मिसाईल मैन के मिसाइलों की जानकारी / MISSILE MAN OF MISSILES INFORMATION


 DR. A.P.J ABDUL KALAM

डॉ.ए.पि.जे अब्दुल कलाम जी ट्रेनी इंजिनीअर से रॉकेट इंजिनीअर,रॉकेट इंजिनीअर से मिसाईल मैन और मिसाईल मैन से राष्ट्रपति यह रामेश्वर से राष्ट्रपति भवनतक का सफर किस तरह से पूरा किया।इसके लिए पढ़ते रहिए डॉ.ए.पि.जे अब्दुल कलाम जी के लेख।

डॉ.अब्दुल कलाम जी के '' रोहिणी '' उपग्रह के सफल परीक्षण के कारण देश के अवकाश तन्त्रविज्ञान में एक महत्त्व के पर्व को सुरुवात हुई। डॉ अब्दुल कलाम ने डिफेन्स रिसर्च एण्ड डेव्हलपमेंट लेबोरेटरी(डी.आर.डी.एल ) की काम करने की जबाबदारी ली थी। '' जीवन रक्षा अनुसंधान और विकाश प्रयोगशाला ''की जबाबदारी मिलने के लिय एक साल लगा और 01 जून 1982 को जबाबदारी मिल गई।



दि.27 जुलाई 1983 को भारत में 'एकीकृत मिसाईल विकास कार्यक्रम'( Integrated Guided Missile Developmet Programme) जाहिर हुवा। इसके लिय सरंक्षण मंत्री ने 388 कोटि का निधि मंजूर करके दिया।

पाच प्रकल्प को पृथ्वी,त्रिशूल,आकाश,नाग,और अग्नि ऐसे भारतीय संस्कृत नाम दिए गए
27 जुलाई 1983 यह दिन डॉ.अब्दुल कलाम के जीवन का बहुत ही महत्व पूर्ण दिन था। क्यों की 'मिसाईल मैन ' बनने का अवसर उन्हें मिला।

मिसाईल के छोटे टुकडो का निर्माण करना, उन्ही जोड़ना, मिसाईल का प्रक्षेपण करने के लिए रेंजेस तयार करना। चाचणी लेने के लिए तंत्र तयार रखना।

इस तरह से मिसाईल तंत्रज्ञान केंद्र( Centre of Excellence of Missile Technology Mo Research cemtre lmart) का निर्माण किया। यह केंद्र हैदराबाद को डी आर.डी.एल परिसर के ' इमारत कंचा ' में केंद्र स्थापित किया गया और सुभारम्भ पंतप्रधान राजिव गाँधी इनके हस्ते दि 3 अगस्त 1985 को किया गया।



अब्दुल कलाम अमेरिका गए थे तभी उनका पसंदिता लेखक ' रॉबर्ट शुलर ' ने बनाई हुई ' क्रिस्टल कैथीड्रल ' बिल्डिंग देखा और वहा मन के मन ही प्रार्थना करने लगे की मै '' बिल्डिंग कांचा '' में मिसाईल केंद्र बनाऊगा।

डॉ.अब्दुल कलाम जी ने तज्ज्ञ का परामर्श लेके ''मिसाईल टेक्नॉलोजी कमिटी'' बनाई। और 390 कोटि का कार्यक्रम था इसे 10 - 12 साल में पूरा करना था एकात्मिक क्षेपणास्त्र विकास कार्यक्रम निचित किया गया। उस समय के सरंक्षण मंत्री श्री वेंकटरमण, भूदल, वयुदल, और नौदल के प्रमुख जनरल कृष्णराव, एअर मार्शल दिलबागसिंग और एडमिरल डॉसन इनकी सहाय्यता और डिफेन्स मेटलर्जिकल रिसर्च लेबॉरेटरी के प्रमुख डॉ.अरुणाचलम इनका मार्गदर्शन लेकर काम बहुत ही जोर शोर से चालू किए।

क्षेपणास्त्र (मिसाईल ) की जानकारी  



1.'' डेव्हिल'' मिसाईल यह स्वदेशी बनावट का मिसाईल था। 19 जुलाई 1984 को अवकाश में प्रसारित किया गया। 

