अच्छी आदते ( Good Habits )

प्राचीन काल में गुरु शिष्य पद्धति से पढ़ाई पूरी की जाती थी।शिक्षा पूरी होने पर शिष्य ने पूरी तरह से ज्ञान अपने जीवन में भी उतारा या नहीं इसकी पूरी तरह परीक्षा ली जाती है और शिक्षा पूरी करने वाले छात्र को घर भेजा जाता है।  ऐसे ही एक ऋषि के आश्रम में तीन छात्र पढ़ रहते। तीनों छात्रों की पढ़ाई पूरी होने पर ऋषि ने उनकी परीक्षा लेने की सोचे। कल तिन्हो शिष्य अपने अपने घर वापस जानेवाले थे। उसके पहले ही ऋषि ने सुबह ही शिष्यों के जाने के मार्ग पर काटे बिछाए और एक जगह छुपकर बैठे।  घर जाने की जल्दी में तीनो शिष्य जल्दी ही रूम के बहार निकले। 


शिष्य की परीक्षा 

पहला शिष्य 

काटो से छलांग मार कर गया। 

दूसरा शिष्य 

काटो पे पत्थर रखकर उस पत्थर पर पाव रखकर गया। 

तिसरा शिष्य 

रास्ते पे बिखरे काटो को उठा के ऐसी जगह फेक आया जहाँ किसी को तक़लिब न हो सके। 

ऋषि ने तीनों शिष्य को बुलाकर तीसरे शिष्य को जाने की अनुमति दी और दोनों को आश्रम में ही रखे ऋषिने कहा की अच्छी आदते यह भी है की जो दुसरो के बारे में अच्छा सोचे। 




विद्यार्थी जीवन में ही अच्छी आदते लगान चाहिए 

मनुष्य का मन चंचल होता है उस पर काबू पाना आसान नहीं मन पर काबू पाने की विधि अनेक धर्मग्रंथ में बताई है। उस मे से ही अच्छी आदत एक है। अर्थात जो हमारे मन को नहीं पटता उसे मत कीजिए गलत बातोंका परिणाम इंसान को पता होने के बावजूत भी वह गलत आदते करता है। लेकिन एक बार उसका गलत मार्ग पर चलना चालू हुवा की उसे छोड़ना उसके लिए कठिन हो जाता है। क्यों की यह भी उसकी आदत बन जाती है। ऐसे इंसान दूसरों की भावनाओं की कदर भी नहीं करते। अच्छी आदतों से मनुष्य की इज्जत इतनी बढ़ती है की उसके साथ रहने वाले दोस्त को भी अच्छे परिणाम मिलते है। 


हर किसी के जीवन में अच्छे आदत को बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। लेकिन सबसे ज्यादा छात्रों में इस का महत्त्व दिखाई देता है। अच्छी किताबे पढ़नेवाला अच्छी सोच रखने वाला जरूरत हो उतना ही बोलनेवाला हमेशा दूसरों की मदद करने वाला छात्र आगे जाकर समाज में अपनी अलग पहचान बनाता है। अपने जीवन का ध्येय निश्चित करने के बाद उसे पूरा करने के लिए उसे ज्यादा मेहनत करने की जरूरत भी नहीं पड़ती। 


अच्छी आदतों से दिन की सुरवात करे 


दिन की सुरवात सुबह ४ बजे से होना चाहिए। सुबह ४ बजे उठकर प्रातःविधि पूरी करे। ५ बजे ध्यान करना सुरवात में ५ मिनट ही कीजिए। धिरे धीरे १५ से ३० मिनट ध्यान कीजिए। सुबह के १० से ३० मिनट हमे दिन भर काम करने की ऊर्जा प्रदान करते है। सुबह के ७ से ८ बजे हलकासा नास्ता कीजिए उसके बाद अपने दिनभर के काम का नियोजन कर के उसके लिए समय निकाले दोपहर में समय पर खाना खाइए शाम को बहार से आनेके बाद फ्रेश होकर नास्ता कीजिए थोड़ी देर खेल कूद   टी व्ही देखना ज्यादा से ज्यादा एक घंटा उसके बाद पढ़ाई करो ९ बजे खाना खाइए और १० बजे सो जाइए। 

इस प्रकार आपकी दिनचर्या बना लीजिये सुबह थोड़ा व्यायाम करना जरुरी है। इसप्रकार आप दैनंदिन व्यवहार करते हो तो तन मन और धन भी प्राप्त होने में मदद होगी शरीर और मन दोन्हो साथ देंगे तो हमे जिस मुकाम तक जाना है उस मुकाम को हम हाशिल कर सकते है।       

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