स्वामी विवेकानंद जीवनी / Swami Vivekananda Biography

Swami Vivekananda Biography

 स्वामी विवेकानंद का जन्म सन 1863 में कलकत्ता में हुआ। उनका पूरा नाम नरेंद्र विश्वनाथ दत्त है  सन 1882 में उनका परिचय रामकृष्ण परमहंस के साथ हुआ और उनके जीवन में बहुत ही सुधार हुआ। विवेकानंद ने रामकृष्ण परमहंस को अपना गुरु बनाया। रामकृष्ण परमहंस से उन्हों ने वैदिक ज्ञान और योगविद्या का ज्ञान लिया। रामकृष्ण परमहंस ने उनका नाम बदलकर '' विवेकानंद '' रखा।


स्वामी विवेकानंदजी से पूछा गया प्रश्न 

प्रश्न 1. जहर क्या है ?
Que  :-What is poison?

उत्तर :- यदि जीवन में पर्याप्त आवश्यकता से अधिक है तो यह जहर बन जाता है।
 Ans  :- If there is more than enough requirement in life then it becomes poison

याने की अपने पास ताकद हो, गर्व हो, पैसा हो या भूक हो।


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स्वामी विवेकानंद के बताए गए सफलता के 06 सूत्र 

1. काम के लिए समय दें, क्योंकि सफलता की लागत सफलता है।
Give time for work, because the cost of success is success

2. सोचने के लिए समय निकालें, क्योंकि यह शक्ति का स्रोत है।
Take time to think, because it's the source of power

3.खेलने के लिए समय दें, क्योंकि यह युवाओं का रहस्य है।
Give time to play, because it's the secret of the young

4.पढ़ने के लिए समय दें, क्योंकि यह ज्ञान की नींव है।
Give time to read, because it is the foundation of knowledge

5.अपने लिए समय दें, क्योंकि आप दुनिया हैं।
Give time for yourself, because you are the world

6.दूसरे के लिए समय दें, क्योंकि अगर वे नहीं हैं, तो हमारा कोई मतलब नहीं है
Give time for second, Because if they are not, we have no meaning

स्वमी विवेकानंद का परिचय / Introduction to Swami Vivekananda

नाम :- नरेंद्र दत्त

जन्म :- 12 जनवरी 1863

जन्म स्थल :- कलकत्ता, भारत

पिताजी का नाम :- विश्वनाथ दत्त

माताजी का नाम :-भुवनेश्वरी देवी

गुरु का नाम :- रामकृष्ण परमहंस

स्वामी विवेकानंद का पारिवारिक जीवन / Swami Vivekananda's Family Life

स्वामी विवेकानंद के पिताजी कोलकत्ता उच्च न्यायालय में वकील थे। उनके पिताजी बहुत ही दयालु स्वाभाव के थे। उनकी आई भुवनेश्वरी देवी धार्मिक वृत्ति की थी। दयालु स्वभाव और धार्मिक वृत्ति के बंगाली  परिवार में दि. 12 जनवरी 1863 को मकर संक्रांति के दिन महान तेजस्वी पुत्र नरेंद्र ( स्वामी विवेकानंद) का जन्म हुआ। परिवार में  9 भाई-बहन थे।उनके दादाजी ने संस्कृत और फारशी भाषा पर विजय प्राप्त की थी। उनके घर का वातावरण शिक्षित था। स्वामी विवेकानंद के विचारों को चालना देने के लिए उनके पिताजी का मार्गदर्श हमेशा साथ में रहता था। स्वामी विवेकानंद को दर्शनशास्त्र, इतिहास, समाजशास्त्र, कला, साहित्य इत्यादि विषय में उनकी रूचि थी। 

स्वामी विवेकानंद को संगीत में रूचि होने के कारण उन्हों ने बेनी गुप्ता और अहमद खान उस्ताद से गायन और वाद्य बजाने की शिक्षा ली। स्वामी विवेकानंद अपने युवा अवस्था से ही व्यायाम और अन्य खेलों में भाग लेते थे। मित्र परिवार में प्रिय थे। उनके मित्र उन्हें '' बिले '' नाम से फुँकारते थे। उनके गुरु ''नोरेन'' नाम से फुँकारते थे।उनके मित्र व्यायाम, कुस्ती, मुष्टियुद्ध, स्विमिंग , घुड़स्वारी, लाठियुद्ध, गायन और वादन इत्यादि में उनकी रूचि थी। 