2 . '' त्रिशूल '' जमीन से आकाश में जानेवाला मिसाईल था। श्रीहरीकोटा में त्रिशूल मिसाईल के चाचणी दि 16 सप्टेम्बर 1985 को सफलतापुर्वक लिय गई। उसके बाद पायलट के बिना ' टार्गेट एरकाफ्ट ' की फलतापूर्वक  चाचणी ली गई। 

3 . ''पृथ्वी'' यह जमीन से आकाश में जाकर और जमीन की तरफ आनेवाला मिसाईल था। इस मिसाईल की क्षमता बहुत बड़ी थी। एक हजार किलोग्राम वजन का युद्ध सामुग्री, १५० किलोमिटर अंतर के 50 मीटर के क्षेत्र में युद्ध सामुग्री उतार सकता था। '' पृथ्वी '' मिसाईल दि 25फरवरी 1988 को 11 बजकर 23 मिनिट को आकाश में प्रसारित किया गया।  

4 . '' अग्नि '' यह मिसाईल तंत्र ज्ञान का  मुखुट मणि है। '' अग्नि '' मिसाईल बनाने को पाचसो शास्त्रज्ञं दिन रात काम कररहे थे। आग्नि की प्रथम उडान की दि 20 अप्रैल 1989 को रखी गई। उस मिसाईल के मार्ग पर देखरेख रखने के लिए श्रीहरिकोटा और निकोबार द्वीप पर रडार्स लगए गए थे। उडान में कोई रूकावट आई तो  'होल्ड ' का सन्देश देनेवाले स्वंयचलित यंत्र लगया गया था। इस कारन धोका नही होता उडान पूरी होने में 14 सेकण्ड बाकि थे और '' होल्ड '' का सन्देश सुनाई दिया। सभी यंत्र बंद कर दिए गए। बेटरी की क्षमता कम हुई थी उसे बदलना पड़ा।




'' अग्नि '' यान की पुन्हा सुधारना होने के बाद दि 08 मे 1989 को प्रसारित करने लगे। उडान के 10 सेकण्ड के पहले '' होल्ड '' का सन्देश आया और यंत्र बंद करने पढ़े।अग्नि का उडान दूसरी बार रोकना पढ़ा लेकिन डॉ अब्दुल कलाम कुछ भी नही डगमये और प्रयास करना है जबतक अग्नि की सपलतापूर्वक चाचणी पूरी नहीं होती तबतक प्रयास करते रहना है।

''अग्नि'' मिसाईल की उडान दि 22 मे1989 यह तारीख तीसरी बार ली गई। पूनम की रात थी इस उडान की राह देखने वाले डॉ. अब्दुल कलाम, डॉ अरुणाचलम, जनरल के एन सिंग और रंक्षमंत्री के सी पत इ. ''अग्नी'' मिसाईल दि 08 मे 1989 को समय 07 बजकर 10 मिनट रखा गया। उडान चालू हुई मिसाईल पृथ्वी से उपर उठने लगा होल्ड का सन्देश नही आया और अग्नि मिसाईल की तीसरी बार सफलतापूर्व आकाश में प्रसारित हुवा। डॉ अब्दुल कलाम के साथ सभी उनके साथी खुश हुए। उने पाच साल कड़ी मेहनत करनी पड़ी भीर भी दो बार फेल हुवा और तीसरी बार में उडान सफल हुई। 

डॉ ए पि जे अब्दुल कलाम के जीवन का महत्वपूर्ण दिन था इस सफलतापूर्वक मिसाईल के चाचणी के बारे में पंतप्रधान राजीव गाँधी कहते है, देश की रक्षा करने के लिए अत्याधुनिक तंत्रज्ञान स्वदेश में विकसित करने का संकल्प ''अग्नि '' के सफलतापूर्वक प्रक्षेपन होने के करना पूरा हुवा है। उस समय के राष्ट्राध्यक्ष श्री व्यंकटरमनजी कहते है तुम्हारे श्रम, समर्पित भावना और कौशल्य को मेरा सेल्यूट है।    
ए.पि.जे अब्दुल कलाम वास्तविक में' 'मिसाईल मैन'' बने !      
       

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