खाशाबा जाधव ( मल्ल ) जीवन दर्शन / Khashaba Jadhav (wrestling) life philosophy


Khashaba Jadhav (wrestling) life hilosophy

खाशाबा जाधव का परिचय / Introduction to Khashaba Jadhav


नाम :- खाशाबा जाधव

जन्म दिनांक :- 15 जनवरी 1925

जन्म स्थल :- गोळेश्वर (जिल्हा-सातारा )  (महाराष्ट्र)

पिताजी का नाम :- दादासाहेब

माताजी का नाम :- पुतळाबाई

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खाशाबा जाधव का पारिवारिक जीवन / Family life Khashaba Jadhav

खाशाबा का जन्म गोलेश्वर जिल्हा-सातारा ( महारष्ट्र )का रहनेवाला है उसका जन्म 15 जनवरी 1925 को गोलेश्वर में हुवा है। उसके पिताजी को सभी लोग दादासाहेब बोलते थे। खाशाबा के पिताजी किसान थे। उसका पिताजी किसानी करता था। उसका पिताजी पहलवान था कुस्ती खेलता था। खाशाबा को कुस्ती कैसी खेलनी चाहिए इसका प्रशिक्षण खाशाबा को मिलता था। 

खाशाबा की प्राथमिक पढ़ाई गांव के स्कुल में हुई। खाशाबा हुशार था पहली से प्रथम क्रमांक से पास होता था। पढ़ाई करके पद्विधर बनना चाहते थे। सन 1940  खाशाबा की प्राथमिक पढ़ाई पूरी हुई। आगे की पढ़ाई के लिए 
कराड के टिळक हाईस्कूल में नाम भर्ती किया गया। 

खाशाबा एसएससी की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास हुआ  कोल्हापुर के राजाराम महाविद्यालय कला शाखा में प्रवेश लिया कुस्ती के प्रतियोगिता के कारण हर दिन स्कुल जाना नहीं होता था। सन 1953 में पदवी परीक्षा पास किया। 

कुस्ती प्रशिक्षण और करियर / Wrestling training and career


खाशाबा के घर का वातावरण कुस्तिमय था। इसलिए प्राथमिक की पढ़ाई करते समय खाशाबा व्यायाम के लिए आखाड़ा में जाता था। उसके बाद स्कुल जाता था। स्कुल छूटने के बाद शाम में चावड़ी के पास मैदान पर  कबड्डी, लंगड़ी, दौड़ आदि खेल खेलता था।



खाशाबा की आर्थिक स्थिति नाजुक थी खाशाबा आखाड़ा खेलने जाता था। और कुस्ती का प्रशिक्षण देता था। पहलवान को जो खाना चाहिए वे नहीं खा सकता था। क्यों की आर्थिक परिस्थिति अच्छी नहीं थी। खाशाबा चटनी और भाकर खाके व्यायाम करता था। खाशाबा भाग लेता था और जीतता था।

सन 1934 में गोळेश्वर गांव के पास कुस्ती की प्रतियोगिता थी प्रतियोगिता में खाशाबा ने भाग लिया था, उस समय उसकी उम्र 8 साल की थी। कुस्ती में खाशाबा ने अपने प्रतियोगी को 2 मिनिट में चित कर दिया। खाशाबा विजयी हुआ और उसे बादाम और सक्कर इनाम मिला था।

खाशाबा की  माध्यमिक पढ़ाई कराड में चालू थी उसका स्कुल गांव से 5 किलो मीटर दूर था सभी लड़के स्कुल में पैदल ही जाते थे लेकिन खाशाबा स्कुल में दौड़ते-दौड़ते जाता था और वापस दौड़ते-दौड़ते आता था इस तरह से उसकी रनिंग होती थी।

खाशाबा को कुस्ती का प्रशिक्षण टिळक हाईस्कूल के क्रीड़ा टीचर गुडोपंत बेलापुर और बाबूराव बलवंडे इन्होंने दिए। हनुमान क्रीड़ा मंडल की तरफ से प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। वहा पर 9 क्रीड़ा प्रतियोगिता में भाग लिया था और सभी क्रीड़ा प्रतियोगिता में First क्रमांक मिला।

SSC की परीक्षा पास होने के बाद कोल्हापुर में राजाराम महाविद्याल में नाम दाखल किया वहा पर मोतीबाग व्यायाम स्कुल में कुस्ती का प्रशिक्षण, दंड बैठक का अभ्यास करता था।

