समय / TIME


Time


समय के प्रति जागरूक होकर,समय की कीमत पहचान जाए तो कोई भी इंसान इस दुनिया में छोटा नहीं है। समय से मूल्यवान जीवन में कुछ नहीं होता। जो इसको संभाल लेता है पुरे जीवन को संभल लेता है। इंसान जब समय की कीमत नहीं समझता तो वह मूल्यवान समय को व्यर्थ गवां देता है जिर उसके पास करने के लिए ज्यादा बच जाता है व समय कम और उसके जीवन में चालू होता है तनाव, हड़बड़ी, हार।ये सारि बातें जीवन में छोटी-छोटी आदतों से लेकर,सम्पूर्ण जिंदगी के सुख को प्रभावित करती है। 

  समय से मूल्यवान जीवन में कुछ नहीं होता। जो इसको संभाल लेता है, पुरे जीवन को संभाल लेता है। 
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दूसरों के समय के महत्व को समझें / Understand the importance of others time


अपनी वजह से दूसरों का समय ख़राब न करें। अगर आपने किसको समय दिया होगा की मै आपसे मिलने के लिए आता हु तो उसी समय जाना चाहिए। उनको इंतजार करना पड़ता है तो वह समय उनका व्यर्थ होता है।  जितना इंतजार बढ़ता जायेगा उतना उनके मन में आपके प्रति नाराजगी और आपकी गैर जिम्मेदारी बढ़ती जाएगी। 

सामने वाले की स्थिति समझ कर बात करें। कई लोग बातचीत के दौरान एक ही बात को बार-बार दोहराते रहते है जबकि सामने वाला चाह रहा है की बातचीत ख़त्म हो। इसी तरह मोबाईल की बातचीत को कम से कम शदों में समाप्त करें। 

समय के मामले में किसी को छोटा या बड़ा न समझें। छोटा आदमी समझ कर उसके समय को महत्व न देना यह भी एक भूल ही है। इंसानियत की परीक्षा यही होती है की अपने से छोटे लोगों के समय को भी महत्वपूर्ण समझें। उनकी भावनाओं को भी महत्वपूर्ण समझें। 

मीटिंग लेने वाले साथी मीटिंग समाप्त होने का समय निर्धारित रखें और उस समय मीटिंग समाप्त करें ताकि सब अपनी योजना के अनुसार अपने कार्य कर सकें। 

अपनी टॉम का समय ख़राब करना यानि अपना ही समय ख़राब करना है। यदि आप समय का ध्यान रखते है तो टीम भी वैसा ही सीखेगी जिसका सारा लाभ आप ही को मिलना है।
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हड़बड़ी की स्थिति न आने दे  /  Do not let the situation rush

नासमझ लोग समय के बाद काम करते है, सामन्य लोग समय पर काम करते है और बुद्धिमान लोग समय से पहले काम करते है। इसलिए बुद्धिमान लोग दूसरों के मुकाबले ज्यादा काम करते है फिर भी कभी हड़बड़ी में नहीं रहते और नासमझ लोग काम बहुत कम करते है फिर भी हड़बड़ी में रहते है। जब हड़बड़ी में इंसान रहता है तो बह कुछ भी ठीक नहीं कर पाता है। कुछ भूल जाता है, कुछ गलत हो जाता है, बात -बात में दूसरों पर भड़क जाता है। कभी बहुत बड़ा नुकसान भी हो जाता है। जीवन अव्यवस्थित हो जाता है। 

इससे बेहतर है कुछ समय की गुंजाइश रखते हुए पूर्व समय अपने आप को तैयार रखे। थोड़ा समय से पहले जहाँ  भी पहुंचना है या जो भी करना है करें तो आप बड़े संतुलित रहेंगे। हर काम व्यवस्थित तरिके से कर पाएंगे। 

