक लिखे। भारत के लोग अपने समाज के लोगो का न्याय नही कर शकते।सामाजिक एकता नही है। इस विषय पर '' ए वॉन्डेड सिविलाइजेशन '' यह दुसरी पुस्तक प्रकाशित किए। भारत आझाद होने के पहले  मुगलोंका राज था। उनके शासन काल में भारत का नुकशान हुआ।अझादी के बाद भारत का जलद गति से विकास होने लगा। भारत की  संस्कृति अमर है। इस विषयपर  '' ए  मिलियन  म्युटिनीज नाउ ''  यह  तिसरी पुस्तक प्रकाशित किए।' बियॉन्ड द बिलीफ 'इस्लामिक इक्सकर्सन एमंग द कन्व्हवर्टेड पीपल ' यह पुस्तक  विद्याधर की  विवादात्मक पुस्तक है।विद्याधर के विचार उनके साहित्य से प्रगट होते है। प्रसिद्ध लेखक  खुशवंत  सिंह  कहते  है , की नॉयपॉल  एक  परखड  विचार  लिखनेवाले  साहित्यिक  है। उनके साहित्य से '' सत्य '' के  दर्शन  होते  है।

साहित्य लेखन / Literature writing  

विद्याधर को अपने पिताजी की तरह साहित्य में अभिरुचि थी। लेखन कार्य मे प्रसिद्धि और सन्मान उनके पिताजी ने प्राप्त नहीं किया यह काम विद्याधर करना चाहता था और अपने लेखन कार्य को सुरुवात किया। 
व्ही एस नायपॉल की पहली कादम्बरी '' दी मिस्टिक मैस्यूर '' इ.स. 1957 में उम्र के 25 वे साल में प्रकाशित किया और इसी कादंबरी के आधार पर इ.स.2001 में एक फिल्म बनाई गई। इ.स.1958 में '' दी सफरेज आय एलवीरा '' और इ.स. 1959 में '' मिग्वेल स्ट्रीट '' यह दो कादंबरी प्रकाशित किया और उन्हें साहित्यिक के नाम से जानने लगे।           


  सन 1971 से नोबेल पुरस्कार के बारे मे चर्चा चालू थी। उनके साहित्य  को विरोध था। लेकिन उसके साहित्य  को 11 अक्टूबर 2001 को  नॉयपॉल जी को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित  किया  गया ।यह पुरस्कार मिला तब उन्हें लगा की मैंने अपने पिताजी के आत्मा को शांति दी।ओर उनका सपना पूरा  हुआ। व्ही.एस . नॉयपॉल एक परखड, प्रतिभावंत  साहित्यक है। उनके साहित्य से समाज का दृश्य चित्रित होके  विश्व  ने   अपनाया, ऐसे  प्रतिभावंत  साहित्य से  शिकणे  को  बहोत कुछ   मिलता  है।  पिताजी  के निधन  के  बाद , लेखन कार्य  करना  बहोत  बड़ी  बात  है , यह  कहना  चाहूंगा  की  , उन्होंने  परिस्थिति का समस्या का सामना  करते हुए,लेखनकार्य चालू रखाऔर वे साहित्यिक बने। दोस्तों हमारा कार्य, हमारा सपना , पूरा हो शकताहै , अगर हम  नॉयपॉलजी जैसे लगातार लगन से कार्य करते है त ,सपना, नोकरी , बिजनेश  इ . में  कामयाब  जरूर  होंगे , दोस्तों  कामयाबी हमारी एक दिन कदम जरूर चूमेगी।



व्ही एस नायपॉल के सन्मान और पुरस्कार जानकारी /  V. S. Naipaul's honors and awards information 

➤ '' जॉन लेवलीन पुरस्कार ''  - 1958  

➤ '' सॉमरसेट मॉम पुरस्कार '' - 1960 

➤ '' हावथोरडन पुरस्कार '' - 1964 

➤ '' डब्लू एच स्मिथ साक्षरता पुरस्कार '' - 1968 

➤ '' प्रथम बुकर पुरस्कार '' - 1971 

➤ '' जेरुसलेम पुरस्कार '' - 1983 

➤ '' डेव्हिड कोहेन जीवनगौरव पुरस्कार '' - 1993 

➤ '' सर '' सर्वोच्च नगरी बहुमान ब्रिटिश सरकार की और से 

➤ '' नोबेल पुरस्कार '' - 11 अक्टूंबर 2001 ( साहित्य )

कथा वाङ्मय



➤दी मिस्टक मँरसुअर - 1957   

➤दी सफ़रज ऑफ़ एल्विरा - 1958

➤मिग्वेल स्ट्रीट - 1959

➤ए हाउस फॉर मि. बिश्वास - 1961

➤मि. स्टोन अण्ड दी क्नॉइट्स कम्पेनियन - 1963

➤दी मिमिक मेन - 1967

➤ए फ्लैग ऑन दी इस्लॅंड - 1960

➤गोरीलाज - 1975

➤ए बेंड इन दी वर्ल्ड - 1994

➤ए बेण्ड इन दी रिव्हर - 1971

➤फाइडिंग दी सेंटर - 1984

➤दी एनिग्मा ऑफ़ अरावहल - 1987

➤हाफ ए लाईफ - 2001
               
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