खाशाबा ने 165 फुट दुरी पर हतोड़ा फेक के 25 साल पुराण रिकॉर्ड तोड़ दिया।


स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी / Participation in freedom fight

सन 1942 में स्वतंत्र्यता आंदोलन चालू हुआ। क्रांतिकारों को इंग्रज सरकार जेल में डाल रही थी और कराड के क्रांतिकारी भूमिगत हुए थे। भूमिगत को खाशाबा रहने के लिए जगह देता था। उस समय खाशाबा माध्यमिक में पढ़ रहा था। क्रांतिकारों के साथ काम करता है इसका पता कराड के फौजदार को चला और खाशाबा उसके दोस्त को क्रांतिकारी की जानकारी पूछे लेकिन किसीने कुछ नहीं बताया। 

अखिल भारतीय प्रतियोगिता /  All india competition

खाशाबा को पुरंदरे गुरु मिले और राष्ट्रीय लेवल का कुस्ती खिलाडी बना। खाशाबा का नंबर 1948 में लंदन ओलिंपिक के लिए लगा।11 दिसंबर 1949 नागपुर के कुस्ती प्रतियोगिता में पांच मिनिट में चित किया और विजय हासिल किया। 1950 से 51 दो साल में खाशाबा ने Gold Medal हासिल किया। 

1948 लंदन ऑलिम्पिक / 1948 London Olympics    

सन 1948 के लंदन Olympic में फ्लाईवेट(52 किलो ) गट फ्रीस्टाइल कुस्ती के लिए नंबर लगा और इंग्रज प्रशिक्षक रिस गार्डनर ने कुस्ती के लिए मार्गदर्शन किया। लंदन एक्सप्रेस हॉल में 30 जुलाई 1948 में कुस्ती की सुरुवात खाशाबा से हुई। ऑस्ट्रेलिया का बी.हेम्स के साथ खाशाबा की कुस्ती लगी खाशाबा ने उसे 16 से 22 बार चित किया लेकिन भुजा को हाथ से चिपका के रखने का नियम पता नहीं था। पीठ को 2 मिनिट जमीन को चिपकाके रखना पड़ता है। इस तरह से प्रथम फेरी पूरी हुई। 

दूसरी फेरी में खाशाबा ने अमेरिकन मल्ल डार्निग को मुल्तानी डाव मारके 14 मिनट में जमीन पर चित किया। 
और खाशाबा विजयी हुआ। 

तीसरी फेरी में ईरान का बलशाली मल्ल रेस्सी के साथ कुस्ती हुई। रोलिंग फॉल्ट के कारन खाशाबा आखाड़ा के रिंग के बहार गया। लेकिन कुस्ती लगाने का नियम है लेकिन खाशाबा हारा करके पांचोने जाहिर किया। पंचो के गलत निर्णय से खाशाबा को प्रतियोगिता के बाहर जाना पड़ा। 
1952 हेलसिंकी ऑलिम्पिक / 1952 Helsinki Olympics

11 जुलाई 1952 को रात में भारतीय संघ के साथ हेलसिंगी शहर में आगमन हुआ। 20 जुलाई 1952 को खाशाबा की कैनेडा के मल्ल पॉली क्वीन के विरुद्ध पहली लढत हुई खाशाबा विजयी हुआ। 

दुसरी फेरी मेक्सिको का मल्ल वसुतिला के साथ हुई उसे चित किया और विजयी घोषित हुआ।

तिसरी फेरी 21 जुलाई 1952 को शाम में हुई और इस फेरी में खाशाबा विजयी हुआ।

चौथी फेरी 22 जुलाई 1952 को जर्मनी के स्मिटझ को हराया।

इस तरह से खाशाबा Quarter finals में पहुँचा और कांस्य पदक हासिल किया।

खाशाबा को पोलिस दल में नौकरी / Khashaba police force

खाशाबा 04 जुलाई 1955 को सब इन्स्पेक्टर के पद पर मुंबई में जव ज्योइनिग किया  पोलिश प्रशिक्षण लेते समय खाशाबा का दूसरा क्रमांक आया। 

खाशाबा ने पोलिस दल में 28 साल तक सेवा दी। 

सन 1983 को खाशाबा सेवानवृत्त हुए है। 

14 अगस्त 1984 में खाशाबा का मृत्यु हुआ।
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