सच्चा प्यार / True Love

True Love

मै बहुत टेंशन में था। क्यों की मेरी एग्जाम हुई थी। और दूसरे दिन  मेरी इंटरव्हुव थी।आज कुछ भी हो,लेकिन मै उसेके मन में क्या है यह जानने के लिए गंभीर हो गया। दूसरे दिन मै  इंटरव्हुव के लिए गया।अंकिता भी अपने फ्रेंड्स के साथ आयी थी।मुझे देखकर उनके फ्रेंड बेस्ट ऑफ लक  बोलकर चले गये।मै मुस्कराता हुआ हाथ हिलाया। मै रिजल्ट देखने के लिए नोटिस बोर्ड की ओर बड़ा काफी स्टूडेंट की भीड़ लगी थी। कुछ लड़किया ख़ुशी से शोर करते हुए मेरी तरफ आ रहे थे।सभी ने मुझे घेर कर गले मिलने लगे कहने लगे की '' तुम फर्स्ट आये हो '' मेरे दोस्तों ने भी मुझे उठाकर माहौल को खुशनुमा बना दिया था।लेकिन मेरा मन उस माहौल में नहीं था। क्यों की मुझे उसे अपने प्यार के बारे मे फाइनल पूछना था।


अंकिता को पिछले वर्ष ही पता चला था की मै उसे बहुत पसंद करता हु। अंकिता ने अपने सहेली से पूछा की , '' मै ज्यादा ही स्मार्ट बनने की कोशिस करती हु क्या '' ? लेकिन सुरेश क्यों बोलता है की, '' मै तुम्हे पसंद करता हु। '' उसके जिंदगी में कोई लड़का नहीं था और अंकिता बहुत अच्छी सरल स्वभाव की लड़की थी। कॉलेज में फर्स्ट नंबर से आती थी। कॉलेज में अंकिता आदर्श लड़की के नाम से जानी जाती थी। अंकिता को कुछ दिनों के बाद जॉब मिलनेवाली थी। अपनी जिंदगी सेटल होते तक अंकिता को किसी के भी प्यार में नहीं पड़ना था।

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अंकिता चोरी-छुपके से मुझे देखती थी। क्लास में मै क्या हु,  इसका पता अंकिता को पता चल ही गया था। आमने-सामने बहुत की कम बातें होती थी। अंकिता मुझ को पसंद करती थी लेकिन उसने अपने प्यार का इजहार किसी के सामने नहीं किया था। लेकिन अंकिता चोरी- छुपके से मुझे ही देखती थी शायद अंकिता को मुझसे प्यार होने लगा था।

मै होस्टल में ही रहता था अंकिता भी होस्टल में ही रहती थी स्कुल को छुट्टी होने के बाद अंकिता अपने रूम के तरफ जा रही थी मैंने अंकिता को आवाज दिया अंकिता ने पलटकर देखि और मेरे तरफ आने लगी मै अंकिता  से क्या बोलू मुझे कुछ भी समज में नहीं आता था। दूसरे दिन हॉलिडे था। अंकिता को लंच का ऑफर देकर उसे मनवा लिया।

मैं उसे हॉटेल में लेके गया लेकिन अंकिता हॉटेल में आने के लिए आगे पीछे  देख रही थी लेकिन मेरे खातिर हॉटेल में लंच करने के लिए आई और आर्डर के लिए मेनू कार्ड उनकी ओर बढ़ाया।लेकिन उन्होंने मेरे पसंद के बारेमे पूछा। अभीतक मेरे पसंद नापसंद के बारे में मेरे मम्मी के अलावा किसीने नहीं पूछा था। हम दोनों ने लंच किया लंच होने के बाद हम दोनों आइसक्रीम के लिए बहार एक कैफ़े में बैठे। आपस में बाते करने लगे। अंकिता पहली बार मेरे सामने खुल के सामने आयी थी। जितनी बाते आज बोली मै सुनता ही रह गया।3 घंटे कैसे बीत गए पता नहीं चला। हम बाहर निकले वैसे ही मैंने पूछा अंकिता तेरे लिए सरप्राईच है, जल्दी बताओ क्या है तो अंकिता बहुत ही उतावली हो गई। मै ने अंकिता से कहा, '' मुझे gov job मिली है '' अंकिता यह सुनकर बहुत ही खुश हुई।



प्रपोज डे का दिन था मै ने अंकिता को प्रपोज किया। अंकिता बहुत ही घबरा गई अंकिता इधर-उधर देखने लगी अच्छा हुआ की आजु-बाजु में कोई नहीं थे। अंकिता बहुत ही शर्मीली लड़की थी। मै इतने दिनों से राह देख रहा था की मुझे Gov job लगे और आज मुझे job लगी। अंकिता मेरे से शादी करोंगी क्या ? यह सुनकर अंकिता अचम्भित ही रहगई। अंकिता इतनी क्यों डरती है हम दोनों क्या भाग के शादी करनेवाले है क्या ? मुझे पता है तू मेरे से ही प्यार करती है। मेरा शादी करने का विचार अंतिम है तुझे क्या बोलना है यह मुझे दो दिन में बता देना। मै कल घर जा रहा हु मेरे घर के बहुत खुश है मुझे Gov job लगी तो  मै मंगल को आता हु बाद में बातें करते है।

