गोदावरी नदी की कहानी / Story of Godavari river


गोदावरी नदी यह दक्षिण भारत की नदी है। रामायण की कथाएँ गोदावरी नदी पर ज्यादा घटित हुई है। इसलिए गोदावरी नदी को पवित्र नदी कहते है।

story of Godavari river

गोदावरी नदी का उद्गम / Origin of Godavari river

दक्षिण भारत के नदियों की तरह गोदावरी नदी पश्चिम घाट से निकल के पूरब की तरफ बहती है लेकिन  गोदावरी नदी का उद्गम उत्तर दिशा से हुआ है उद्गम स्थान से गोदावरी का प्रवाह बहुत ही छोटा दीखता है लेकिन आगे-आगे जाती है तो उसका प्रवाह बहुत ही विशाल होता है।


गोदावरी नदी की उपनदियाँ है, प्राणहिता यह गोदावरी नदी की पहली उपनदी है। शबरी और इंद्रावती यह गोदावरी नदी की उपनदियाँ है उपनदियों के कारण गोदावरी नदी का पात्र बहुत ही गहरा हुआ है।

पूर्व में बहते समय गोदावरी भद्राचलम में पहुँचती है, '' भद्राचलम '' यह रामायण का प्रसिद्ध ठिकान है। पर्वत पर रामजी का एक मंदिर है।

भद्राचलम से निकली हुई गोदावरी राजमहेंद्रीवरम इस महत्व के ऐतिहासिक स्थल पर पहुँचती है, और यहां के शिवमंदिर की मुर्तिया बहुत ही प्रशिद्ध है बारा साल के बाद में एक बार इस जगह '' पुष्करम मेला '' लगता है। कुंभमेला के जैसी यहां पर भीड़ रहती है।

राजमहेंद्रीवरम इस जगह पर गोदावरी के प्रवाह को बहुत ही तेज है। नदी का प्रवाह बहुत लंबा-चौड़ा रहता है गोदावरी नदी के रेलवे ब्रिज को 56 कॉलम है और भारत के नदियों में से लम्बाई में इस ब्रिज का क्रमांक दूसरा लगता है।

गोदावरी नदी पर आर्थर कॉटन इस इंग्रज इजीनियर ने धवलेश्वर ब्रिज बनाया और सभी किसानों को सुखी किया।


गोदावरी नदी की शाखा / Branch of Godavari river    


धवलेश्वर डैम के आगे गोदावरी तीन शाखा में विभाजित होती है, पूरब की शाखा को '' गौतमी  गोदावरी '' कहते है, पश्चिम के शाखा को '' वसिष्ठ गोदावरी '' कहते है और बिज के शाखा को '' वैष्णवी गोदावरी '' कहते है। यह तोनों शाखा ये मिलके एक त्रिभुज क्षेत्र निर्माण होता है। 

गोदावरी के तट पर नाशिक, पंचवटी, भद्राचलम, राजमहेंद्रीवरम, धवलेश्वर इ. धार्मिक स्थल है। 

नाशिक यह महारष्ट्र का धार्मिक स्थल है, नाशिक में बारा साल के बाद में '' कुंभमेला लगता है।  भक्त गण ज्यादा से ज्यादा संख्या में आते है। 



गोदावरी नदी की पौराणिक कथा / Legend of Godavari River 


नाशिक के पास '' पंचवटी '' नाम का ठिकान है।पौराणिक कथा के नुसार वनवास में रहते समय रामजी पंचवटी में यहाँ रूखे थे। इसी जगह पर लक्ष्मण ने शूर्पणखा का नाक काटा था, इसी जगह से सीतामैया का रावण ने हरण किया था। 

भद्राचलम में रामजी ने '' पर्णकुटी '' बांध के रामजी वहा पर बहुत दिन तक रहे थे और इसी जगह से राम-लक्ष्मण ने गोदावरी पार किए थे। संत रामदासजी ने इस जगह पर कुछ दिन तक निवास किया था। इस लिए यह ठिकान '' रामदास भद्राचलम '' के नाम से पहचाना जाता है।   

राजमहेंद्रीवरम यह ठिकान बहुत ही धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल से प्रसिद्ध है। 

गोदावरी के तट के धार्मिक स्थल के कारण गोदावरी का पवित्र स्थान आज भी कायम है मन की इच्छा पूरी करने के लिए भक्त गण लोखों की तादात में उपस्थित रहते है। 

वनवास में रहते समय रामजी के पिताजी राजा दशरथ मृत्यु हुए थे तभी रामजी ने अपने पिताजी का पिंड दान गोदावरी के तट पर किया था। रामयण में गोदावरी नदी का बहुत बड़ा महत्व है, इसलिए गोदावरी नदी का पुरे विश्व में पवित्र का स्थान है। 
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