अमरुद खाने के लाभ / Benefits of eating guava


Benefits of eating guava


अमरुद सभी का लाडला फल है।, और इसे बड़े चाव के साथ ग्रहण करते है। मध्य किंवा दक्षिण अमेरिका अमरुद का मुख्य स्थान है। भारत में अलाहाबाद, बनारस, लखनऊ, मिर्झापुर, धारवाड़ और नाशिक में अमरुद की खेती बढे पैमाने पर की जाती है। अलाहाबाद के अमरुद को सर्वत्कृष्ठ माना जाता है।


अमरुद के नाम / Name of Guava   

  • संस्कृत - अमृतफल 
  • हिंदी - अमरुद 
  • मराठी - पेरू, जांब 
  • इंग्रजी - Grava 
अमरुद दो प्रकार के रहते है एक- सफेद  और दूसरा- ताम्बडा। पोषक तत्व के सफरचंद के बराबर है आवला फल के बाद व्हिटामिन सी सबसे ज्यादा अमरुद में रहता है। अमरुद में व्हिटामिन ए बी सी, कैल्शियम, कार्बोहाड्रेस, प्रोटीन, फ़ॉस्फ़रस, आयरन इनका प्रमाण कम ज्यादा रहता है लेकिन पोटाशियम की मात्रा ज्यादा रहती है। कच्चा अमरुद खाने के बजाय पका अमरुद खाना चाहिए। अमरुद रुचक, मीठा, थंडा तुरट मुरब्बा आदि रहते है। सरबद ही टेस्टी बनती है। 



अमरुद के औषधीयुक्त गुण / Medicinal properties of guava


• कच्चे अमरुद में व्हिटामिन '' सी '' ज्यादा मात्रा में रहता है इसलिए अमरुद हमारे दातों के लिए बहुत ही फायदे मंद है। 

• भूखे पेठ अमरुद खाने से एनीमिया का विकार दूर होता है।  

• पीलिया हुए व्यक्ति ने खाना खाने के बाद अमरूद प्रतिदिन खाने से पीलिया का प्रमाण कम होता है। 

• पका हुआ अमरुद रात में पानी में रख कर सुबह चबा-चबा कर खाना चाहिए।इस से मष्तिष्क की गर्मी कम होती है, पागला और मानसिक बिमारी के रोगी को अमरुद देने से आराम मिला है।  

• अमरुद नमक लगाकर खाने से पेट का गुबारा विकार दूर होता है।  

• अमरुद साल के साथ खाना ने से बाधक नहीं है। अमरूद को सैधव नमक और मिरि के चूर के साथ खाने से पेट साफ रहता है। 

• पका अमरुद खाने से हृदयरोगी और पेशाब का विकार कम होता है। अमरूद सात्विक और बुद्धिवर्धक होता है इसलिए अमरुद खाना अच्छी बात है। 

• पेट में आग होना, गले में खरास हाथ-पैर, आँख में अंगार होना ऐसे व्यक्ति ने अमरुद खाना खाने के  एक घंटे बाद खाना चाहिए।   



• अमरुद की जेली-जाम छोटे बच्चे, गर्भवती महिला, क्षयरोगी, दमा, ऑफरेशन के बाद कमजोरी आना, अतिरक्त स्त्राव आदि विकारों पर टानिक के रूप में दी जाती है।  

• भांग,चरस, गांजा, अफु, दारू आदि से आनेवाली नशा उतरने के लिए अमरुद खिलाना चाहिए। 

• अमरुद के पत्तियों का कड़ा सैधव नमक के साथ कुरला करने से मुँह के छाले, दात से खून निकलना, मसूड़ों से खून निकलना, पायोरिया, गले की खराश कम होती है।  

• ताजे हरे पत्ते का लेप चेहरे पर लगाने से मुँहा से कम होते है और इस लेप में हल्दी मिलाकर खाज, गजकर्ण, नायटे अच्छे होते है। 

• अमरुद का बी कूट कर के उसमे सक्कर मिलाकर पिने से पित्त का विकार दूर होता है। 

• अमरुद के पेड़ के साल का कढ़ा लेने से हगवन, आव, सैम्य विषबाधा, अम्लपित्त, उल्टी, बवासीर , अपचन आदि विकार दूर होते है। 

• अमरुद खाने के बाद पानी नहीं पीना चाहिए।

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