अनानास (कटहलसफारी) ज्यूस के लाभ / Benefits of pineapple


अनानास यह फल अमेरिका का है। पोर्तुगीज लोगों ने इसकी प्रजाति भारत में लाए। दक्षिण भारत में अनानास की खेती की जाती है।अनानास का पेड़ दो ते तीन फुट उचा रहता है। अनानास की पत्तिया हरी और केवड़ा के पेड़ के बराबर रहती है। अनानास की पत्ती के किनारे पर करवती जैसे काटे रहते है। पकी हुई अनानास अंदाजे 2 किलो की रहती है। अनानास के ज्यूस के साथ जीरा, नमक और सक्खर मिलाकर पीना चाहिए।


अनानास के नाम क्या है ? / What is the name of pineapple?


हिंदी में- अनानास, कटहलसफरी 

मराठी में - तुलसा और अननस 

इंग्रजी में - Pine Apple 

कटहल के प्रजाति का यह फल है। अनानास की फसल समुन्दर किनारे होती है। कोकण की गरम, नरम हवा अनानास को अच्छी होती है, इसलिए रत्नागिरी, कुलाबा इस जगह पर अनानास की खेती ज्यादा करते है। अनानास में ए, बी, सी जीवनसत्व रहता है। इसके साथ-साथ कैल्शियम, मैग्नेशियम, पोटाशियम, फ़ॉस्फ़रस, आयरन, गंधक और विभिन्न प्रकार के आम्ल(असिडस) रहते है। अनानास में पोटॅशिअम के अंश की मात्रा ज्यादा रहने के कारण सभी प्रकार के मूत्र सबंधी विकार के लिए यह उपयोगी है।


अनानास के औषधीय गुणधर्म / Medicinal properties of pineapple


➤ पका अनानास पाचनक्रिया के लिए फायदे मंद है। खाना खाने के बाद पका हुआ अनानास खाना बहुत ही अच्छा है। 

➤ कब्ज और भूक न लगना इसके लिए बहुत ही गुणकारी है। 

➤ शरीर की गर्मी कम होने के लिए, पेशाब ज्यादा होना चाहिए, पेशाब करते समय जलन होना इन को कम करने के लिए अनानास के ज्यूस में ग्लूकोज या इलेक्ट्रॉल मिलाकर पीना चाहिए।  

➤ पके हुए अनानास में 'पेप्सिन(पाचक रस) नामक तत्व रहता है। पका हुआ अनानास खाने से गले के विकार जैसे की, गला बसना, आवाज स्पस्ट निकलना इ. 

➤ मूत्र रोग, काविल, नेत्ररोग, टॉन्सिल्स इ. पर यह फल लाभदायक है। 

➤ अनानास का रस ख़रूज, खाज  को लगाने से कम होती है। 



➤ अनानास में बारीक़ रेषा रहते है यह पेट में जाने से कोई हानि नहीं होती है, यह अमरुद के फल की बीजा पेट में जाती है तो पेट साफ होता है ठीक उसी तरह अनानास के बारीक़ रेषा पेठ में जाकर पेठ साफ होता है। 

➤ अनानास का सरबद धूपकाले में पीना चाहिए शरीर के लिए फायदे मंद है। ह्रदय विकार के लिए फायदे मंद है। 

➤ किसी को मुतखडा(मलना) का दर्द है तो अनानास रस पिने से दूर हो जायेगा। 

➤ मुलव्याध के कोम्ब पर लगाने से दर्द कम होता है।  

➤ अनानास के फल को छीलकर के बारीक़-बारीक़ तुकडे करना चाहिए, उसके बाद बारीक़ कुटी हुई मिरि की पक्की और सेंधा नमक अनानास के रस के साथ पिने से पेट साफ होता है। 

➤ अपचन, उल्टी और जुलाब हुआ तो अनानास के सरबत के साथ काली मिरि का चूर्ण मिलाकर पीना चाहिए।    
➤ गला और गाल में सूजन आती है तो अनानास के रस से कुरला करना चाहिए।  

➤ मधुमेह(diabetes) जिस व्यक्ति को है उसने अनानास के 100 ग्राम रस में तिल, बेहड़ा, जंभुळ, आवला और गोखरू(काटेदार पौधे का एक प्रकार) इनका चूर्ण 10-10 ग्राम मिलाकर उसे सूखने के बाद सुबह-शाम एक-एक चमच सेवन करना चहिए।     

➤ धूम्रपान करने से दिल और फेफड़े पर ज्यादा परिणाम होता है, उस व्यक्ति ने अनानास खाना चाहिए और धूम्रपान कम करना चाहिए।  

➤ कच्चा अनानास खाने से मासिक धर्म नियमित रखता है इसके लिए अनानास का ऱस 10 ग्राम, पीपल की साल का चूर्ण एक ग्राम और गुळ एक ग्राम मिलाकर पीना चाहिए।  

➤कच्चा अनानास गर्भवती महिला ने खाना नहीं चाहिए। क्यों की गर्भ को हानि हो सकती है।

➤ पके अनानास के चकती काट के सक्खर के पाक में बहुत समय तक रख सकते है। कुछ समय तक उसका स्वाद लेते आता है। अनानास के पतियों से दोरखंड और कपडा बनाया जाता है। अनानास बहुगुणी फल है।

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