Blind love / अंधा प्यार


Blind love

नमस्ते दोस्तों, आज और एक प्यार भरी प्यार की कहानी लेकर आया हु। आज के युवा पीढ़ी की प्रेम नगरी की बहुत ही दर्द भरी स्टोरी आपको बताने जा रहा हु।बहुत ही रोमांचित और दिल को रुलानेवाली कहानी आपको बहुत ही पसंद आएगी। दोस्तों मुझे कुछ दीनों पहले मेरे दोस्त ने अपनी प्रेम कहानी बताया है और यही द्रर्द भरी कहानी आपके साथ शेयर करने जा रहा हु।


शुभम B.sc कर रहा था। B.sc  होने के बाद कॉलेज को छुट्टीया लगने के बाद शुभम बाजु के शहर शिमला में जॉब के लिए चला गया वहा पर उसे एक कंपनी में जॉब लगी जॉब के पेमेंट में से कुछ पेमेंट अपने घर में बूढ़े माँ-बाप के लिए भेजता था।शुभम की इच्छा थी की मेरे पास भी मोबाईल होना इसलिए  कुछ पैसे अपने पगार में से जमा करता था। शुभम बहुत हुशार, देखना, मीठा आवाज, दिखने में सुंदर और एक पल में लड़कियों के मन में भरनेवाला।

शुभम के हसी में और आवाज में जादू थी। बहुत ही समझदार लड़का था। उसके परिवार में उसके माता-पिता और एक बहन थी।प्रकृति से हराभरा और चारों बाजु से पर्वतों से घिरा हुआ शुभम का गांव बहुत ही सुंदर था शुभम का मकान उसी घाटी के पास में था।उसका कवेलू का माकन गोबर से साफ किया हुआ आँगन और छोटासा गार्डन मन को मोहहित करनेवाला उसके माकन का जितना भी वर्णन करे उतना कम ही है। सुबह पंछी अपने प्यारी सी आवाज से हमें जगाते थे और दोपहर में सभी लोग एक जगह पर बैठ कर बातें करते थे। और शाम, मंदिर के आरती से सुमधुर होती थी। दयालु और सभी के साथ प्रेमभाव से रहनेवाले मेहनती लोग रहते थे।  दोस्तों ऐसे गांव में इस कहानी का हीरो '' शुभम '' रहता था।

कॉलेज पूरा होने के बाद शुभम को बाजू के शहर सिमला में जॉब मिली सुबह शुभम जॉब पर जाता था और शाम में 6 बजे तक अपने घर आता था। शुभम को जॉब करते हुए 10 माह हुए थे। शुभम का पगार 6000/- रु था। और आगे के माह में दीपावली थी।  उसे पता था की मुझे पूरा एक साल भी नहीं हुवा है, तो मुझे बोनस नहीं मिलेगा शुभम बोनस के पैसे पर निर्भर नहीं था। लेकिन मन में लगता था की अगर बोनस मिल जाता तो दीपावली का खर्चा निकल जाएगा।लेकिन शुभम ने अपने पगार में से कुछ पैसे बचाके रखा था और कोई भी हालत में उसे दीपावली में नया मोबाईल लेना ही था यह उसका सपना था। दीपावली के फटाके इधर-उधर फूटने लगे। दीपावली आई शुभम के कंपनी मालक का ध्यान शुभम के काम पर था। शुभम को पूरा साल भी नहीं हुआ था जॉब लगी तो, लेकिन उसके मालक ने उसे एक पगार बोनस दिया।

दीपावली के दिन शुभम ने नया साधा मोबाईल लिया और सुट्टी का दिन कैसा गया यह उसे पता ही नहीं चला।उसने  अपना मोबाईल अपने बहन को नहीं दिखना चाहिए इसलिए अपने जेब में ही रखता था। दिन भर अपने मोबाईल में ही रहता था। एक बार का खाना नहीं मिलेगा तो चलेगा लेकिन मोबाईल को नहीं छोड़ता था। उस समय में उनके मोहल्ले में किसी के पास मोबाईल नहीं था।सभी लोग उसका मोबाईल देखने के लिए आते थे।



