विकलांग व्यक्तियों के प्रेरणास्थान (हेलन केलर) / Inspiration of disabled persons (Helen Keller)



Helan kellan


माँ गंगा तेजीसे बहती रहती है, उसकी गति जोरोसे हलचल करती रहती है रास्ते में जब कोई रुकावट आती है तब माँ गंगा उन रूकावटो को मिटाने की कोशिस करती है रुकवाटे एकदम बड़ी हुई तो उनको नजरअंदाज करके नया रास्ता निकालती है लेकिन अपने बहने का धर्म नही छोड़ती। क्योंकि गतिमानता यही उसके जीवन का धर्म है, हम सबका जीवन ऐसाही उत्साहित, गतिवान और निर्मल होना चाहिए इसी शुभकामनाओं के साथ नमस्ते .........



 

छोटे-बड़े मुसीबतों को हम सब मुह तोड़ जवाब देते है विकलांग के जैसी भयंकर मुसीबत आए तो उस से निरास नही होना चाहिए जीवन अच्छे से बिताने में ही पुरुषार्थ है, ख़ुशी है, कितनी भी मुसीबते आए मतलब वो एक संघर्ष है और उस संघर्ष का हमको डटकर सामना करना चाहिए जीवन यह रस से भरा, पूरा और आनंदमय होना चाहिए यैसी धारणा मन में लेकर विक्लांगोंने भी आए हुए संकटो का सामना किया है उनके चरित्र एकदम रोमांचक और उतनेही स्फूर्तिदायक है।

उनमे से एक सुप्रसिध्द उदहारण मतलब ‘हेलन केलर’ का है हेलन केलर मतलब विकलांग व्यक्ति के प्रेरणास्थान है पहले बचपन में ही उसकी आँखे गई इतना ही नही तो श्रवणशक्ती भी नष्ट हो गई लेकिन ऍन सुलिव्हन के सहाय्यता से उसने भाषाये शिक ली जीवन अनमोल है वो अर्थपूर्ण है तब हमको आश्चर्य होता है, बहुत मुसीबतों का सामना करके भी उसका जीवन के प्रति श्रध्दा और खुशी बनी रही इसका मुझे आश्चर्य होता है लेकिन उनके जवाब उसने एकदम साहस से दिए है. “बंद हुए दरवाजे देखने की हमको इतनी आदत हो गई की, दूसरे दरवाजे हमारे लिए खुले है यह हमको समझता ही नहीं उनके शब्दों में बहोत बड़ा अर्थ छुपा है और समाया है हमारे पास क्या नही है ? इस बात को छोडके हमारे पास क्या है इसके तरफ ध्यान देना चाहिए यह सब बाते याद करती है तब उसका कृतज्ञता से मन भर आता है क्योंकि उसके जीवन में आई हुई सुलिव्हन जैसी टीचर है, अनेक देशों के स्नेही-प्रेमी की और से आए हुए भेट स्वरुप वस्तुए और किताबे यैसी अनेक बाते उसके मन में आती है और हम कितने नशीबवाले है यह वो सोचती रह जाती है जीवन की ख़ुशी देखकर उसको अलगसाही पागलपन छाया हुआ था स्पर्श के माध्यम से जीवन में सभी प्रकार की खुशी लेना यह उसकी आदत है ऍन के हात का उसको इतना परिचय हो गया की उसके हात का स्पर्श होते बराबर ही ऍन की मनस्थिति उसको समजती थी।

     
चेहरे के भाव बातें करते हुए नजर आते है, उतनाही उसको ऍन की उंगलिया बातें करते हुए समजती है हातो से प्यार की जो भावना प्रकट होती है यह भावना अंध-बधिर लोगो के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण है जो सुन्दरता सिर्फ आँखों से देखि जाती है उससे अंध व्यक्ति वंचित रहेंगे येसी अपनी समज है लेकिन अन्धो को स्पर्श के माध्यम से वह सुन्दरता का अनुभव करना मुमकिन है यह बात अब कुछ देशो में मानी जाती है एलन इटन इन्होने एक पुस्तक लिखी है उस पुस्तक का नाम है. “Beauty for the sighted and the blind- ( दॄष्टि -अंध व्यक्तियों के लिए सुन्दरता का खजिना ) ऍलन ने अनेक सुन्दर वस्तुवो को जमा करके रखा हुआ है उन वस्तुओ को छू करके वो उनका अनुभव करती है क्योकि कोई भी वास्तुवो की पहचान और योग्यता इनपर उसकी सुन्दरता टिकी हुई रहती है इसलिए एलन का कहना है की, जगह-जगह पर अंध व्यक्तियों के लिए यैसी ही वस्तुसंग्रालय बनाई जाए ।
     
