RCM डिस्ट्रीब्यूटर का कार्य करने का तरीका / RCM Distributor's Way of Working

RCM Distributor's Way of working

हम सभी सफल होना चाहते है इसके लिए कुछ बहुत महत्वपूर्ण नियमों को हम समझ ले और अपना ले तो सफलता को सुनिश्चित किया जा सकता है। जहा बात हम आरसीएम की करते है तो सफलता हासिल करना और भी सहज हो जाता है क्योकि इसमें सफलता प्राप्त करने के अधिकार को सार्वजनिक कर दिया गया है। आम से आम इंसान भी बड़ी सफलता को हासिल करने के हजारों उदाहरण है मौजूद है। यह बहुत बड़ा सत्य हमारे सामने है जिससे कोई भी इंकार नहीं कर सकता है। 

क्या आप जानना चाहते है की आरसीएम में सफलता प्राप्त करने का सुनिश्चित मार्ग क्या है तो कुछ बातों को आज गाठ बांध लीजिए। इस लेख में जो भी बाटे बताई गई है वे सभी  द्वारा अपनाये गए तरीकों के आधार पर ली गई है।  ये बातें पूर्णतया प्रमाणितक है व सफलता हासिल करने के लिए अचूक मन्त्र के रूप में कार्य करती है।   

कामों को कैसे नोट करे 

RCM के डिस्ट्रीब्यूटर को बचे हुए कार्य को नोट करना चाहिए। की बार बहुत महत्वपूर्ण कार्य भी यद् नहीं रहने पर छूट जाता है जिसका नुकसान बहुत बड़ा हो जाता है।  कई बार कामों की संख्या एक साथ ज्यादा होती है जिनको उसी समय ख़त्म नहीं किया जा सकता है उस समय उनको नोट कर लिया जाय तो बाद में भी कामों को व्यवस्थित ट्रिक से पूरा किया जा सकता है, चाहे बहुत ज्यादा काम हो तब भी। नोट किये गए कामों में से काम का महत्व देखते हुए प्राथमिकता प्रदान की जा सकती है।

 कामों की सूचि को प्रतिदिन जाँच करते रहें व उनमें से बहुत सरे काम सम्पन्न होने के बाद बचे हुए कामों को नई जगह नोट कर ले व पुराणी सूचि को हटा दें ताकि आपकी सूचि हमेशा छोटी रहे और देखना आसान हो। नोट करने में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए व यह तो यद् रह जाएगा इसे नोट करने की जरुरत नहीं है, इस तरह नहीं सोचकर हर काम जैसे ही याद आता है या सामने आता है तुरंत नोट कर ले इसके लिए पेन हमेशा साथ में रखे। यह तरीका इंसान को तनाव से बचता है, कार्य क्षमता को बढ़ता है, समय को प्रबंधित करने में मदद करता है और बड़ी सफलता का कारन बनता है।

डायरी कैसे बनाएं  

डायरी बनाना अपने आप में एक बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य है। डायरी में लिखने का महत्त्व  नहीं है।  डायरी में लिखा हुआ आपके लिए उचित काम आये व आपकी कार्यप्रणाली को सुव्यवस्थित करे यह बहुत महत्वपूर्ण है।

डायरी को इतना भर लेना की बाद में उसमे से एक काम की चीज छाटना ही मुश्किल हो जाये या उसको देखने के लिए इतना समय लगता हो की उतना समय निकलना संभव नहीं हो पाए या उसमें जो महत्वपूर्ण कार्य लिखे हुए हो वे सभी समयः पर देखने से छूट जाए तो डायरी आपकी कोई मदद नहीं कर पायेगी। अपनी डायरी को अपना मैनेजर मानें, आपका मैनेजर जितना व्यवस्थित होगा उतना ही आप व्यवस्थित काम कर पाएंगे।


हो सके तो आप अपनी डायरी में पेन्सिल का इस्तेमाल करें, इससे आप अनावश्यक बातों को उसमें से हटा पाएंगे व आवश्यकतानुसार लिखी हुई चीजों को इधर-उधर स्थानांतरित कर व्यवस्थित कर पाएंगे।

