टी.सी जी का संदेश | T.C Ji's message - Rcm




आरसीएम बिज़नस का यह अभियान सभी मायनो में फलदायक है। यह व्यक्तिगत तौर पर आपकी आर्थिक इच्छाओं की पूर्ति करने की क्षमता रखता है तो साथ ही सामाजिक व राष्ट्रीय स्तर पर भी चहुमुखी विकास  माथ्यम बन सकता है। यह नैतिक और आधात्मिक मूल्य के समावेस में विशेष  सहयोग देता है।


जो इस बिजनस को जैसा देखता है वह वैसा ही हासिल करता है। आदि जैसे तैसे पैसे कमाने का साधन समझता है तो वह इसमें ज्यादा दिन नहीं चल सकता है। इसमें वही चलता है जो लोगों को अपना बनता है। जो उनका शोषण करता है वह स्थायी सफलता कभी प्राप्त नहीं नहीं कर सकता है। इसे अपने लिए नहीं बल्कि देश के लिए करो,सेवा के लिए करो। बड़ी सोच रखेंगे तो वैसी ही ऊर्जा निर्मित होगी,आत्म बल प्रबल होगा, निर्णय सात्विक होंगे।

कर्म जीवन में सबको करना है पेट भरने के लिए भी करना है, तो क्यों नहीं जीवन में ऐसा कुछ कर जाए की आत्म संतुष्टि का आनंद प्राप्त कर सकें।

जिन लोगों के पास अवसर नहीं है वे तो फिर भी बेबस हो सकते है लेकिन जिनके पास आरसीएम रूपी अवसर है उन्हें किसी भी तरह अपने इरादों को म्रुर्त रूप देने का अस्त्र उनके हाथ में है। जीवन में हर कदम पर चुनौतियां है।  अपनी सोच के द्वारा उन चुनौतियों का मुकाबला आसानी से किया जा सकता है। ये चुनौतियां ही मनुष्य के लिए परीक्षा की घडी होती है,जो इनको सकारात्मक रूप से लेता है वह सफल हो जाता है और जो उनके सामने अपने आप को निर्बल मान लेता है उसे असफलता का मुँह देखना पड़ता है।

सिर्फ मनुष्य की सोच की इतनी सी प्रवृति उसको कहा से कहा ले जा सकती है। कोई भी इंसान को देखकर यह अनुमान मत लगा लेना की उसके भाग्य ने उसे सफल बनाया है। उसके बारे में पूरी जानकारी हासिल करोगे तो स्पष्ट हो जायेगा की उसने चुनौतियां का डटकर सामान किया, इसीलिए वह सफल हुआ है।

संकल्प में महान शक्ति होती है। किसी भी सार्थक कार्य दे लिए किया गया दॄढ़ संकल्प उस कार्य को सिद्ध करने की शक्ति को कई गुना बढ़ा देता है।  संकल्प को फलीभूत करने के लिए आपको निति सम्मत मार्ग पर चलना होगा। लगनपूर्वक मेहनत करने का जज्बा अपने भीतर पैदा करना होगा और आने वाली हर बाधा का हल सकारात्मक तरिके से ढूढना होगा।

दूसरों की नकारात्मक गतिविधयों से विचलित कभी नहीं होना है।  उनके प्रभाव से अपने आप को बचाने के उपाय खोजने है। केवल किसी पर दोषारोपण कर देने मात्र से समस्या का हल नहीं होता है। आपको  उद्देश्य के प्रति आगे बढ़ते रहने के लिए जागरूक होकर हर तरह से उपाय सोचने और करने होंगे।

अपने आपको हीन मत समझो।अपने विचारों और गतिविधियों को इतना ऊंचा उठाओ की आप अपने आप की नजरो में सम्मानित महसूस करो। दूसरों से सम्मान की अपेक्षा मत रखो, वह एक निर्भरता कायम कर देती है। आपको दूसरों की नजरों में महान नहीं बनाना है,स्वयं की नजरो में महान बनना है। भूलकर भी कभी किसी से सम्मान मत मांग लेना, आपका किया हुआ सब व्यर्थ हो जायेगा।

जीवन में कदम-कदम पर चुनाव के अवसर आयेंगे। हमेशा श्रेष्ठ का चुनाव करो। तात्कालिक फायदे को मत देखो। दूर की सोच। सब लोगों के साथ अच्छे सम्बन्ध स्थापित करो। कई बार अच्छाई अपनाते समय लगता है की हमार कुछ जा रहा है लेकिन  हर अच्छाई लौटकर कभी न कभी अच्छा प्रतिफल जरूर देती है।

हर इंसान के भीतर एक श्रेष्ठ इंसान बनने का सब कुछ मौजूदा है सिर्फ उसे पहचानने और उभारने की जरूरत है।

दुनिया में परिस्थितियों ने ऐसा चक्र चलाया है की इंसान की वह मूल प्रवृत्ति कहि खोती जा रही है।  इसलिए अच्छे मार्ग को पहचानने में परिस्थितियों ने ऐसा चक्र चलाया है की इंसान की वह मूल प्रवृत्ती कही खोती जा रही है। इसलिए अच्छे मार्ग को पहचानने में स्वविवेक की आवश्यकता होती है। दुनिया में ज्यादा क्या चल रहा है या लोग क्या कर रहे है वह देख कर आप भी आखे बंद करके उनके पीछे मत लगो। अपने विवेक से अच्छे बुरे को पहचानना सीखो। अच्छे मार्ग पर चलना कभी -कभी चुनौती भरा होता ➤लेकिन जीवन की असली संतुष्टि भी उस पर चल कर ही मिलती है।






