आँवला के लाभ / Benefits of amla

Benefits of amla

आँवला पेड़ के Flowers, fruits, seeds, trunk, leaves, roots सभी Human health के लिए गुणकारी है। भारत में आँवला के पेड़ सभी जगह पाए जाते है।

 संस्कृत में आँवला को-'' धात्री '', मराठी में-आवळा, हिंदी में-आँवला, आमला, इंग्रजी में- (Indian Goseberry/ इंडियन गूसेबेरी) कहते है। आवला के दो प्रकार  है। एक रानआवला दूसरा सफेद आवला। पत्तिया शमी वृक्ष के जैसी रहती है। छोटे आवला का फल सुपारी जैसे रहता है और बढ़ा आवला नीबू की तरह रहता है। आवला थंड के मौसम में मिलता है। 


आमला में व्हिटामिन '' सी '' भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा कैल्शियम, फ़ॉस्फ़रस, नायसिन, कार्बोहाड्रेट, प्राथिने, आयरन इत्यादि रहता है। आयुर्वेद ने शरीर को छह रस की आवश्यकता बताया है। यह छह  रस याने की मीठा, तिखा, खट्टा, खारा, तुरट और कड़वा है। 

आवला से सरबत, मोरावला, लोंच चटनी, च्यवनप्राश इ. बनाते है। एक कमजोर युवा आदमी को सशक्त बनाना। बूढ़े को जवा बनाना। चेहरे पर तेज आना। अंधे को दॄष्टि देना, बहिरापण नष्ट करना इ.रोग आवला का सेवन करने से दूर होते है। 



आँवला के औषधिय गुण / Medicinal properties of Amla

1. आमला से च्यवनप्राश तयार कीया जाता है। यह आरोग्यवर्धक रसायन शक्तिवर्धक सप्तधातुवर्धक है और आबाल वृद्ध के लिए गुणकारी टॉनिक है। 

2 . आमला, हिरडा और बेहड़ा इन तीन्हो फल का चूर्ण याने की त्रिफला चूर्ण। विषमज्वर, आँखों का विकार, कप, पित्त, पेट साफ इत्यादि के लिए यह चूर्ण काम में आता है। 

3. व्हिटामिन ' सी ' कमी के कारन मसूड़ों में सूजन आना, दात दर्द, दातों से खून निकलना, चमड़ी रुक्ष और खरबरी होना, Bottom hand and bottom leg फटना, जखम जल्दी ठीक न होना इत्यादि के लिए आँवला बहुत उपयोगी है। 

4. आँवला का रस लेनेसे पेशाब करते समय जलन होना और थेंब-थेंब पेशाब होना यह विकार दूर होते है और पेशाब साफ होती है। 

5. जिस को मधुमेह है उसने सुबह खाली पेठ एक चमचा आवला का रस, जामुन का रस, हल्दी का रस लेना चाहिए, इस से मधुमेह जैसा विकार दूर होता है। 

6. आयरन का प्रमाण आवला में रहता है इस से खून बढ़ना और खून शुद्ध होता है।  

7.  ह्रदय, मेंदु यकृत इनकी कार्य करने की क्षमता पढ़ता है। धूपकाले में लु लगना, नाक से खून निकलना, घबराहट होना यह विकार दूर होते है।

8. आवला में रहनेवाला फ़ॉस्फ़रस मष्तिष्क को स्वस्थ रखता है और बौद्धिक क्षमता बढ़ाता है।

9. आवला का रस घी के साथ खाना सेहत के लिए  फायदेमंद है।



10. आवला के रस में शहद मिलाकर खाने से स्त्री के प्रदर (Blennelytria) रोग पर नियंत्रण करते आता है। पंडुरोग नहीं होता।

11. आवला का मोसम जाने के बाद आंवले को सुखाकर उसकी आवलाखट्टी  बनाकर सुपारी की तरह खाते आता है।

12. एक चमच आवलाखट्टी चूर्ण ताग के साथ लगाने से Bottom hand and bottom leg की आग कम होती है। आवला का कड़ा बनाके सुबह-शाम आँखे धोने से आँखों की पेशी बजबूत होती है और आँखों की रोशनी तेज होती है।

13. गर्भवती महिला ने हर दिन एक आवला का सेवन करने से माता और गर्भ में पल रहे बच्चे को आयरन और कैल्शियम मिलता है।

14. आवला के पत्तियों का कड़ा बनाकर उसका कुर्ला करने से मुखरोग, मुखदुर्गन्धि, पायोरिया, मुँह के छाले , आवला की पत्तिया ताक के साथ लेने से पाचनक्रिया बराबर होती है।

15. आवला का सेवन करने से क्षय, मधुमेह, मंदता, अपघटन, गोवर, टाइफाइड बुखार, गर्भाशय ग्रीवा त्वचा, मूत्र संबंधी उत्पत्ति, निमोनिया, सर्दी, उच्च रक्तचाप, आंखों की बीमारी, फ्रैक्चर इत्यादि  बीमारियां अच्छी होती है।

16. तिल के तेल में आंवले पकाने से '' आवला तेल '' बनता है। आवला तेल सर को लगाने से सर थंडा रहता है। आवला तेल लगाने से बाल गिरना बंद होता है। बाल लंबे, काले और चमकदार होते है। नए आनेवाले बाल सफेद नहीं आते है।

17. आवला के बिच को बारीक़ पीस के अलसी के तेल मिलाकर लगाने से खाज, ख़रूज इन रोगों से छुटकारा मिलता है।

18. आवले का सेवन प्रजनन के लिए बहुत ही फायदेमंद है, पुरुषों में शुक्राणु की क्रियाशीलता और मात्रा बढ़ती है। महिलाओं में अंडाणु अच्छे और स्वस्थ बनते है, और पीरियड बराबर आता है।

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