मोबाईल की रिंगटोन बजी और देखने के लिए शुभम आया उतने में और एक मेसेज आया उस मेसेज में लिखा था की हाय प्रदीप कैसा है ? भूल गया क्या मुझे ? अभी कहा पर है ? मेसेज रॉन्ग नंबर से आया था और प्रदीप के नाम से था इसलिए शुभम ने कुछ मन पर नहीं लिया और हमेशा की तरह अपने काम पर चला गया। दिन भर काम करके शाम में अपने घर आया और खाना खाके छत के तरफ देखते हुए सो रहा था।उसे सुबह के मेसेज की याद आई मोबाईल निकला और मेसेज की तरफ देखने लगा उसे लगता था की मेसेज डिलेट करना चाहिए शुभम  मेसेज के बारे में ही सोच रहा था उस दिन उसे नींद नहीं लगी।उसने मोबाईल अपने हाथ में लिया और मेसेज पढ़ने लगा। कोण होगा ? मुझे मेसेज क्यू किया ? किसी लड़की ने तो मेसेज नहीं किया होगा ना ? ऐसे बहुत सवाल उसके मन में आते थे। उसने डरते हुए मेसेज का रिप्लाय दिया सर , मै प्रदीप नहीं शुभम हु। आप कोण ? मुझे मेसेज क्यू किए ? और उसी नंबर से रिप्लाय आता है। मुझे माफ़ करो मैं अपने आक्का के लड़के को मेसेज भेज रही थी लेकिन गलती से लास्ट का नंबर गलत हुवा और मेसेज आपको आया, स्वारी। भेज रही थी इस बात से शुभम को पता चला की यह लड़की है। थोड़ा डरा और ओके बोलके फोन रख दिया। शुभम को उसके बारे में पूछने की इच्छा हुई। लेकिन उसे और मेसेज करके परेशान करने का उसका मकसद नहीं था इसलिए उसने अपने मोहित मन को दबा दिया।

शुभम के मन में प्रेम की भावना जागृत हुई, उसे बार-बार रात के मेसेज की याद आ रही थी। उधर से और कोई मेसेज आता है क्या इसका वेट शुभम कर रहा था। लेकिन उधर से कोई मेसेज नहीं आया। लेकिन शुभम ने ही मेसेज किया।

शुभम :- आपका नाम क्या है ? .........

शुभांगी :- उधर से Reply आया .............. मेरा नाम, '' शुभांगी '' वाह क्या नाम है, शुभम - शुभांगी ...(शुभांगी मन के मन  में बोली- उसके मेसेज का वेट ही कर रही थी।)

शुभम :- आप क्या करते हो ?

शुभांगी :- कुछ नहीं, घर में  ही रहती हु। 

शुभम :- क्यों

शुभांगी :- कुछ नहीं, बस ऎसे ही।

शुभम :- ओके

शुभांगी :- आप, क्या करते हो ?

शुभम :- मै ऑपरेटर हु

उसने शुभांगी को ज्यादा फ़ोर्स नहीं किया। अभी फोन पर बातें करना और एकदूसरे का हालचाल पूछना चालू हुआ लेकिन शुभांगी कैसी है, क्या करती है इसके बारे में उसे कुछ भी पता नहीं था। कभी मेसेज करके तो कभी फोन पर बोलके शुभम शुभांगी से प्यार करने लगा। वैसे शुभांगी भी मेरे से प्यार करती होगी ऐसा उसे लगता था दोनों ने प्यार का इजहार नहीं किया था। शुभांगी को मैं घर पर ही रहती हु, इसका उत्तर देते नहीं आया और बातों-बातों में टाल देती थी। शुभम को लगता था की मेरे से कुछ छुपा रही है। एक दिन शुभम ने बहुत पूछने का प्रयास किया लेकिन कुछ बताने को तैयार ही नहीं थी तू कुछ नहीं बताएगी तो तेरी और मेरी दोस्ती टूटी, समझी क्या ? ऐसा कहने पर शुभांगी बोली, '' शुभम तुझे इसलिए कुछ नहीं बता रही थी की मेरा घर में रहने का कारण, तुझे पता चला तो तू मेरे से बात नहीं करेगा और मेरे से दोस्ती तोड़ देंगा और यह कारण आज हमारे दोस्ती में नफरत पैदा कर रहा है, प्लीज सही कारण बताने पर मेरे से दोस्ती तो नहीं तोड़ेगा ना ? इसके लिए मुझसे प्रॉमिस कर।

शुभम : ओके, बोल क्या बोलना है, जल्दी।

शुभांगी : डरते हुए बोली, मैं अपंग हु रे , मेरे दोनों पैर एक हादसे में गए रे , मैं चल नहीं सकती, इसलिए मैं घर पर ही रहती हु। इतना बोलकर शांत हो गई। (शुभम को उसके बोलने पर विश्वास नहीं हुआ )

शुभम : चुप रै, कुछ भी मत बोल, शुभांगी मै तेरे से बहुत प्यार करता हु, तूभी करती है क्या सही में बता दे अभी, क्या तू दूसरे लड़के के साथ प्यार करती है इसलिए अपंग का नाटक कर रही है।



शुभांगी : नहीं रे, '' मेरे राजा '' मैं सच बोल रही हु। मैं क्यू झूठ बोलू तेरे से मैं पहिले दिन से ही तेरे प्यार में पागल थी क्यू की तेरा आवाज, तेरा बातें करने का तरीका, जोक्स करने का तरीका इस के कारण तू  मेरे मन मंदिर में बैठ गया। मुझे तेरे जैसा समझदार साथीदार मिलेगा तो मेरा जीवन सुखी हो जाएगा लेकिन तुझे फ़साके नहीं रखना था इसलिए सारि हकिगत तुझे बता दी। तुम्हे मेरी बाते सच नहीं लगती  तो, घर पर आकर  हकीकत क्या है अपने आखो से देख ले इतना बोलकर शुभांगी रोने लगी और फोन रख दी।

