दॄष्टि / vision



visoin


सफलता प्राप्त करना सबकी चाह होती है। दुनिया की इस भीड़ में कई इंसानों ने अपने आपको परिस्थिति के हवाले कर सफलता की चाहत को भी त्याग दिया है। आर.सी.एम रूपी रोशनी ने फिर से हर किसी को इस चाहत को जगाने का भरपूर अवसर दिया है। आज हिन्दुस्थान में यह सफल होने का विशालतम अवसर बन चूका है। अब कोई बहाना नहीं बना सकता की उसके पास पूंजी नहीं है,वह छोटा इंसान है, वह ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं है, वह अनाथ है, वह बेसहारा है वह महिला है,वह पहाड़ों में बसता है,वह बुजुर्ग है ये सब बहाने बेकार हो गए है। क्यों की आर सी एम ने हर तरह के इन्सान को सफल बनाकर  दिखाया है। सफलता का मतलब यहां पेट भरने मात्र

से नहीं है,बल्कि एक सम्मानजनक व सभ्य जीवन जीने की पर्याप्त व्यवस्था से है। आज पुरे विश्वास के साथ यह कहा जा सकता है की आर सी एम में हर कोई सफल हो सकता है और कोई सिमा भी नहीं है की इतनी संख्या तक ही लोग सफल हो सकते है या इतने प्रतिशत लोग सफल हो सकते है। यह सत्य कितना भी आशार्यजनक, कितना ही अविश्वसनीय हो पर यह सत्य, परम् सत्य है,कोई इस सत्य से इंकार नहीं कर सकता,कोई इस सत्य को चुनौती नहीं दे सकता। क्योकि जो भी है सब कुछ सामने है, साक्षात् प्रमाण मौजूद है। जिन्हे दूसरों को खुश और संतुष्ट हो सकते है,जो भारत को पुनः विकसित देखना चाहते है,जिन्हें दूसरों को खुश देखना अच्छा लगता है व जो अपने भीतर एक सकारात्मक सोच रखते है। आप यह पूर्ण विश्वास सहजता से कर सकते है की इस देश का हर व्यक्ति सफल होगा, सिर्फ उनको छोड़कर जो की इस सुनहरे सत्य पर विश्वास नहीं करना चाहते है।    

प्रयास की कमी 

हम इस दिशा में जितनी आवश्यकता है उतने प्रयास ही नहीं करते किसी को भी एक मीटिंग दिखाई या प्लान किखाया , कुछ लोगों के परिणाम दिखाए और उसको यह बिजनस जोईन करने के लिए तैयार क्र लिया। इससे यह कार्य पूर्ण नहीं हो जाता। किसी के जॉइन होने के लिए तैयार हो जाने का मतलब यह नहीं है की उसकी दॄष्टि स्पष्ट हो गई है। हो सकता है वह आपसे पिंड छुड़ाने के लिए तैयार हुआ हो,या उसकी सोच यह बनी हो की बस जॉइन करवाया है। वही सब कुछ करेगा और मझको पैसा आता रहेगा। उसकी कुछ भी दॄष्टि हो सकती है। इसलिय दॄष्टि देने का असली काम जॉइनिंग  होने के बाद ही शुरू होता है और इस दिशा में उन सभी प्रयासों की लगातार आवश्यकता है जो इस लेख में बताया जाएगा 

अधूरी तयारी   

दॄष्टि देना एक आधारभूत कदम है। इसके बाद ही कार्य की सही शुरुआत होती है। लेकिन केवल दुष्टि दे देना ही कार्य का अंत नहीं है उसके पश्चात भी बहुत सारी गतिविधिया करनी है। टूल्स का उपयोग,मीटिंग सूचनाओं का आदान-प्रदान,उत्पादों की जानकारी,व्यवहारिक व ओपचारिक जानकारी व्यवस्थाओं के प्रति जिम्मेदारी लेना,लगातार कार्य करते रहना आदि गतिविधयां लगातार जारी रखनी है। 