एलन के पुस्तक में हेलन केलर ने प्रस्तावना लिखी है। उस प्रस्तावना में दिए गए विचार बहुत ही अनमोल है , ...... “अपने इन्द्रियों के शक्ती के बारे में गर्व करनेवाले लोगो के आगे जब कोई अंध व्यक्ति सुन्दरता का उपभोग लेने के बारे में बोलता है तब उसको लगता है की, उसको सुन्दरता के दर्शन हुए नहीं और वह व्यक्ति सुन्दरता के बारे बोले यह बात दूसरे व्यक्ति को पागल जैसे बोल रहा है ऐसा लगेगा। लेकिन जिनको मन;चक्षूं के माध्यम से दिखाई देता है उन के ध्यान में आएगा की, आकार , पहचान और योग्यता यह सुन्दरता के घटक है, और वो जान लेना हुशार अंध व्यक्तियों के लिए जरुरी है. स्पर्श यह एक जादु की किल्ली है , उसके माध्यम से अंध:कार मे डूब गए हुए व्यक्तियों को भी अनेक प्रकार की सुन्दरता अनुभव करते आती है उनके हातमे रहने वाली छोटे-मोटे पंक्षियों की हलचल, छोटे पौधों की कवली पत्तिया गर्म और शीतलता इनका संदेश लेके आने वाली हवा, पैर के निचे के रस्ते और यह सभी अनुभवों से मन में अलग-अलग प्रकार की कल्पना एक होकर मिल जाती है और यैसा लगता है की, जैसे कोई उनके आँखों को उजाले के बहुत दिप दिखाई दे रहे थे।

     
अंध व्यक्तियों के जीवन में सांस्कृतिक कार्य करके उनका जीवन कैसे खुश और सुखकारक करते आएगा इन सब बातो का मार्गदर्शन करना यह इटन के पुस्तक का उद्दिष्ट है. अंध को दॄष्टि आँखे नही है फिर भी उनको आंतर दॄष्टि है उनके हातों में बहुत सारा सुन्दरता का भंडार है की, एक जीवन उसको पुरे तरीके से भोग लेना किसी के बस में नही.” हेलन केलर और सुलिव्हन Swimming करते समय स्पर्श के माध्यम से बोलते थे विकलांग ने खुद हसते रहना चाहिए, जिनके घर में विकलांग है उनको भी खुश रहना चाहिए और विकलांगव्यक्तियों को सुखी जीवन जीना आना चाहिये इसलिए सहायता करनि चाहिए घर में अगर कोई अंध व्यक्ति हो तो उनको बहार का दॄश्य समजा के बताना चाहिए और बहरा (Deaf) व्यक्ति हो तो उनके साथ आराम से बोलना चाहिए अगर अंधा और बहरा है तो हाथो के उँगलियों के माध्यम से बातें करना चाहिए बच्चें अपंग है इसकी माँ-बाप को शर्म नही लगनी चाहिए समाज में जैसे हम रहते है ठीक उसी तरह उनके साथ में भी वैसाही बर्ताव करना चाहिए पाठशाला में उनका Admission कर देना चाहिए और माँ-बाप को इनके बारे में मदद और मार्गदर्शन करने के लिए समाज सेवकों ने आगे आना चाहिए।      