समय-समय पर डायरी को पूरा देखते रहे और उसे अपने तरिके से व्यवस्थित करते रहे। हर व्यक्ति के लिए दात्री बनाने का तरीका एक नहीं हो सकता , लेकिन यह सभी को ध्यान रखना चाहिए और ऐसा तरीका इस्तेमाल करें की हमारा हर कार्य समय पर होता रहे। डायरी की वजह से हम हमारे समय का सदुपयोग कर सके। हम आवश्यक बातों को कभी भूले नहीं। हम कार्य इस तरिके से कर पाए की हमारे कार्य का परिणाम अच्छे से अच्छा आए। हमारे जोवन में कभी हड़बड़ी व तनाव नहीं आए।

कार्य को समय पर करे  


बहुत से ऐसे कार्य होते है जिन्हें सही वक्त पर कर लिया जाए तो बहुत छोटे-छोटे से होते है।  वे ही कार्य समय निकलने के बाद बहुत बड़े बन जाते है व अनेक परेशानियों के कारण बन जाते  है उदाहरण के लिए किसी डिस्ट्रीब्यूटर की जोइनिंग के समय स्पॉन्सरिंग को ठीक से जांच लिया जाए, उसके आवेदन को फीड करते समय हर चीज को ठीक से जांच लिया जाए। उसी समय सही बैंक खाता संख्या, सही मोबाइल नंबर, सही जन्म दिनांक नॉमिनी आदि सभी को सही से लिखा जाये। पासवर्ड उस नए डिस्ट्रीब्यूटर को देकर उसके उपयोग के बारे में उसका महत्व पूरी तरह समझा दे व उसे गुप्त तरिके से कहि नोट करने के लिए कह दे तो ें सभी विषयों को लेकर भविष्य में आपको कुछ देखना नहीं पड़ेगा। लेकिन इनमे से कहि जरा भी चूक की तो भी छोटा सा काम बहुत बड़ा काम बन जायेगा, बहुत साडी प्रेसनही बाद जाएगी। यह तक की समय पर समाधान न होने पर वह डिस्ट्रीब्यूटर नकारात्मक भी हो सकता है। मान लीजिये की बैंक खता संख्या फीड करते समय बैंक का कोड गलत डाल दिया या संख्या में एक अंक की चूक हो गई, फीड करते समय ठीक से ध्यान दिया होता तो हो सकता है कुछ सेकण्ड ज्यादा लगते, लेकिन उस समय प्र ध्यान नहीं दिया और वह गलत हो गया। अब उस डिस्ट्रीब्यूटर का फंड ट्रांसफर नहीं हो पायेगा। वह थोड़े दिन इंतजार करेगा, फिर नकारात्मक होना शुरू हो जायेगा की पैसा तो आ नहीं रहा है, अब कई साडी बातें हो सकती है। हो सकता है वह अपने मन में अविश्वास पैदा करके चुपचाप बैठे जाये काम करना बंद कर दे। हो सकता है वह आप से अपनी समस्या बताये और आप के मन में भी थोड़ा असंतोष पैदा हो की पैसा क्यों नहीं आ रहा है, आप कम्पनी में पता करने की कोशिश करेंगे।  उसे थी करवाने का प्रयास करेंगे समय पर काम नहीं हो पाया तो फिर वह डिस्ट्रीब्यूटर आपके प्रति भी नाराज होगा की मेरा अपलाइन ठीक नहीं है। कुल मिलाकर यह समझा जा सकता है, जो काम छोटा-सा था वह कितना बड़ा बन गया है व कितनी परेशानियों को जन्म दे दिया है। किसी भी नए डिस्ट्रब्यूटर को स्पांसरिंग करने का तरीका, टूल्स का महत्व, अन्य जानकारिया प्रारंभ में दे दें तो कम मेहनत में बड़े परिणाम आ सकते है और ये सब जानकारिया नहीं दे तो बाद में बहुत मेहनत करने पर भी उतने परिणाम नहीं आ सकते है। 

