प्यार के दो शब्द / Two words of love


 दोस्तों नमस्ते,

Two words of love


कॉलेज करने के लिए एक लड़की मुंबई जाती है और अपनी कॉलेज की पढ़ाई किस तरह से पूरी करती है। हम पढ़ाई के लिए बढे शहर में जाते है और हमें किसी दोस्त की या पड़ोसी की मदद लेनी पड़ती है। कुछ इसी तरह ही यह कहानी है।यह लड़की एक लड़के की मदद लेती है।यह कहानी मेरे फ्रेंड की है।दोस्तों यह कहानी बहुत ही अच्छी है पढ़िए और शेअर कीजिए।


दीपिका सुस्वभावी और बहुत ही समझदार लड़की थी। कॉलेज की पढ़ाई करने के लिए होस्टल में नहीं रहती थी। होस्टल में बराबर पढ़ाई नहीं होती इसलिए दीपिका रुम करके रहने की सोच रही थी। लेकिन city में रूम मिलना बहुत ही मुस्किल था। अकेली लड़की कॉलेज करके रूम ढूढ़ना उसके लिए बहुत बढ़ी बात थी। उसने अपने फ्रेंड को याद किया और उसका मोबाईल में नंबर ढूढने लगी। मोबाईल में उसे उसकी सहेली का नंबर दिखा जिसका नाम था अस्विनी। दीपिका ने अपनी सहेली अस्विनी के साथ रूम ढूढ़ना चालु किया

कुछ भी हो लेकिन अकेली लड़की थी उसके लिए अच्छी रूम देखनी थी। रूम के अंदर ही सभी व्यवस्था होनी चाहिए। कॉलेज से रूम की दुरी पास में होनी चाहिए, आजुबाजु के लोग अच्छे होना चाहिए और एक बात याने की घर मालक का स्वभाव अच्छा होना चाहिए। सभी बातें एक ही जगह मिलना बहुत बढ़ी बात थी। अस्वनी ने अपने फ्रेंड रणबीर को फोन किया और कोई रूम होगी तो बताना यार, मेरे फ्रेंड के लिए होना था ।



रूम ढूढ़ने के लिए दीपिका, अस्विनी और रणबीर इधर उधर घूमने लगे। प्रवीण ने बहुत जगह रूम ढूढ़ा और दीपिका को फोन करके बताया।याने की दीपिका को जिस तरह से रूम चाहिए था उसी तरह से रूम रणबीर ने  देखा और दीपिका को बताया। दीपिका और रणबीर की फ्रेंडशिफ़ रूम देखते-देखते होती है।

रणबीर को दीपिका से पहली नजर में ही प्यार हो जाता है।रणबीर ने दीपिका को इसके पहले कभी नहीं देखा था। लेकिन रूम ढूढने के बहाने से उसकी पहचान दीपिका से लगी। प्रतिभा दिखने में बहुत ही सुन्दर थी। बहुत ही Highted थी। उसका व्यक्तिमत्व आकर्षित करनेवाला था। रणबीर स्वभाव से बहुत की शांत था। दीपिका बहुत ही जिद्दी और खिलखिला के हसनेवाली और बहुत ही समझदार लड़की थी।दोनों का स्वभाव एक दूसरे से नहीं मिलता था। लेकिन दोनों एक-दूसरे को समझते थे। रणबीर ने बहुत मदद की दीपिका को रूम ढूढ़ने में और एक दिन रणबीर ने रूम बताया। जिस तरह से रणबीर को रूम चाहिए था उसी तरह का रूम रणबीर ने बताया। ऐसे बातों-बातों में रणबीर का मन कब प्यार में बदला उसे पता ही नहीं चला।



दीपिका रणबीर को अच्छा फ्रेंड समझती थी। उसने मदद की इसलिए दीपिका के मन में उसके प्रति मात्र हमदर्दी थी। दीपिका को रणबीर में कुछ बदलाव दिखा यह सभी बातें दीपिका के समज में आई थी। उसने रणबीर को इंग्नोर करने का प्रयाश किया। उसे बहुत समझा के बताया की हम दोनों में उम्र , जात , शिक्षा और आर्थिक इन सभी में बहुत ही अंतर है। दीपिका के मन में रणबीर के प्रति कुछ भी भावना नहीं थी। रणबीर दीपिका से बहुत ही प्यार करने लगा था।

रणबीर ने दीपिका को बहुत बार प्रपोज किया लेकिन दीपिका ने नहीं बोला क्यू की दीपिका के मन में उसके प्रति  कुछ भी प्यार की feeling नहीं थी। दीपिका को मदद किया था इस लिए उसके मन में हमदर्दी थी। किसी के मन में जगह बनाना बहुत ही मुश्किल काम है। दोस्तों हम अगर आगेवाले व्यक्ति से कितना भी प्यार करे लेकिन उसके मन में हमारे प्रति कुछ feeling नहीं है तो कुछ भी नहीं हो सकता।

दीपिका ने धीरे-धीरे रणबीर के फोन रिसीव्ह करना बंद किया था। दोनों के रास्ते अलग हो गए थे। दीपिका के मन में रणबीर के लिए कुछ भी प्यार की feeling नहीं थी।

दीपिका की बाजु अगर देखि जाए तो उसने भी बराबर किया। रणबीर के भावनाओं को बार-बार ठेच पहुँचाने से कोई मतलब ही नहीं था ?  

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