विकलांगो की मुसीबते अलग-अलग है फिर भी वो एक बात में समान है और यह बात है, उनका सामान्य स्वभाव इस कारन ही विगलांग व्यक्ति अपने जीवन में सदैव प्रशंनीय बने रहता है यह सामान्य गुणधर्म याने ‘ जीवनोन्मुखता ' जीवन में निर्माण हुए समस्या के कारन निरुत्साही नहीं हुये और तकलीफ दूर करने की कोसिस सभी विकलांगोंने किया है जीवन से दूर न जाते हुए उन्होंने विकलांग के आव्हान को स्वीकार किया है और अपने जीवन को अर्थ प्राप्त करके दिखाया है, इसलिये विकलांगों की मदद करने की जिद और आत्मविश्वास निर्माण करने का काम हेलन केलर के कारन हुआ है हेलन केलर विकलांग है यह सही है लेकिन उन्होंने विकलांगता पर विजय प्राप्त की और विकलांग व्यक्ति के प्रेरणा स्थान बने और आज विकलांग व्यक्ति उनकी प्रेरणा लेकर के जीवन में आगे बढ़ रहा है।

कु. हेलन केलर ने अपने मनसामर्थ्य के आधार पर गत ७० ते ७५ वर्ष शांतता और बहुत ही अंधकार में अपना जीवन व्यथित किया है क्यूंकि उनकी श्रध्दा है की, “भगवान मेरे साथ है, मेरे बंधूओं पर विश्वास है, और यह दुखो के तकलीफे रात के बाद जानेवाले है, और दिन में सुन्दर दुनिया दिखाई देती है, मेरे खुद के विकलांगता पर मै ज्यादा नही सोचती अचानक ही उदास होती हु , गन्दगी, विकलांगता और गुन्हा इन सब चीजो से परेशान हुए बच्चों के लिए मेहनत करने वाले सभी कर्यकर्तावोसे अपेक्षा है की वे विकलांग व्यक्ति को ज्यादा से ज्यादा प्यार देकर उनका जीवन सफल बनाए ऐसी मै अपेक्षा करती हु। आपको पता होगा की बहरे और मुके बच्चो के लिए उनके जरूरतों के नुसार पढ़ाने वाली संस्थाए है. और इन संस्थाओं के माध्यम से बच्चो को आरोग्यशाली बनाना, शिक्षित करके क़ाम करने लायक जीवन बनाना चाहिए भारत में विकलांग व्यक्ति के लिए संस्था के माध्यम से कार्य चालू है , इन अभागे बच्चो के लिए आप बहुत ही प्यार से समजदारी से काम कर रहे है, उनकी जरूरते, उनकी सारी बातो के तरफ आप विशेस ध्यान दे रहे हो. इन बच्चो के पढाई की और पालनपोषण की जबाबदारी आप अधिकारीयों पे आने के कारन और सरकारने उनके पालकतत्व स्वीकारने के कारन बच्चो को शारीरिक गुलामगिरिसे छुटकारा मिलेगा और वे बच्चे स्वावलंबी बनेंगे, वैसेही समाज के लिए प्रेरणा स्थान बनेंगे येसा मुझे विश्वास है यह शब्द डॉ.हेलन केलर के है और संस्था के कार्यकर्ता इस जबाबदारी को पूरा करते रहे।
  
डॉ. हेलन केलर जन्म से ही अंध है उन्होंने एक बार खुद यैसा विचार किया की, मुझे मेरे आँखों से दिखने लगे तो मै क्या देखूंगी उन्होने लिखा है .. ‘मै जिनके दया से जिन्दा हु और मेरा जीवन जीने के लिए आसान हुआ है उनको मै पहली बार देखूंगी जिन किताबो ने जिंदगी का मतलब खुलकर बताया, उन किताबो को देखना मुझे अच्छा लगेगा, रंगों को खुल के दिखने वाला सूर्यास्त दिखना चाहिए इसलिए प्रार्थना करूँगी, दुसरे दिन मानवोंने की हुई प्रगति देखना मुझे अच्छी लगेगी ,स्पर्श से मालूम हुई बाते मै देखुंगी कामो में मग्न हुए आदमी जो व्यवसाय करेंगें उनके बिच मै रहूँगी ,खुद की पहचान अन्दर से मालूम करना चाहिए की, आदमी क्या कर सकता है ,अपने अंदर के आत्मविश्वास को जगाना चाहिए , मै कुछ नहीं कर सकता मुझे कुछ नहीं आता इसकी चिंता करना, यह कमजोरी दूर करने का रास्ता नही है, हर समय खुद की ताकत, आत्मविश्वास के बारे में सोचना और उसका उपयोग करना यह सही रास्ता है।

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