कुछ उदाहरण है लेकिन इस तरह के अनेक कार्य होते है जो सही समय पर ठीक से कर लिए जय तो बहुत छोटे होते है पर बाद में वे बहुत बड़े बन जाते है। इसलिए हर कार्य को प्रारंभिक स्तर पर ही ठीक तरिके से करने का हर संभव प्रयास करें। यह नहीं सोचें की अभी तो कैसे भी कर लेते है बाद में होगा जो देखा जायेगा। 


कार्य के साथ समझौता न करे  

हर कार्य को श्रेष्ठतम तरिके से करने की आदत बनाये। कैसे वः और अच्छा हो सकता है निरंतर इस पर काम करते रहे। अपने तरिके पर जल्दी से संतुष्ट होना चाहिए संतुष्ट होने से आगे की खोज समाप्त हो जाती है। दूसरे कुछ लोग आपसे भी और कमजोर तरिके से करते है, यह जानकर अपने आप में संतुष्ट नहीं हो जाना है। यदि आपको दूसरों को देखना ही है तो उन लोगों को देखो जो आपसे श्रेष्ठ तरिके से करते है। आप सीखना जारी रखो और उनसे भी बेहतर तरिके से करने का लक्ष्य रखो। यही से आपके भीतर की प्रतिभा को उजागर होने का मौका मिलेगा और जब आप अपने काम के तरिके को बेहतर करने में कामयाब हो जाओंगे तो आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और आप हर क्षेत्र में अपनी श्रेस्थता  हासिल करने में कामयाब होते जाओंगे।

यह आदत सफल लोगों की खास आदत होती है। वे प्रतिदिन अपनी प्रतिभा को निखारते रहते है। वे यह कभी नहीं कहते है की मै श्रेष्ठ बन चूका है, वे हमेशा यही कहते है की मुझे और श्रेष्ठ करना है।  जो लोग किसी काम को कमजोर रूप में करके भी यह मानते रहे है की मै अच्छा कर सकता हु। वे अपने जीवन में कभी उन्नति नहीं कर सकते है। यहाँ जो काम का जिक्र किया जा  रहा है वह कारोबारी हो या पारिवारिक चाहे वह आर्थिक प्रतिफल देने वाला हो या नहीं चाहे वह शौकिया हो या जिम्मेदारीवाला कार्य।सवाल काम का नहीं है। सवाल प्रतिभा को निखारने का है संतुष्टि प्रतिभा के विकास में बाधक बन जाती है और बेहतर करने की चाहत से प्रतिभा निखरती जाती है।

उदाहरण के लिए आप शौकिया तौर पर कुछ लिखते है कुछ लेख या कुछ कविता लिखने के बाद दूसरे अच्छे से अच्छे लेख या कविता से उसकी तुलना करो और आपको लगता है की उतना अच्छा नहीं है तो उसको और अच्छा बनाने का प्रयास करो। कोशिश करते रहो। कोशिश करेंगे तो भले ही थोड़ा समय लगेगा।  दिमाग को काफी काम में लेना पड़ेगा लेकिन आप श्रेष्ठता की और बढ़ते जायेंगे और आपकी प्रतिभा इस दिशा में बढ़ती जाएगी।

ऐसा ही हर काम के लिए करना है। आप आरसीएम का प्लान दिखाते हो उसमें भी अपने आप को श्रेष्ट बनाने के लिए लगातार प्रयास करते रहो तो आपकी कुशलता बढ़ती जाएगी।  एक दिन आप इतने कुशल हो जायेंगे की 100 प्रतिशत परिणाम आने लग जायेंगे लेकिन तब भी रुकना नहीं है। इतना जब कर पाए है तो और प्रयास करेंगे तो श्रेष्ठता भी बढ़ती जाएगी और आपका आत्म विश्वास भी। यही निति जीवन में हर कार्य के लिए रखें।  सेमिनार लेना हो, पिकअप सेंटर चलाना हो, सेमिनार अटेंड करना हो किसी से कोई बात करनी हो, डायरी मेंटेन करनी हो, प्रॉडक्ट की तारीफ करना हो, होम मीटिंग लेनी हो, कुछ पढ़ना हो हर काम को श्रेष्ठ तरिके से करने की आदत जिंदगी को ऊचाई पर ले जाती है।