अंकिता ने मुंडी हिलाई मै उसका हाथ अपने हाथ में पकड़ने की कोशिस कर रहा था। लेकिन अंकिता ने कुछ रिस्पॉन्स नहीं दिया। मैंने उसे उसके होस्टल पर छोड़ दिया और मै अपने रूम के तरफ जाने लगा।

 हम दोनों को यह दो दिन बहुत कठिन गए अंकिता मेस में भी नहीं जा रही थी और नहीं कई घूमने जाती थी।   कितनी तो भी बार मुझे अंकिता ने क्लास में ढूढ़ने की कोशिस की। कैंटिंग में बैठकर मेरी हसी सुनती थी। घर में पढ़ाई करते समय मेरे ही यादों में खोई रहती थी। लेकिन मेरे से खुल के बातें नहीं करती थी। दो दिन में ही  अंकिता का निर्णय पक्का हुआ था।

सोम को अंकिता कॉलेज में आई लेकिन मै अंकिता को दिखा नहीं अंकिता मुझे एक घंटे तक देखते ही रही। उसे लगा की गांव से नहीं आया होगा इसलिए और दो घंटा भी अंकिता ने मेरा वेट किया। खाना-खाने के समय मेरा आवाज सुनने के लिए कैंटिंग में चली आई। आधे घंटे तक उसने वहा वेट किया।

कॉलेज छूटने के बात अंकिता मुझे देखने के लिए क्रिकेट के ग्राउंड में आई अंकिता को कुछ समझ में नहीं आ रहा था। किसी के लिए इतना बैचेन होना अंकिता का फर्स्ट टाईम था।



मेस से आते मेरे दोस्तों को अंकिता ने आवाज दीया और मेरे बारे में पूछने लगी, '' सुरेश गांव से आया क्या ?'' पता नहीं सुबह से हमें दिखा नहीं कुछ काम था क्या ? कुछ नहीं लेकिन उसका नंबर है क्या तेरे पास,'' हा, है नंबर अंकिता नंबर लेकर अपने सहेली के साथ चली जाती है।

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मै एक लड़के के लिए कितनी बैचेन हो रही हु इसकी अंकिता को बहुत ही शर्म लगी। रूम पर आने के बाद अंकिता को मेरी ही याद सताने लगी। अंकिता ने उसे मेसेज किया लेकिन उसका कोई रिप्लाई नहीं आया इसलिए अंकिता ने उसे फोन किया। लेकिन दो बार फोन करने के बाउजूद फोन उठाया नहीं इसलिय अंकिता ने फोन करना छोड़ ही दिया।

अंकिता ने उसके घर का नंबर लिया और उसने घर पर फोन लगाया,'' सुरेश है क्या घर पर , नहीं ओ तो कल ही अमरावती गया है। यह बातें सुनकर अंकिता का आत्मविश्वास कम हुआ।अंकिता ने अपनी स्कूटी निकाली और मन के मन में कहने लगी, मैं इधर-उधर देख रही हु मैंने कभी किसी से बात नहीं की लेकिन इसके लिए मैं बार-बार उसके दोस्तों के तरफ जाकर बात करने के लिए मोबाईल नंबर मांग रही रही हु। '' अंकिता अपने स्कूटी पर रोते हुए अपने रुम पर आ रही थी कितनी बेवकूफ हु मैं क्या इसे ही प्यार कहते है क्या ? यह बातें मन के मन में सोच रही थी।

स्कूटी पार्किंग में लगाकर अंकिता जीना चढ़ रही थी और उसे मै दिखा और अंकिता और जोर से रोने लगी मैंने उसे अपने पास बिठाया और अंकिता शांत हुई।

सुरेश : रो क्यू रही हैं, पगली। मैं कई नहीं गया था।

अंकिता : लेकिन तुम्ह कहा थे , '' मैंने तुम्हको कहा-कहा नहीं ढूढ़ा।

सुरेश : हा , मुझे पता है , '' मेस , फोन , ग्राउंड , घर में फोन सभी पता है मुझे '' ।

अंकिता : तुम्ह मिले क्यू नहीं।

सुरेश : गुस्सा मत हो, उस दिन मै Gov जॉब के ख़ुशी में था इसलिए मैंने सब कुछ बोल दिया ...... याने की ओ सच्चाई थी ....... और तुझे कितना टेंशन आया था ...... तेरा शर्मिला स्वभाव........ मुझे लगा मैं जल्दबाजी तो नहीं कर रहा हु ना इसलिय घर जाकर मैने बहुत विचार किया। हमें अपनि जिंदगी चलानी है और तुझे आधे में नहीं छोड़ना था।  इसलिए मैंने तुझे दो दिन का समय दिया था। मेरे दोस्तों ने बताया मुझे तू कहा ढूढ़ रही थी।   मैंने ही अपने दोस्तों को बोला था की, अंकिता को कुछ मत बताना। मुझे लगा और यह पगली क्या करेगी और क्या नहीं इसलिए यह बैठ कर तेरा इंतजार कर रहा था। तेरे जैसे मुझे भी यह दो दिन बहुत ही कठिन गए लेकिन दो दिन में जो हमने कमाए ओ हमारे जिंदगी भर की कमाई थी।

मेरी अंकिता मेरे हाथ में हाथ लेकर मेरे कंधे पर लेटी थी और यह सभी बातें प्यार से सुन रही थी।

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