कठिन समय में ही मौका मिलता है


आज की दुनिया में हर किसी को जल्द ही सफलता चाहिए, जैसे ही कोई काम चालु किये की बहुत ही जल्द उसका सकारात्मक परिणाम  भी चाहिए। अगर ऐसा न  हो तो हम निराश होते है। क्यों  की हमे जिंदगी में Shortcut जाना  बहुत पसंद है। कम मेहनत से  बहुत कुछ प्राप्त करना  चाहते है। किंतु ऐसा नही होता। जब तक रात नही ढलती तब तक सूरज नही उगता और  उजाले में काम करके सुकून की नीँद लेनी हो तो फिर से रात  का इंतजार करना ही पड़ता है।

सुबह-शाम, बारिश-गर्मी इसी तरह से कभी अच्छे- बुरे दिन यह भी हमारे जीवन का अहम हिस्सा है। जिसके पास मन की शांति, कार्य का नियोजन, सहनशीलता आदि गुण होते है, वही इंसान आज तक और आगे भी सफ़ल  होंगे। लेकिन आज के युवावों में अपने कार्य का नियोजन, सहनशीलता, अपना काम करने की जिद आदि गुण होने चाहिए। आज का युवा हमेशा परेशान, चिड़चिड़ा और डरा-डरा सा  रहता है।

 लक्ष्य हर किसी का अच्छा होता है,  उस पर निरंतर काम करना चाहिए। जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए हमारे सामने ऐसे अगणित प्रेरणास्त्रोत है। कभी-कभी तो हमारे आस-पड़ोस में ही  हमें ऐसे प्रेरणास्त्रोत देखने को  मिलते है। बड़े-बड़े समाजसुधारक, बहुमूल्य आत्माये, शास्त्रज्ञ आदि , ऐसे ही नहीं बने।
 जैसे की.........


न्यूटन की तर्कशक्ति 

एक छोटा सा लड़का एक दिन एक पेड़ के निचे खेल रहा था। उसके पास की गेंद वह  बार- बार ऊपर फेकता वो  गेंद बार-बार निचे आती। उस लड़के ने ऐसा लगातार किया।  यह क्रिया ऐसे ही क्यूँ होती  है ?  जब उसने लगातार अपने मन की उलझन को सुलझाने पर कार्य किया। तब उसे पता चला की धरती के अंदर ऐसी शक्ति है जो ऊपर फेकि हुई चीज़  को निचे ही खींच लेती है।इस सिद्धान्त पर न्यूटन ने कार्य किया।

आज यही सिद्धान्त ,'' न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का सिद्धान्त कहलाता है। लेकिन  एक  महिना या एक साल काम करने पर भी  हमे सफलता नहीं मिलती। उस काम के पीछे लगे रहना चाहिए। बिच में छोड़ के नही जाना चाहिए।तभी हम किसी भी कार्य में सफल हो सकते है। न्यूटन भी अपने काम के पीछे लगे थे इसलिये, आज उन्होंने''गुरुत्वाकर्षण'' का सिद्धान्त विश्व को बताया।


गो.ग.आगरकर - समाजसुधारक

गो.ग.आगरकर इनपर बचपन में ही दुखों  का पहाड़ टुटा। मामा के यहाँ रहे। पढ़ने की बहुत इच्छा थी। मामा के गांव से सातारा पैदल जाने में पुरे दो दिन दो राते लगती थी। फिर भी मैट्रिक की परिक्षा देने पैदल गए थे और उत्तीर्ण  भी हुए थे ।  उसके बाद समाज को अंधकार से मुक्त करने के लिए उन्होंने समाजसुधारणा का कार्य किया। लोगो ने तो उनकी '' जीवित प्रेत यात्रा '' भी नकाली थी। फिर भी वे अपने कार्य से डगमगाये नही जहाँ लक्ष्य स्पष्ट है, रास्ते पे चलने के लिए मन पूरी तरह से तयार है। तो फिर हमें कोई भी कठिन परिस्थिति रोक नही सकती।




वि.दा.सावरकर -

स्वातंत्र्यविर विनायक दामोदर सावरकर एक बार सागर के बीचो बिच फँस  गए थे। अचानक से गहरा तूफान आया उनके साथ उनके खलाशी मित्र भी थे। तूफान को देख सारे डर गए थे क्यूँ की नाव सागर के बिचो बिच फस गई थी। सावरकरजी ने अपने खलासी मित्रों को धीरज दिया और समझाया की,हमारी जिंदगी सागर के बिच की है,सागर में ऐसे तूफान आते जाते ही रहेंगे।अगर हम ऐसे तूफान से डरे तो हम कभी आगे नही बढ़ सकते ऐसा सुनते ही खलासी मित्र संभाले और धीरज के साथ अपनी नाव किनारे तक लेकर आये।

हर किसी के जिंदगी में एक न एक तूफान आता ही है,जिसकी जिंदगी में कोई तूफान उठा न हो, ओ जिंदगी कोई काम की नही। हमारी जिंदगी में तूफान कठिन समय हमे आगे बढ़ाने के लिए ही आते है। वह हमे सजग करते है की जिंदगी एक तूफान है इसलिए जो कठिन समय का स्वीकार करता है वही मंजिल को छूता है।

किसीने खूब कहा है की कठिन समय का स्वागत करना चाहिए क्यों की कठिन समय और तूफान ही हमे हमारे मंजिल तक पहुंचने में मदद करते है  जीवन व्यापन करते समय ख़ुशी ही ख़ुशी हो तो हमे समस्या का अर्थ ही नहीं समझता आपके आस पास ऐसे लोगों को देखिये जो बचपन से समस्याओंसे घिरे होते है। लेकिन जीवन में आगे भी वही लोग बढ़ते है।

'' so , my deer friend, don't cry when challenge has been came in your life. Accept its, because, its the key of success in yor Bright life.''


'' Best luck ''                  


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