एक व्यक्ति को नौकरी के लिए इंटरव्यू के लिए जाना था। घर से लगभग 30 मिनट का रास्ता था। 11  बजे का समय था। वह व्यक्ति 10.30 तक कुछ पढ़ता रहा, तैयारी करता रहा। यह सोचकर की 10. 30 बजे निकलूंगा तो सही समय पर पहुंच जाऊंगा। 10. 30 को वह तैयार होने लगा अपनी पत्नी को आवाज लगाई की मेरी नीली शर्ट  निकालकर दो पत्नी ने आकर शर्ट निकाली पहनने लगा तो उसका एक बटन नहीं था। तो वह पत्नी पर चील्लाने लगा की तुम क्या ध्यान रखती हो मुझे इंटरव्यू के लिए जाना है और इस शर्ट का एक बटन ही गायब है जल्दी से बटन लगाओं। पत्नी बटन ढूढने लगी पर बटन नहीं मिल रहा था। वह पत्नी पर और चिल्लाने लगा। पत्नी बोली इसका बटन नहीं मिल रहा है दूसरी शर्ट पहन लो। अब इंटरव्यू का मामला था तो वे अच्छी शर्ट पहन कर जाना चाहता था। जब इंसान हड़बड़ी की स्थिति में आता है तो दिमाग भी अव्यवस्थित हो जाता है। ठीक से सोचने की स्थिति में भी नहीं रहता है वह गुस्से ही गुस्से में दुखी मन से बोला चलो वो सफ़ेद वाली निकाल दो, तो पत्नी बोली वह तो इस्त्री की हुई नहीं है तो वह पत्नी पर और चिल्लाने लगा और बोले मेरा मुँह क्या देख रही हो जल्दी से इस्त्री कर दो उधर माँ उसके चिल्लाने की आवाज सुनकर आई बोली क्या हुवा। तो उसकी पत्नी बोली की इस शर्त का बटन टूट गया है। और दूसरा मिल नहीं रहा है दूसरी शर्ट इस्त्री की हुई नहीं है। माँ ने शर्ट हाथ में ली और शर्ट में निचे अतिरिक्त बटन लगा हुआ था, वह बताया की यह रहा बटन। हड़बड़ी में ऐसी छोटी-छोटी भूलें होना स्वाभाविक सी बात है। 

खैर पत्नी ने बटन लगाया और वह तैयार हुआ, लेकिन इस सारि गड़बड़ी में 10.40 का समय हो गया। वह तनाव में आ गया की मै लेट हो जाऊंगा, वह तेजी से दौड़ा और जल्दी-जल्दी में फाईल गलत उठा ली। अपनी बाइक निकाल कर तेजी से चलने लगा। लोग देख रहे थे, यह कौन गलत तरिके से बाइक चला रहा है। कई लोग तो उसको टोक भी रहे थे। एक-दो बार तो एक्सीडेंट भी होते-होते बचा। रस्ते में ट्रेफिक भी ज्यादा था, जैसे-तैसे करके वह 11.20 पर इंटरव्यू के लिए पहुँचा। उसको जब बुलाया गया और उसने अपनी फाइल दी तो इंटरव्यू लेने वालों ने देखा की वह तो कोई मेडिकल रिपोर्ट की फाइल थी। वे उससे बोले की यह क्या है ? वह फाइल देखकर समझ गया की गलत फाइल आ गई है। वह उनसे बहुत सॉरी बोलने लगा और प्रार्थना करने लगा की मुझे एक मौका और दिया जाए।
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पर हम समझ सकते है की उसके साथ क्या हुआ होगा। वही व्यक्ति 10 बजे पूरा तैयार होकर अपनी फाइल संभाल कर तैयार रहता। 11 बजे पहुँचने के बजाय 10.30 पर वहाँ पहुंचने की तैयारी रखता तो शायद उसका हर काम ठीक हो पाता। काम पहले करने में कोई नुकसान होता ही नहीं है बल्कि फायदे ही फायदे है, बस आदत की बात है। प्लानिंग की बात है, समय को ध्यान में रखते हुए पहले से वैसी प्लानिंग रखनी होती है। सुबह जल्दी उठना है तो रात को जल्दी सोना पड़ेगा। जल्दी सोना है तो जल्दी खाना पड़ेगा। जल्दी खाना है तो शाम का काम जल्दी ख़त्म करना होगा। इसी प्रकार हर काम की प्लानिंग की जा सकती है और बड़े से बड़े काम बिना हड़बड़ी के समय से पहले पुरे किये जा सकते है। 