सफलता एक सयुक्त कार्यप्रणाली का नतीजा है। इसमें से कुछ भी छोड़ने से सफलता प्राप्त करना संभव नहीं है। किसी को आपने बहुत अच्छी तरह से दॄष्टि देने का कार्य किया। वह भी हर तरह से प्रेरित हो गया लेकिन आपने उससे आगे के कदमों में से किसी कदम पर कार्य नहीं किया तो परिणाम नहीं आयेंगे और परिणाम नहीं आने से वह व्यक्ति पुनः नकारात्मक हो जायेगा, आपकी अब तक उसके प्रति की गई मेहनत भी बेकार हो जाएगी। यह एक पूरा अभियान है जिसमें हर दिशा में एक साथ कार्य करना आवश्यक है। यदि सकारात्मक सोच के साथ सही तरीके से कदम-दर-कदम चलते रहे तो बहुत ही आसान व्यवस्था है। लेकिन हम विपरीत तरिके से कार्य करके इसको पेचीदा बना देते है। जबकि तुलना की जाये तो आर सी एम एक ऐसा तरीका है जो जीवन में अन्य सभी किये जाने वाले कार्यों के मुकाबले हर किसी के लिए संभव है और जो इससे मिल सकता है वह जीवन में बहुत ही मूल्यवान है। मन में निराशा नहीं होनी चाहिए। यदि हमें किसी कार्य को करने से तुच्छ मिलता है उसके लिए सब कुछ करने को तैयार है और जिस कार्य को करने से जीवन में सब कुछ मिल सकता है उसके लिए कार्य करने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है तो हमारे मन की सही दिशा नहीं है। 

संघर्ष की तैयारी नहीं  

इस अभियान के द्वारा जीवन में बहुत कुछ पाने की आकांक्षा आप किसी में पैदा कर दो और उतना संघर्ष के लिए तैयार न कर पाओ तो वह अधूरी दॄष्टि है। वह स्पष्ट झूठ है। बिना संघर्ष किय जीवन में कुछ हासिल नहीं हो सकता। दॄष्टि देनेका मतलब ही यही है की संघर्ष के लिए तैयार करना। संघर्ष के लिए तैयार होना और दृष्टीवान होना दोनों पर्यायवाची शव्द है। संघर्ष मन के विचारों की उपज है। जिस कार्य को करने के लिए मन तैयार नहीं है वह संघर्ष लगता है और जिस कार्य को करने के लिए तैयार है वह सहज लगता है। आर्थिक आजादी के इस अभियान के लिए हर कार्य को करने के लिए मन से तैयार हो जाना ही सही दॄष्टि है। कुछ भी किये बिना पाने की इच्छा कुदृष्टि है।


अति विश्वास 

इस अभियान पर विश्वास होना बहुत आवश्यक है उसके बिना दृष्टी स्थाई नहीं रह सकती। इतना विश्वास भी नहीं होना चाहिए की बस अब तो कुछ करना ही नहीं पड़ेगा,सब कुछ इतना अच्छा है की अब यह स्वयं ही चलता रहेगा। यह अति विश्वास इंसान को सुस्त बना देता है। याद रखें यह एक अनमोल अवसर है जिसे कर्मशील होकर प्राप्त करना होगा। अपने आप कुछ नहीं होने वाला। यदि कोई इस आशा को लेकर बैठ जायेगा तो उसको परिणाम कुछ आएंगे नहीं। ऐसे लोग पुनः अपने आपको और इस अभियान को दोष देने लग जायेंगे की मैंने ऐसे जैसे समझा वैसा यह है नहीं। यह सब झूठ है। उसकी सारि दॄष्टि खंडित हो जाएगी। 

अहंकार 

दॄष्टिवान होने में अहंकार बहुत बड़ी बाधा है। वह किसी भी बात को सुनने में, मानने में,मंथन करने में सब में रोडे अटकाता है। हो सकता है कोई बहुत ज्ञानी है पर ज्ञान का अहंकार होने से बेहतर अज्ञानी होना है। कोई भी यह कहता है की मुझे सब ज्ञान है। यही सबसे बड़ा अज्ञानी है। कोई भी ऐसा नहीं हो सकता जिसे इस रहस्यमहि दुनिया का सम्पूर्ण ज्ञान हो। देखने में आता है की कई अपने आपको बुद्धिजीवी समझने वाले लोग जीवन में जितना अधिक मन के दरवाजे को खुला रखोंगे उतने ही ज्यादा अवसर आपके जीवन में प्रवेश कर्नेगे।

