स्वार्थी, मतलबी लोगों से सावधान


हे भगवान !
आपने क्यू यह गुण इंसान में डाले जिसे इंसान ने इंसान के घोटे हैं गले
हे भगवान!
यह कीड़ा अगर किसी को लगा
और यह जहर यदि किसी ने पिया तो
संसार में वह भी पापी से मिले।
हे भगवान!
मुझे न देना ऐसी कुबुद्धि
मुझे न महसूस हो ऐसी दुबुद्धि
यह तो है केवल अघोरी वृति।


जिस तरह से पशुओंको रोग होता है ,अनजान छोटे -छोटे पैधों को कीड़ा लगता है ,उसी प्रकार मानव को भी स्वार्थी मतलबी कीड़ा लगा है।  यह कीड़ा हर इंसान में दिखाई नही देता। वैसे तो ,हर इंसान स्वार्थी है,और स्वार्थी होना भी चाहिए। जिस तरह,अपने दादा ,परदादाओंसे अनुवांशिक तौर पर कुछ अच्छे या बुरे गुण बच्चो में आते है ,उसी तरह यह अवगुण भी कुछ प्रमाण में मानवजाति में आ ही जाता है।  मगर कुछ लोग जानबूझ के भी इस अवगुन को भी अपना मित्र बना लेते है।


हर इंसान ,पशु स्वार्थी होता हैं। यह अवगुन हर किसी इंसान में रहता ही है। परंतु इतना भी स्वार्थी नही बनना जिस से किसी को ठेस पहुँचे। इंसान स्वार्थी होना चाहिए लेकिन उसकी भी सिमा होती हैं। किसी भी बात का अतिरेक जहर साबित होता हैं। यह बात स्वार्थी लोगों ने भी याद रखना चाहिए।


कभी-कभी ,जो हमारे लिए अपनी जी-जान लगा देता हैं। दिल से हमें मदत करता हैं। हमारे लिए खुद के दुख दर्द को भुलाकर हमारे लिए भगवान बनके खड़ा होता है ,ऐसे इंसान को हम एक ही झटके में अपनी जिंदगी से निकाल बाहर फेक देते है।  उस समय हम भी भूल जाते है की ,आज हम जो कुछ भी है ,हम उसीके अच्छाई की बजह से ही, है। लेकिन तब आँखोंपे अहम या घमंड की ,स्वार्थ की पट्टी बँधी होती है। जब हमारा स्वार्थ पूर्ण होता हैं ,तब हम इन महामानव पर शब्दों के जहरीले बाण भी चलाते है। फिर भी यह महामानव हमे दुवा देते है।


बच्चो को जन्म देना ,बड़ा करना ,पढ़ाई ,अच्छे संस्कार देना यह मा-बाप का धर्म ही है। क्यों की संसार की धुरा  को आगे बढ़ाने के लिए ,यह सारी बाते आवश्यक है। पर जिन मा-बाप ने हमारे लिए इतना कुछ किया,ऐसे माता-पिता के बुढ़ापे का सहारा बनना भी बच्चो का सबसे पहला फर्ज है। एक दिन होता है की मा-बाप बच्चो की हर गंदगी साफ करते है। और कुछ मा-बाप की जिंदगी में बच्चे एक दिन ऐसा तूफान लाते है की,जन्म देनेवाले को ही गंदगी समजकर घर से बेघर कर देते हैं। क्योंकि पति पत्नी के स्टेटस के सामने, घमंड के सामने मा-बाप भिकारी लगते है। यह भी 'स्वार्थी' अवगुन का एक प्रकार ही है।


समाज में अपने दोस्तों में ऐसे लोग बहुत मिलेंगे ,जो दूसरों का फायदा लेने के बारे मे ही सोचेंगे। ऐसे लोगों को कैसे पहचानें?



स्वार्थी लोगों की पहचान   

मुँह पे तारीफ करना। अपना काम निकालने के लिए बड़ी-बड़ी बाते करके हमारी तारीफ करना। हमारे झूठ को भी सच्चाई की तरह बदलना। अपना काम निकलने तक प्यार से हमसे बर्ताव करना। ऐसे लोग यदि आपके आसपास है ,तो कृपा करके एक बात याद कीजियेगा। सिर्फ एक दिन , खुद के दिमाक से बनावटी कंडीशन तयार करना। उसमे इस स्वार्थी को सहायता माँगना। आना न आना यह तो बहोत दूर की बात है ,पर इसने अगर का-कू किया,तो समज जाना की ऐसे इंसान से दस कदम की दुरी ही अच्छी है।


दुनिया में क्या क्या नजारे नजर आते है। 
सितारे कब कतारे बन जाते हैं। 
दूसरों का मजाक उड़ानेवाले यह स्वार्थी लोग। 
एक दिन दृष्ट कहलाते हैं। 

''So , Be careful for selfish persons save youerself and save your feelings ''


Best Luck 


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