आखिरी समय पर काम करने की आदत ही परेशानी का कारण बनती है और कई सारि अव्यवस्थाओं और असफलताओं को जन्म देती है। आर.सी.एम में भी जो लोग अंतिम तारीख को खरीदी करने या जॉइनिंग फीड करने की आदत में रहते है उनको हर तरह से परेशानी झेलनी पड़ती है, जा पसंद का सामान मिलता है, कभी खरीदी कम पड़ जाती है, कभी कम्प्यूटर की स्पीड नहीं मिल पाति है। जॉइनिंग में हड़बड़ी में गलत स्पॉन्सरिंग हो जाती है। सूचनाएँ अधूरी या गलत कल दी जाती है। फिर बहुत सारा समय व ऊर्जा उनको ठीक कराने में व्यर्थ जाते है। कई बार उनको नुकसान भी उठाना पड़ जाता है। 



काम करने का उचित समय चुने / Choose the right time to work


ज्यादा से ज्यादा परिणाम लेने व हर काम को श्रेष्ठ तरिके से करने के लिए यह आवश्यक है की किसी काम को करने के लिए कौन-सा समय सर्वाधिक उपयुक्त है, इसको निर्धारित करें। किसी तरह की प्लानिंग करना, कुछ विश्लेषण करना, कुछ अध्ययन करना, कुछ लिखना, इस तरह के काम जब मन को एकाग्र होने की आवश्यकता होती है उसके लिए निश्चित रूप से उपयुक्त समय का चुनाव करना होगा जो की सुबह का या रात्रि का हो सकता है। दिन के कार्य के समय में इन कामों को करने का प्रयास करेंगे तो उतने बेहतर तरिके से ये काम नहीं हो पाएंगे। इसके आलावा सुबह या रात्रि का समय जो व्यक्ति के स्वंय के लिए होता है, उसे हम टी.व्ही देखने, अख़बार पढ़ने या सोने आदि कामों में व्यर्थ करेंगे और दिन में जब बहुत सारे बहार के काम कर सकते थे, उन कामों का भी नुकसान करेंगे। 

किसी से व्यक्तिगत मिलना हो तो ऐसा समय निर्धारित करें जो सामने वाले के लिए भी उपयुक्त हो व स्वंय के लिए भी उपयुक्त हो, फोन करना हो तो ऐसा समय चुने जब अन्य आवश्यक कार्यों के आलावा फुरसत का समय हो, सफर के समय का भी सदुपयोग किया जा सकता है यदि स्वंय वाहन नहीं चला रहे हो तो, इसी प्रकार हर कार्य के लिए उचित समय का चुनाव कर लिया जाता है,तो कार्य करने की क्षमता काफी बढ़ जाती है।दिन भर के कार्यों की सुनिचित रुपरेखा बनाकर रखनी चाहिए व सरे कार्य पूर्व नियोजित कर लिए जाने चाहिए। कई बार अनावश्यक बातचीत या गप-शप में वह समय भी खर्च कर दिया जाता है, जबकि कुछ आवश्यक काम करना था और वह कार्य छूट ही जाता है। कई बार पहले काम में ही इतनी देरी कर दी जाती है की आगे का कुछ न कुछ काम छूट जाता है। 

खुद के समय की कीमत खुद को ही समझनी चाहिए। हर समय का सही तरिके से सदुपयोग किया जाए तो एक संतुलित तरिके से, सुखनपूर्वक अपनी कार्य क्षमता को बहुत बढ़ाया जा सकता है।     
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