संत्री(नारंगी)खाने के लाभ / The benefits of eating Orange

Benefits of eating Orange

आम को फलों का राजा कहते है और संत्री(नारंगी) को फलों की रानी कहते है। संत्री(नारंगी) फल विश्व के सभी जगह पर कम-ज्यादा मात्रा में पाया जाता है। भारत में नागपुर-विदर्भ विभाग में संत्री(नारंगी) का उत्पादन ज्यादा होता है। विदर्भ के साथ-साथ गुजरात, आसाम, बंगाल, कर्नाटक और मध्यप्रदेश में बढे पैमाने पर संत्री की खेती की जाती है। 


संत्री के नाम / Name of  santry 

  • संस्कृत - नारंगी 
  • हिंदी - नारंगी 
  • मराठी -संत्र
  • इंग्लिश - Orange   
संत्री में अम्ल, मधुर, ह्रदय, वातनाशक, और अन्नपचन के लिए संत्री में जीवनसत्व ए, बी, सी का प्रमाण रहता है। संत्री में पोटाशियम, मैग्नेशियम, आयरन, कॅल्शियम, फ़ॉस्फ़रस, सोडियम, अंधक, तांबे, प्रोटीन, सायट्रिक एसिड, क्लोरीन आदि का प्रमाण रहता है। इस कारन संत्री गुणकारी फल है। संत्री दो प्रकार के रहते है एक-खट्टा और दूसरा मीठा। संत्री सभी हंगामों में उपलब्ध रहता है। 

संत्री का प्रथम मोसम का तोडा - अक्टुंबर ते फरवरी दूसरे मोसम का तोडा- मार्च ते मे माह में लिया जाता है। संत्री के पेड़ की आयु सिमा 22 से 27 साल तक रहती है। एक पेड़ को 1000 ते 1500 संत्री के फल आते है। 



संत्री के औषधियुक्त गुण / Medicinal properties of Santry

◼️ मानसिक तान, रक्तदाब, हृदयविकार, गर्मी आदि विकारों के लिए संतरा का रस बहुत ही गुणकारी है। 

◼️ विषमज्वर, गोवर, क्षय, काजन्या आदि रोगों के लिए संतरा का रस पिए तो शरीर के विषारी द्रव, पेशाब के जरिये बहार निकलते है। संतरा का रस पिने से स्फूर्ति आती है। 

◼️ गर्भवती महिलाओं ने प्रथम माह से नऊ माह तक संतरा का रस लेना चाहिए , रस पिने से बालक के पेट का विकार और पाचन का विकार दूर होता है। 

◼️ अम्लपित्त, पित्त के कारन मलमल होना, अपचन आदी के लिए संतरा के रस में नमक और मिरि का बारीक़ चूर्ण मिलाकर पीना चाहिए। 

◼️ गर्मी के दीनों में प्यास ज्यादा लगती है, इस लिए संतरा रस की शरबत में शक़्कर मिलाकर पीना चाहिए।   

◼️ खिलाडी, मल्ल, इन्होने एक ग्लास ऱस में थोड़ा शहद मिलाकर पीना चाहिए, यह रस पिने से थकान दूर होती है। 

◼️ संतरा के फाक को छाव में सुकाना चाहिए उसके बाद उसका चूर्ण बनाकर के पानी के साथ पीना चाहिए।  



◼️संतरा का रस और शहद मिलाकर एक बॉटल में रख दो उसके बाद सुबह और शाम दो-दो बूंद आँखों में डालना चाहिए ऐसा करने पर आँखों की खाज आदी विकारों से छुटकारा मिलता है। 

◼️ संतरा के फाक खाने से या रस पिने से मलमल का त्रास कम होता है। 

◼️ संतरा के साल में मौजूद आम्ल का उपयोग करते आता है। चेहरे पर साल को घिसने से मुँहासे, डाग-धब्बे, काले-चिट्ठे, ख़रूज, इसब, नायते और त्वचा रोग आदि विकार कम होते है।  

◼️ संतरा के बी का लगदा बनाकर के उसका लेप चेहरे पर लगाने से मुँहासे गायब होते है। 
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