गलतियों के सम्बन्ध में कुछ संक्षिप्त मुद्दे आपके सामने रखना चाहूंगा।

➛ आदत वश या भूल वश गलती होना व इरादे से गलत काम करने में बड़ा फर्क है।

➛ जो व्यक्ति जितना ज्यादा काम करता है उतनी ही ज्यादा गलतिया होती है। अंतः यदि किसी से ज्यादा गलतियां हुई है तो यह तो तय है की उसने काम ज्यादा किया है। इसके लिए वह निश्चित रूप से धन्यवाद का पात्र है।

➛ गलतियां इंसान का सबसे बड़ा शिक्षक है।

➛ जब आप किसी को उसकी अच्छाई के बारे में १० बार धन्यवाद दे देते हो तब आप उसकी एक गलती बताने का अधिकार प्राप्त करते हो।

➛ किसी काम में कोई गलती हो जाने पर उसको पूरा छोड़ने के बजाय गलती को सुधारते हुए, आगे बढ़ने वाले ही सफलता प्राप्त करते हो।

➛ यदि आपको किसी की गलती बताकर उसका सुधार कराने की इच्छा है तो पहले उसका मन जितना होगा।
आपके बिच इतने मधुर सम्बन्ध होने चाहिए की वह आपको अपना बिच इतने मधुर सम्बन्ध होने चहिये की वह आपको अपना शुभचिंतक  माने न की निंदक, अन्यथा उसके विपरीत परिणाम ही आयेगे।

➛ जो बात किसी के सामने नहीं कह सकते हो वह उसकी पीठ पीछे भी नहीं कहनी चहिये।

➛ दूसरों की अछाईयों और खुद की गलतियों पर नजर तेज रखनी चहिये।

➛ हर असफलता के पीछे दूसरों पर गलती आरोपित करना ठीक नहीं है।

इन सब बातों का मतलब यह नहीं है की जो जैसा है स्वीकार क्ररते याये। बल्कि इनका उद्देश है की व्यवहारिक तरिके से आपसी तालमेल द्वार एक विशाल समुदाय को सही तरिके से किसी कार्य में सलग्न रखना। सारांश के रूप में सारि बात के कुछ मुख्य उद्देस निचे दिए गए है।

➛ आदमी के अहंकार पर चोट मत करो उसके विवेक को जागृत करो।

➛  दूसरों को सुधारने के लिए स्वंय को आदर्श बनाओ।

➛ छोटी-छोटी बातों के मसले न बनाओ।

➛ आपसी बातचीत के सौहार्दमय माहोल को हमेशा बनाकर रखे।

➛ दूसरों के व्यक्तिमत्व को स्वीकार करना सीखो।

➛ किसी को अपने जैसा बनाने की चेष्टा मत करो बल्कि जिसमें जो प्रतिभा है उसका उपयोग करने का प्रायस करो।

➛ आप सही हो और आप कोई सही बात दूसरें लोगों से भी लागु करवाना चाहते हो यह काफी नहीं है।  उसके लिए सही माहौल, पर्याप्त समय और उचित तरिके का इंतजार करना होगा।

➛ आपका प्रेम किसी से न हो चलता है , लेकिन बैर किसी से न पैदा करो।


आगे की बात को बड़ी गहराई से ले। हम एक बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य में संलग्न है जिसमें सभी आयामों का मिश्रण है जो सामाजिक,पारिवारिक, आर्थिक, आध्यत्मिक, राष्ट्रीय एव व्यक्तिगत सभी परिपेक्ष्य में फलदायक है और जो सम्पूर्ण मानव जाती का कल्याण कर सकता है जो मात्र एक बिज़नस न होकर एक क्रांतिकारक अभियान है। यदि आप इस बिज़नस को एक इतिहास बनाना चाहते है इसमें छीपी हुई एक अदभुत शक्ति का चमत्कार देखना चाहते है तो सब कुछ आपके हाथ में है। सदियों से कई महापुरुषों ने मानव जाती के लिए कई अच्छे कार्य किये है। उससे भी कहि अधिक सम्भावना इस बिजनस सिस्टम में छिपी हुई है।

मेरी बात पर खूब चंतन करें और कभी प्राप्तः काल बैठकर उस सुन्दर संसार की कल्पना करें जो आपको रोमांचित भी करेगा और आर्थिक उपलब्धि से कहि अधिक आधात्मिक उपलब्धि के अहोभाव से आपको भर देगा। इसे आप कोरी कल्पना न समझें यह एक ऐसा सपना है जिसे साकार करना हमारे हाथ में है।

हम जो बिज़नस कर रहे है वह इसका पूर्ण रूप नहीं है, यह हमारी मंजिल तक पहुंचने का एक सूक्ष्म सा प्रवेश द्वार है। जिस दिन हमारा यह अभियान हर तरह से परिपुणे सिस्टम में आ जायेगा, उसके बाद इसे कई क्षेत्रों में प्रवेश करने से कोई नहीं रोक सकेगा।

हम लोग अब आपस में जब भी मिलें या बातचीत करें तो अंदर से एक खुशी महसूस करें और एक दूसरे का पूरा सम्मान करें आपसी तालमेल द्वार इस अभियान को एक ऐसा अंजाम दें जो अपने आप में अद्वितीय हो।

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