कुदरत का करिष्मा /Wonders of the nature

हमें अपने जीवन मे कुछ नया करने का अवसर मिलता है लेकिन हम उस अवसर को समज ही नहीं पाते है और छोड़ देते है, जब हमारे पास वक्त रहता है तभी हमारे पास अवसर बहुत आते है लेकिन उस अवसर को हम पहचान नहीं सकते। जब हमारे पास वक्त नहीं रहता तभी हम अवसर को  पहचानते है। इसलिय दोस्तों हमारे जीवन जो घटनाएँ घटित होती है, वे घटना क्यों घटित हुई, इस घटना का कारण क्या हो सकता है। उस घटना से समस्या से सामना करो, दोस्तों....... ,'' जिंदगी की यही रीत है, हार के बाद ही जित है। ''

sadhu ki story

ऐसे ही एक साधु की कहानी मै आपको बताने जा रहा हु , उस साधु को मौका, अवसर दिया जाता है लेकिन वो साधु अवसर को पहचान ही नहीं पता। सायद यह कहानी पढ़कर आपके जीवन में कुछ नया बदलाव हो और आपका जो कार्य चालू है व कार्य जल्द से जल्द सफल हो इसी शुभकामनाओं के साथ कहानी को पढ़िए......

कहानी / story 

एक  साधु जंगल में रहता था और साधु का विश्वास भगवान पर बहुत था और वे भगवान को प्रसन्न करने के लिए दिन रात तपश्या करने लगे। एक बार जंगल में बहुत जोर की बारिस हुई। बारिस के कारन गांव में बाढ़ आई और गांववाले अपने बचाव के लिए इधर-उधर सुरक्षित जगह पर जाने लगे।

गांव के बाजु में ही जंगल था उस जंगल में साधु तपस्या कर रहा था। गांव में पानी भी बढ़ रहा था। गांव में बाढ़ आई बाढ़ का पानी जंगल में जाने लगा। पानी रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। साधु अपने तपस्या में लीन था। बाढ़ को देख कर गांव वाले सुरक्षित जगह पर जाने लगे। कुछ लोग साधु के पास गए और कहने लगे की आप सुरक्षित जगह पर चलिए।

साधु को बचाने के लिए गांववाले जंगल में जाने लगे और साधु को कहने लगे की, महाराज पानी का स्तर पढ़ रहा है आप सुरक्षित जगह पर चलिए, '' तभी महाराज कहने लगे की ,'' आप लोग चले जाइए , '' मुझे बचाने के लिए मेरा भगवान आएगा मेरा भगवान पर पूरा विश्वास है। 


sadhu baba

साधु का विश्वास भगवान पर था, पानी धीरे-धीरे साधू के घुटनों तक आने लगा उस समय साधू को बचाने के लिए बचाव कर्मी की गाड़ी आई गाड़ी के एक अधिकारी ने साधू को गाड़ी में बैठने के लिए कहाँ लेकिन साधू ने मना किया, मुझे भगवान पर पूरा विश्वास है, भगवान मुझे बचाने आएगा आप लोगों की कोई जरूरत नहीं है।


sadhu baba

पानी का स्तर धीरे-धीरे बढ़ने लगा साधू अपने भगवान को याद करने लगा उतने में साधू को बचाने के लिए  जहाज लेकर बचावकर्मी आए और कहने लगे साधू महाराजजी अभी आप जहाज पर बैठ जाईए पानी का स्तर बढ़ रहा है। साधू महाराज कहने लगे, '' मेरे भगवान मुझे बचाने जरूर आयेंगे आप लोगों की कोई जरूरत नहीं है। आप चले जाइए और अन्य लोगों को बचाने का काम करों।



साधू महाराज ने बचावकर्मी की नहीं सुनी और उन्हें वापस भेज दिया। कुछ समय बाद पानी का स्तर ज्यादा ही बढ़ने लगा कुछ समय बाद बचावकर्मी हेलिकेप्टर लेकर आए और साधू महाराज को बचाने के लिए हेलीकैप्टर से सीढ़ियों से बचावकर्मी उतरे और साधू को बुलाने लगे लेकिन साधू हैलीकैप्टर में नहीं बैठे , साधू महाराज कहने लगे, मेरा भगवान मुझे बचाने आएगा आप लोग चले जाइए।


wonders of the nature

पानी का स्तर धीरे-धीरे बढ़ने लगा साधू पानी में डूब कर मर गया। मरने के बाद साधू स्वर्ग पहुंचे और भगवान से पूछने लगे, '' हे भगवान मैंने बहुत सालों तक आपकी साधना की लेकिन आप मुझे बचाने नहीं आये।



भगवान ने कहा, '' मैं तुम्हे बचाने के लिए एक बार नहीं तीन बार बचाने आया था। लेकिन आप मुझे पहचान नहीं सके। बचावकर्मी  के रूप में मै ही था। जहाज मैं ने ही भेजा था। हैलीकैप्टर मैंने ही भेजा था। गाड़ी मैंने ही भेजा था।

आप ने मुझे जब-जब याद किए तब-तब आपको बचाने के लिए मैंने आपकी मदद की लेकिन आप मेरी मदद को पहचान ही नहीं पाए।

कहानी का अर्थ / Meaning of story   

हमारे जीवन में भी कोई समस्या आती है लेकिन उस समस्या का निराकरण भी कुदरत करती है जब कुदरत पेड़ पर सोते हुए पंछी को गिरने नहीं देती तो हम इंसान है इंसान को भी कुदरत कैसे मार सकती है। कुदरत की शक्ति हमें बचाती है।अच्छा करने का मौका, अवसर भी कुदरत हमे देती है लेकिन हम उस मौके को पहचान ही नहीं पाते है। 


समस्या हमें जीवन जिने की कला बताती है। समस्या हमारे कर्म और विचार, सोच में बदलाव करने के लिए आती है। समस्या क्यों आई उसका निराकरण कैसे करना चाहिए इसके तरफ भी ध्यान देना चाहिए। हमने अपने जीवन में समस्या को संकेत समझकर पहचान लिया और वक्त के साथ अपने विचार और कर्म में परिवर्तन करते है, तो समस्या-समस्या नहीं रहती और एक शुभ अवसर बन जाती है। 

हमारे जीवन में जो समस्या , दुःख, दर्द आते है वे दुःख दर्द हमें मारने के लिए नहीं, बल्कि हमें चौकन्ना, सतर्क कुछ नया करने के लिए आते है।  

हम कुदरत के सकती को पहचान ही नहीं पाते है। हम अपने आहार, विचार, विहार, आचार, कर्म आदि के स्तर पर गलत प्रभाव में आगे है। 
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