प्यार के दो शब्द / Two words of love


 दोस्तों नमस्ते,

Two words of love

कॉलेज करने के लिए एक लड़की जाती है और अपनी कॉलेज की पढ़ाई किस तरह से पूरी करती है। हम बहार पढ़ाई के लिए जाते है और हमें किसी दोस्त की या पड़ोसी की मदद लेनी पड़ती है। कुछ इसी तरह ही यह कहानी है।यह लड़की एक लड़के की मदद लेती है।यह कहानी मेरे फ्रेंड की है।जरूर पढ़ो दोस्तों यह कहानी बहुत ही अच्छी है, पढ़िए और शेअर कीजिए।


प्रतिभा सुस्वभावी और बहुत ही समझदार लड़की है। कॉलेज की पढ़ाई करने के लिए होस्टल में नहीं रहती थी। होस्टल में बराबर पढ़ाई नहीं होती इसलिए प्रतिभा रुम करके रहने लगी। लेकिन city में रूम मिलना बहुत ही कठिन था। अकेली लड़की कॉलेज करके रूम ढूढ़ना उसके लिए बहुत बढ़ी बात थी। उसने अपने फ्रेंड को याद किया और उनका मोबाईल में नंबर देखने लगी। मोबाईल में उसे उसकी सहेली का नंबर दिखा जिसका नाम था अस्विनी। प्रतिभा ने अपनी सहेली अस्विनी के साथ रूम ढूढ़ना चालु किए।

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कुछ भी हो लेकिन अकेली लड़की थी उसके लिए अच्छी रूम देखनी थी। रूम के अंदर ही सभी व्यवस्था होनी चाहिए। कॉलेज से रूम की दुरी पास में होनी चाहिए, आजुबाजु के लोग अच्छे होना चाहिए और एक बात याने की घर मालक का स्वभाव अच्छा होना चाहिए। सभी बातें एक ही जगह मिलना बहुत बढ़ी बात थी। अस्वनी ने अपने फ्रेंड प्रवीण को फोन किया और कोई रूम होगी तो बताना यार, मेरे फ्रेंड के लिए होना था ।



रूम ढूढ़ने के लिए प्रतिभा, अस्विनी और प्रवीण इधर उधर घूमने लगे। प्रवीण ने बहुत जगह रूम ढूढ़ा और प्रतिभा को फोन करके बताया।याने की प्रतिभा को जिस तरह से रूम चाहिए था उसी तरह से रूम प्रवीण ने देखा और प्रतिभा को बताया। प्रतिभा और प्रवीण की फ्रेंडशिफ़ रूम देखते-देखते हो जाती है।

प्रवीण को प्रतिभा से पहली नजर में ही प्यार हो जाता है।प्रवीण ने प्रतिभा को इसके पहले कभी देखा नहीं था। लेकिन रूम ढूढने के बहाने से उसकी पहचान प्रतिभा से लगी। प्रतिभा दिखने में बहुत ही सुन्दर थी। बहुत ही Haited थी। उसका व्यक्तिमत्व आकर्षित करनेवाला था। प्रवीण स्वभाव से बहुत की शांत था। प्रतिभा बहुत ही जिद्दी और खिलखिला के हसनेवाली लड़की थी और बहुत ही समझदार लड़की थी।दोनों का स्वभाव एक दूसरे से नहीं मिलता था। लेकिन दोनों एक-दूसरे को समझते थे। प्रवीण ने बहुत मदद की प्रतिभा को रूम ढूढ़ने में और एक दिन प्रवीण ने रूम बताया। जिस तरह से प्रतिभा को रूम चाहिए था उसी तरह का रूम प्रवीण ने बताया। ऐसे बातों-बातों में प्रवीण का मन कब प्यार में बदला उसे पता ही नहीं चला।



प्रतिभा प्रवीण को अच्छा फ्रेंड समझती थी। उसने मदद की इसलिए प्रतिभा के मन में उसके प्रति मात्र हमदर्दी थी। प्रतिभा को प्रवीण में कुछ बदलाव दिखा यह सभी बातें प्रतिभा को समज में आई थी। उसने प्रवीण को इंग्नोर करने का प्रयाश किया। उसे बहुत समझाके बताया की हम दोनों में बहुत अंतर है। उम्र , जात , शिक्षा और आर्थिक इन सभी में बहुत ही अंतर था और प्रतिभा के मन में प्रवीण के प्रति कुछ भी भावना नहीं थी। प्रवीण प्रतिभा से बहुत ही प्यार करने लगा था।

प्रवीण ने प्रतिभा को बहुत बार प्रपोज किया लेकिन प्रतिभा ने नहीं बोला क्यू की प्रतिभा के मन मेंउसके प्रति  कुछ भी प्यार की feeling नहीं थी। प्रतिभा को मदद किया था इस लिए उसके मन में हमदर्दी थी। किसी के मन में जगह बनाना बहुत ही कठिन रहता है। दोस्तों हम अगर आगेवाले व्यक्ति से कितना भी प्यार करे लेकिन उसके मन में हमारे प्रति कुछ feeling नहीं है तो कुछ भी नहीं हो सकता।

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प्रतिभा ने धीरे-धीरे प्रवीण के फोन रिसीव्ह करना बंद किया था। दोनों के रास्ते अलग हो गए थे। प्रतिभा के मन में प्रवीण के लिए कुछ भी प्यार की feeling नहीं थी।

प्रतिभा की बाजु अगर देखि जाए तो उसने भी बराबर किया। प्रवीण के भावनाओं को बार-बार ठेच पहुँचाने से कोई मतलब ही नहीं था ?  

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