स्वामी विवेकानंद का अध्यन / Swami Vivekananda's studies

स्वामी विवेकानंद ने अपने अध्यन की सुरुवात अपने घरपर की थी। सन 1871 में ईश्वरचंद्र विद्यासागर के मेट्रोपोलिटन इन्स्टिटूशन में प्रवेश लिया और सं 1879 में प्रेसिडेंसी कॉलेज की प्रवेश परीक्षा पास किया। कुछ दिन तक इस संस्था में रहकर उसने जनरल असेम्ब्लीज़ इन्स्टीट्यूट में प्रवेश लिया। यहाँ पर तर्कशास्त्र, पाश्चात्य तत्वज्ञान और युरोप के इतिहास का अभ्यास किया। 

सन 1881 में फाइन आर्ट और 1884 में बी.ए की परीक्षा पास हुए। स्वामी विवेकानंद ने डेव्हिड ह्यूम, इमान्युएल कांट, गोतीलेब फित्शे, बारूक स्पिनोझा, जार्ज हेगेल, आर्थर शॉपेनहायर, ऑगस्ट कोम्ट, हर्बर्ट स्पेन्सर, जॉन स्टुअर्ट, मिल और चार्ल्स डार्विन इत्यांदि विचारवंत का अभ्यास किया था।



स्वामी विवेकानंद हर्बर्ट स्पेन्सर के उत्क्रांति से प्रभाववित हुए। स्वामी विवेकानंद के प्राध्यापक कहते है, '' नरेंद्र एक प्रतिभावंत विद्यार्थि है। 

स्कॉटिश चर्च कॉलेज के प्राचार्य डॉ.विल्यम हसी लिखते है, '' नरेंद्र बहुत ही बुद्धिमान लड़का है, मैं बहुत घुमा पूरा विश्व छान मारा लेकिन उसके जैसा जर्मन विद्यापीठ के तत्वज्ञान के विद्यार्थियों में मुझे कोई नजर नहीं आया। 

स्वामी विवेकानंद की याददास्त बहुत ही तेज थी इसलिए उन्हें, '' श्रुतिधारा '' कहते थे। 

शिकागो(अमेरिका)सर्वधर्म परिषद / Chicago (US) Religious Council   

सन 11 सप्टेंबर 1893 में अमेरका के शिकागो शहर के शिकागो आर्ट इंस्टीट्यूट में सर्वधर्मीय परिषद रखी गई थी। इस सम्मेलन में सभी धर्म के गुरु आये थे और अपने-अपने धर्म की बुक रखे थे। और हमारे देश के धर्म के वर्णन के लिए भगवत गीता रखी गई थी। सभी ने अपने अपने धर्म के बारे में बताए कुछ समय बाद स्वामी विवेकानंद स्टेज पर आए और उन्हों ने अपने व्याख्यान की सुरुवात की , '' मेरे अमेरिकी भाईयों और बहनों ''  शब्द के साथ अपने व्याख्यान की सुरुवात की और जोर-जोर से तालियाँ बजने लगी सभी लोग इनके व्याख्यान से प्रभावित हो गए।

स्वामी विवेकानंद का अमेरिका के पत्रकारों ने अपने न्यूज  पेपर में वर्णन किए थे की , '' भारत से एक सुनामी व्यक्तिमत्व का सन्यासी '' के नाम से किया गया था।

'' वेदांत और योग '' इस विषय पर स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका, इंग्लैंड और युरोपीय देश में व्याख्यान किया। और सन 1894 में न्ययॉर्क में वेदांत सोसायटी की स्थापना की।

रामकृष्ण मिशन की स्थापना / Establishment of Ramakrishna Mission

सन 1893 में अमेरिका के शिकागो शहर में सर्वधर्म की सभा थी। इस सभा में वेदांत पर स्वामी विवेकानंद ने व्याख्यान किया था। इस व्याख्यान के कारन स्वामी विवेकानंद पुरे विश्व में प्रसिद्ध हुए। हिन्दू धर्म के जनता को व्यापक विश्वधर्म का सन्देश देना, हिन्दू धर्म के तत्वज्ञान लोगों को बताना, हिन्दू धर्म के तत्वज्ञान की सही पहचान पुरे विश्व को बताना। इस उद्देश्य से प्रेरित होकर स्वामी विवेकानंद ने सन 1896 में '' रामकृष्ण मिशन '' की स्थापना की।  

स्वामी विवेकानंदजी की मृत्यु /  Death of Swami Vivekanandji  

स्वामी विवेकानंद की मृत्यु 04 जुलाई 1902 को हुई। 

कन्यामुमारी में उनका बहुत बड़ा स्मारक है।

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