आर.सी.एम डिस्ट्रीब्यूटर का Behavior कैसा होना चाहिए? / What should the Behavior of RCM Distributor be?


Behavior

लोगों के साथ सम्बन्ध अच्छे रखना जिंदगी को सुखपूर्वक जीने के लिए एक बेहतरीन तरीका है। सम्बन्ध जिंदगी की सबसे बड़ी पूंजी है। अपने से किसी के प्रति गलत न हो इसका ध्यान जब ही रह सकता है जबकि संबंधों की अहमियत पता हो। जिस दिन सम्बन्धो की अहमियत पूर्ण से समझ में आ जाएगी उस दिन अपने से गलत होना तो छूटेगा ही लेकिन दूसरों के द्वारा आपके साथ गलत कर दिए जाने पर भी आप बिना सम्बन्घ ख़राब किए उस मामले को निपटाने की कोशिश करेंगे।


जब हमारा रवैया अच्छा होता है तो संबधों को बनाए रखना भी सहज रूप से संभव हो जाता है इंसान के लिए हर किसी से अच्छे सम्बन्ध बनाये रखना सबसे बड़ी चाहत होनी चाहिए।

आरसीएम में इस बात का सर्वांधिक महत्व है। इस कार्य को मिलजुल कर टीम के माध्यम से ही किया जा सकता है। इसके लिए टीम के साथ सम्बन्ध कभी ख़राब नहीं हो यह निहायत ही जरुरी है। इस बात को बहुत गंभीरतापूर्वक लिया जाना चाहिए। यही सफलता का बहुत बड़ा आधार है। यदि सम्बन्ध ख़राब हो गए, आपस में बातचीत कम या बंद हो गई तो, न तो आपस में मिलजुल कर कोई प्लानिंग हो पायेगी न किसी लक्ष्य पर मिलजुल कर काम हो पाएगा , न एक दूसरे को आगे बढ़ाने की चाहत मन में रहेगी। ये सभी स्थितियाँ बहुत ही ज्यादा नकारात्मक हो जाती है। ऐसी स्थिति में आगे बढ़ना बहुत ही मुश्किल हो जाता है , तनाव भी बढ़ जाता है और निराशा भी छाने लग जाती है। जब सम्बन्ध बहुत ख़राब हो जाते है तो सारी सकारात्मक ऊर्जा नकारात्मकता में परिवर्तित हो जाती है और व्यक्ति की कार्यक्षमता लगभग समाप्त सी हो जाती है। इसकी बहुत बड़ी हानि होती है इसलिए कभी क्षणिक नुकसान भी सहना पड़ जाए, कभी झुकना भी पड़ जाए तो यह सहन करना  ज्यादा उचित है, क्यों की हमें अपने सम्बन्ध टिका के रखना है।



पूरी टीम में कभी भी सम्बन्ध ख़राब होने की जरा सी भी भनक लगे तो तुरंत उस पर ध्यान देना चाहिए। शुरुआत में देख लिया जाए तो मामला ज्यादा बिगड़ता जाता है फिर उसे ठीक करना भी ज्यादा मुशिल हो जाता है।

सबको इस बात पर विशेष ध्यान देना चाहिए की पुराने जितने भी मामले हो उन पर भरपूर प्रसास करके सबके संबंधों को अच्छा बनाया जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति उतपन्न न हो इसका पूरा ध्यान रखा जाए। यदि हम इसे अपनी जिम्मेदारी न मानते हुए नजर अंदाज करेंगे तो भविष्य में हानि हमें ही उठानी पड़ेगी।

संबंधों को बनाकर रखने के लिए सबसे अच्छी निति है कुछ भी अप्रिय बात होने पर अपनी गलती मान लेना। यदि हम अहंकार में पढ़कर अपनी गलती न मानकर सामने वाले पर दोषारोपण करते है, तो सामने वाले का भी अहंकार उसको अपनी गलती नहीं मानने देता है ऐसे से बात बिगड़ती जाती है। इस हिसाब-किताब में जाने में कोई फायदा नहीं है की ज्यादा गलती किसकी है। मेरी कम है सामने वाले की ज्यादा है। ऐसा हिसाब लगाने से झगड़ा बढ़ता है, कम नहीं हो सकता। गलती मानने से इंसान कभी छोटा नहीं होता।



कोई आपके साथ कुछ गलत करना चाहता है तो उससे अपने बचाव का रास्ता निकाल लेना पर उसके साथ आप कुछ और गलत करने का ख्याल न लाना। आपकी तरफ से कुछ गलत न होगा तो हो सकता है उस व्यक्ति को भविष्य में अपनी गलती का एहसास हो जाए। लेकिन अदि दोनों आपस में गलत करने की सोचेंगे तो कुछ बहुत बुरी ही स्थिति पैदा हो सकती है।

आज हमारे समाज में लोग संबंधो की अहमियत को भूलते जा रहे है और परस्पर झगड़ा बड़ी आसानी से कोई भी कर लेता है इसीलिए समाज  धोखाधड़ी, रिश्वत खोरी, शोषण, लड़ाई-झगड़े, मुकदमेबाजी, तोड़-फोड़, हिंसाए आदि जीजें बड़ी मात्रा में फैलती जा रही है। आज हर किसी को डर कर जीना पड़ रहा है। इस सब की वजह यही है की लोग आपसी संबंधों के महत्व भूल चुके है।

आरसीएम ने संबंधों की पूर्ण स्तापना में बहुत बड़ा काम किया है। आरसीएम का प्लान सम्बन्ध बनाने के लिए प्रेरित करता है आरसीएम के किसी की सफलता का आधार ही यही है की वह कितने लोगों से सम्बन्ध बना सकता है।
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