शुभम को उस रात नीद नहीं आ रही थी, वो बहुत चिंतित था।शुभांगी के बताने पर उसका विश्वास नहीं बैठ रहा था। शुभांगी कैसी भी हो मै उसे बहुत प्यार करता हु। सुबह जल्दी उठकर अपने सारे काम करके उसके घर जाने  के लिए निकला।जाते-जाते उसके मन में एक ही खयाल बार- बार मन में आता था की शुभांगी कैसी दिखती होगी यही विचार मन के मन  कर रहा था। शुभांगी ने अपने फ्रेंड के लिए खाना बना के रखा था।उस दिन शुभांगी बहुत ही खुश थी।लेकिन दुखी भी थी क्यू की मुझे देखने के बाद मेरे से कैसा व्यवहार करेगा इसका डर उसके मन में था। यह सभी बातें मन के मन में सोच थी रही थी। उतने में बेल बजी और उसके पिताजी ने दरवाजा खोला उसे बैठने को कहा चाय दिए और सभी लोग बातें करने लगे लेकिन शुभम को शुभांगी कही नजर नहीं आ रही थी। इसलिए उसने पूछा की शुभांगी कहा है उतने में शुभांगी बोली, '' मैं इधर हु, उठ कर शुभम शुभांगी के पास गया शुभांगी दिखने में बहुत ही सुंदर थी। शुभम बातें करने लगा और धीरे-धीरे उसकी नजर उसके पैरों के तरफ गई और उसके  चेहरे के हाव-भाव बदल गए। शुभांगी मझे माफ़ कर मैं ने तुझे झूठी कहाँ , नाटक करती है यह सभी बातें बोला मुझे माफ़ कर प्लीज और रोते-रोते घर से चला गया।

शुभम बहुत ही संवेदनशील है।उसे दूसरों का दुःख देख के नहीं होता था शुभांगी से बहुत प्यार करता था।  अपंगतत्व का दुःख उसके मन को चुभ रहा था। रात में पूरा बिचार करके शुभांगी से शादी करने का निर्णय लिया। और अपने माता- पिता को बताया लेकिन उसके माता-पिता ने नहीं बोला।लेकिन शुभांगी से शादी करके दुखी जीवन को सुखी करने का निर्णय शुभम ने लिया।

शुभांगी हॅलो...... मैं बोल रहा हु। मुझे तेरे से शादी करना है। तेरा क्या निर्णय है मुझे बता। मैं तुझे संभाल लूँगा, बहुत खुश रखूंगा तुझे, लेकिन तू शादी के लिए नहीं मत बोल। उसके ऐसे बातों पर क्या बोलना चाहिए शुभांगी को कुछ शब्द नहीं सुच रहे थे। चुपचाप उसकी बातें सुन रहती थी। शुभम शुभांगी से शादी के बारे में बातें करता था शुभांगी नहीं बोलती थी। इतना बोलने के बावजूद भी नहीं बोल रही थी इसलिए शुभम ने गुस्से से बोला

शुभम : तुझे, क्या प्रॉब्लम है।

शुभांगी : शुभम, तुम्ह बहुत सुंदर, मेहनती , समझदार, और भविष्य में बहुत आगे जानेवाले हो ।  मैं तेरे उन्नति, यश और भविष्य के बीज में, नहीं आना चाहती रे,'' राजा '' मैंने तेरे से शादी की तो तू मेरी ही सेवा करेगा। मेरे कारण तेरा भविष्य पीछे आएगा यह मुझे अच्छा नहीं लगेगा मुझे अकेले ही रहने दे। प्लीज मुझे शादी के लिए ज्यादा फ़ोर्स मत करे। मैं पहले बहुत खुश थी की मुझे तेरे जैसा जीवन साथी मिलेगा लेकिन मन में विचार करने के बाद मुझे यह निर्णय लेना पड़ा। शुभम तू मुझे बोलता था की, तुझे कुछ गिफ्ट करू तो आज मुझे तेरी फ्रेँडसिफ गिफ्ट चाहिए। मुझे खुश देखने के लिए सुंदर लड़की से शादी कर और मेरे से शादी करने का ख्याल छोड़ दे। मुझे फ़्रेंड बनाकर रखना है, तो मुझे फोन करते जाना इतना बोलकर शुभांगी ने फोन रख दिया।

शुभांगी ने शुभम को बहुत ही अच्छी तरि के से बातें करके समझाया ........ शुभांगी पैरो से अपंग थी लेकिन दिल से प्यार की सुंदर मूरत थी।और एकबार मन के मन में शुभांगी के यादों को याद करके शुभम उसे भूलने की कोशिस कर रहा था।

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