अपने आपको पूर्ण बनाये 

बहुत से ऐसे छोटे-छोटे कदम होते है जो दिखने में बहुत छोटे होते है पर वे बड़े महत्वपूर्ण होते है। ऐसे छोटे-छोटे सभी कार्यो को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाये। एक आरसीएम डिस्ट्रीब्यूटर के लिए जो सामान्य कार्य है वे अवश्य पूर्ण करें जैसे-आरसीएम टाइम्स पढ़ना, आरसीएम की किताबे पढ़ना, सीडी सुनना प्रतिमाह जॉइनिंग करवाना, प्रतिमाह ज्वॉयनिंग,खरीदी सेमिनार अटेंड, अकेडमी कोर्स करना क्वालिटी टीम का निर्माण करना और बुक को भरना आदि कामो में अपने आपको पूर्ण रखें और आगे बढे। 

मंच का डर निकाले 

मंच पर जाने से डर लगता है तो इसका एक ही रास्ता है, आप इसकी शुरुवात करें चाहे थोड़ी ही पर शुरुवात जरूर करे। न्य व्यक्ति जो भी बोलता है आरसीएम डिस्ट्रीब्यूटर उसे पसंद करते है। इसलिए शुरुआत जरूर करें जब भी मौका मिलता है उसे छोड़े नहीं और ज्यादा से ज्यादा मौका तलाशने की कोशिश करे क्योकि बड़ी सफलता के लिए मंच पर आना जरूरी होता है। 

कोइ भी व्यक्ति मंच पर बोलना इसी तरह सीखता है, इसलिए घबराने की कोई बात नहीं है व दूसरों जैसा आप नहीं बोल पाएंगे, यह भी सोचने की जरूरत नहीं है। इसमें सिर्फ एक ही बात निशय करनी है की बस शुरआत करनी है इसके बारे में और जानकारी लेना, कोइ किताब पढ़ना आदि बातों से ज्यादा जरुरी है जो भी जैसे भी आता है उससे शुरुआत करना यह ज्ञान  की बात उतनी नहीं है जितनी की निडरता की है एक बार मंच का भय निकलना जरूरी है उसके बाद आपके विचार मंच पर जाकर भी कार्य करने लग जाएंगे। यह कभी भी मत सोचना की जिस दिन कुशल हो जाऊँगा उस दिन शुरआत करूँगा यह भी मत सोचना ज्यादा लम्बा बोलना है,बस बार-बार बोलना है, यह तयारी करनी है क्या बोलना है ? इसकी थोड़ी तयारी करेंगे तो और भी अच्छा ही होगा। 

वरिष्ठ साथी जब मीटिंग,सेमिनार अादि लेते है उसमें अन्य डिस्ट्रीब्यूटर को भी मंच पर बोलने का अधिक मौका दे ताकि वे भी धरे-धीरे मंच पर बोलना सिख सकें। आप अकेले कितना भी अच्छा बोल ले इससे आप बहुत बड़े समूह को नहीं संभल सकते है। वह जब ही संभव है जबकि आपके समूह के बहुत सरे डिस्ट्रीब्यूटर भी मंच पर बोलने में कुशल हो इसलिए इस उदेश को हमेशा ध्यान में रखें व इस पर ज्यादा से ज्यादा कार्य करें। 

पहले दिन से ही किसी से यह उम्मीद न रखें की वह अच्छा बोलेगा। उसे उत्साहित करें उसकी तारीफ करें ताकि उसका मंच का डर निकल जाये।   
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