क्रोध / Anger


Anger














किसी चीज का ज्यादा सेवन हमारी सेहत के लिए हानिकारक ही साबित होता हैं कोई भी इंसान ज्यादा सुख सहन कर सकता है और न ही दुख ,सुख - दुख का पल्ला भी थोड़ा आगे-पीछे होना चाहिए। शराब यदि लिमिटेड में ली जाय या हफ्ते में एक या दो बार चम्मच से लिए तो वह हमारे लिए दवा साबित होती है। लेकिन इसी मदिरा का सेवन यदि ज्यादा हो तो यह हमारे शरीर के लिए हानीकारक साबित होता हैं।


किसी किसी को पेट का दर्द रहने पर डॉक्टर खुद उन्हें तंबाखु की दो या तीन पत्ती खाने को बताते है। यह भी उन मरीज के लिए दवा साबीत होती हैं। लेकिन तंबाखु के सेवन का प्रमाण यदि ज्यादा हो तो वही इंसान की सेहत के लिए हानीकारक साबित होता हैं।

कहानी 

किसी गाँव में एक सिद्धिपुरुष कहलानेवाला बाबा था। लोग उसे बहोत मानते थे। उसे अपने सिद्धि पे बहोत घमंड था। उस गाँव के लोग भी भोले थे। बाबा अपनी झूठमूठ की सिद्धि बनाके लोगों को गलत सलाह देता था। उसी गाँव में एक संतमहात्मा पधारे उन्हें उस गाँव की स्थिति कुछ अलग ही दिखाई पड़ी। उन्होंने गाँव की थोड़ी भ्रमंती की तब पता चला की , कोई सिद्धिपुरुष गलत रहा दिए जा रहा है। अब महात्माजी को बिचार आया की गाँव के भोले लोगो को कैसे इसके गलत रास्ते से निकाला जाए।

 महात्माजी एक दिन स्वयं सिद्धिपुरुष के पास गए और उन्हें ज्ञान की कुछ बाते पुछि। महात्माजी ने लोगों के सामने उसकी परीक्षा लेना उचित समझा। सिद्धिपुरुष महात्मा जी के बातो से इतने क्रोधित हुए की ,घुस्से में आकर बोले इस गाँव में सारे भोले लोग है। उन्हें लूटना बहुत ही आसान है। उन्हें शास्त्र के बारे मे कुछ पता नही है। मैं जैसा करूँगा वैसे ही सब करेंगे। अपने क्रोध में वो इतना भूल गया की सामने वही भोले भाले गाँव के  लोग हैं। गॉव के लोगों को भी अपनी मूर्खता ध्यान में आयी। उन्हों ने सिद्धिपुरष को पत्थर से मार मार कार जखमी कर दिए और महात्माजी ने उन्हें अंधेरे से बहार निकाले,इसीलिए उन्हें दिलसे धन्यवाद दिए।



सीख  

क्रोध हमारा नुकशान ही करवाता है। आप सभी ने OMG (Oh, My God ) यह Movie देखे ही होंगे। नही देखे होंगे तो देख लीजिए। परेश रावल जब कोर्ट में भगवान पर केस करता है। तब खुद को सिद्धिपुरुष कहनेवाले बाबा भी कोर्ट में चिढ़कर जोरजोर से बोलने लगता है। तब परेस रावल उस सिद्धिपुरुष को व्याख्या बताते है, ''क्रोध पर काबू पानेवाला'' हर कोई सिद्धपुरुष या सिद्धित महिला कहलाती है।

क्रोध के प्रकार 

अगर हमने कोई गलती नही की और हमे बारबार उसी गलती के लिए दोषी ठहराया जाये तो हम क्रोधीत बन जाते हैं।
किसी बात का अहंकार भी हमे क्रोध की ओर ले जाता हैं। हमारे आसपास यदि शोरसाराब ,घर मे झगडे हो या हमेशा हमारी सेहत ख़राब हो तो हम चिड़चिड़े बनते है। और इसका परिवर्तन धीरे-धीरे क्रोध में होता हैं।

क्रोध से कैसे बचे

क्रोध से बचने का सस्ता और आसानी से बचने का तरीका '' ध्यान करना '' .
यदि हमे किसी बात पर क्रोध आता है तो, उस बात से या उस कंडीशन या फिर उस situation से कुछ देर के लिए हट जाना या दूर जाना चाहिए।ज्यादा oily या तिखी सब्जी या चीजें नही खाना आदि।

क्रोध के दुष्परिणाम

'' ज्यादा क्रोध से हमारे मस्तिष्कपर असर होता है।
बिझनस पर मन नही लगना।
कोई भी काम समय पर नही होता।
successकोसो दूर हमसे भागता है।
हमारी सेहत पर बुरा असर होता है ।''

क्रोध हमारा सब कुछ हम से छीन सकता है।इसीलिए, सावधान ! Meditation करो ओर अपने क्रोध पर काबू पा सकते हो। अन्यथा दुखो का ही सामना करना पड़ता है। हर कोई हमे इग्नोर करने लगते है। और हम देखते ही देखते अकेले हो जाते है।

संसार में जितने भी महात्मा या पूज्य आत्माये हुई है, उनके जीवन में भी ऐसी विपरीत स्थिति आई है, जिस से वे भी क्रोधित हो शकते थे।लेकिन उन्हें क्रोध के परिणाम मालूम थे।''प्यार'' से हम लोगों को जित सकते है, उन्हें अपना बना सकते है।हम क्रोध में अपने आप पर काबू नहीं रख पाते हैं।लोग हमसे घृणा करते है। हम दूर जाते है। समाज में क्रोधित लोगो का कोई मोल नही। क्रोधमय जीवन की कीमत शून्य है।
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