नया तरीका  

आर.सी.एम. बिजनस बिलकुल नया  तरीका है। मल्टीलेवल मार्केटिंग के क्षेत्र में यह सबसे अलग है। इसका उद्देश्य व तरीका बिल्कुल अलग है। इसका उदेश्य इतना महान है की कोई जल्दी से मानने को तैयार नहीं होता। क्योंकि किसी ने जीवन में ऐसी व्यवस्था देखी ही नहीं जो इतने सुन्दर तरिके से जीवन को बेहतर बना सके। इंसान सदियों से जिस व्यवस्था में जीता आ रहा है वह इतनी जटिल और मुश्किल हो चुकी है,स्वार्थ भावना हर इंसान के भीतर कूट-कूट कर भर चुकी है,दूसरों का शोषण करने की वृति इतनी फ़ैल चुकी है की इंसान इस व्यवस्था को स्वीकार कर चूका है। जिसका परिणाम यह है की इंसानी रिश्तों में कटुता बढ़ती जा रही है। किसी को भी आपस में लड़वाना बहुत आसान हो गया है और आज स्थिति ऐसी बन गई है की इंसान को सबसे ज्यादा डर है तो इंसान से ही। दुनिया में समृद्धि कितनी भी बढ़ रही है लेकिन इंसानियत घटती जा रही है। हम यह भी भूल चुके है की जीवन में इंसानियत का कितना मोल है। हमें धन का मोल समझ में आता है लेकिन इंसानियत और धन में से एक को चुनना हो तो धन को ही चुनेंगे। आज हमे यह समझने की बहुत अधिक आवश्यकता है की जीवन में इंसानियत कितनी मूल्यवान है।  धन उसके सामने दो कौड़ी की वस्तु है। यह सत्य है की धन जीवन में कम महत्व की वस्तु नहीं है लेकिन इंसानियत से बढ़कर नहीं। इसीलिए आर.सी.एम में ऐसी व्यवस्था बनाई गई है जो धन भी देती है,लेकिन इंसानी मूल्यों के साथ यह इतनी आसान सी बात है की जल्दी किसी के गले नहीं उतरती। सदियों से जीते आ रहे पुराने तरिके की इतनी आदत हो चुकी है की यह नई बात उसको जल्दी से समझ में नहीं आती। 



कुछ लोग इसके पैसे की बात को समझ लेते है लेकिन इंसानियत को भूल जाते है और वे इंसानियत को किनारे कर काम करने लग जाते है। अपनी पुराणी आदत को इसमें भी काम में लेने लग जाते है। वे स्वयं भी सफल नहीं हो पाते है और दूसरों की सफलता में भी बाधक बनते है। इससे इस अभियान को बहुत क्षति पहुँचती है। जो लोग ऐसी असफलताओं को देखते है वे अपना विश्वास इस अभियान के प्रति नहीं बना पाते। इसलिए जो साथी स्पष्ट दॄष्टि रखते है और इस अभियान को सफल करना चाहते है उनकी जिम्मेदारी बनती है की इस तरह की गतिविधयों पर नियंत्रण करें। 

जब कुछ बदलता है ,जब कुछ नविन सृजन होता है तो दुनिया को स्वीकार करने में थोड़ा वक्त लगता है। इस व्यवस्था को भी स्वीकार करने में थोड़ा वक्त लगेगा। लेकिन संतुष्टि की बात यह है की लोगों ने इस नई व्यवस्था को स्वीकार करना शुरू कर दिया है और बहुत से साथी इस अभियान के प्रति बहुत स्पष्ट दॄष्टि रखते है और यह संख्या बढ़ती जा रही है।  

सब में दॄष्टि का अभाव 

यह एक बहुत बड़ा कारण है की अब तक जो लोग इस अभियान में जुड़ चुके है उनमे स्पष्ट दॄष्टि न होने से नये लोगो में इसका प्रभाव पड़ता है। स्पष्ट दॄष्टि न होने से इस कार्य के प्रति जो लगन,ऊर्जा,धैर्य,जिम्मेदारी व विश्वास चाहिए वह उनमे होता नहीं। जिसकी वजह से वे सफल नहीं हो पाते और असफल लोगों की वजह से अभियान के प्रति गलत धारणा पैदा होती है। अच्छाई के प्रति किसी को बताने व मनवाने में बहुत वक्त लगता है लेकिन बुराई का असर तुरंत होता है। इसलिए बेहतर है की हम कमियों को दूर करने का प्रयास ज्यादा करे। 

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