क्रांतिकारी भगतसिंग गौरव गाथा | Revolutionary Bhagat Singh Gaurav Gaatha


स्वातंत्र्या संग्राम में भाग लेनेवाले अर्जुनसिंग इनके तिन्हों लड़के किशनसिंग, सरदार अजीतसिंग सरदार स्वर्णसिंह ऎसे स्वातंत्र्या संग्राम सैनानी के परिवार में सरदार किसनसिंग और विद्यावती देवी के यहाँ सरदार  भगतसिंग ने जन्म लिया। सरदार भगतसिंग का जन्म 28 सितंबर 1907 को बंगा, जिल्हा लालपुर (पाकिस्तान), सरदार भगतसींग जन्म के दिन  सरदार अजीतसिंह और सरदार किशनसिंग जैल से बरी हुए इसलिय यह लड़का भाग्यवान है यह समज कर उसका नाम '' भगतसिंग '' रखा गया।
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Revoutionary Bhagat singh Gourav Gaatha

भगतसिंग बचपन में क्रांतिवीरों की बुक पढ़ा करता था। कक्षा 9 में था तभी विदेशी कपड़े जलाया था। जलियाँवाला बाग हत्याकांड से भगत के मन में देशभक्ति की भावना जागृत हुई थी। क्रांतिकारक भगवतीचरण कॉलेज में भगत के दो कक्षा आगे था और सुखदेव भगत के साथ एक ही कक्षा में पढ़ते थे। स्वातंत्र सैनानी सावरकर का प्रसिद्ध ग्रंथ ' दी इंडियन वॉर ऑफ़ इंडिपेंडेंस -1857 भगत को मुखाग्र था। भगत के माता पिताने भगत की शादी तय की थी। लेकिन भगत घर छोड़ के चला गया था। देश की रक्षा करने के लिए मै अभी शादी नहीं कर सकता मुँझे माफ़ कर दीजिए ऎसा अपने माता-पिता से कहाँ।
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शहीद भगतसिंग का परिचय | Introduction to Shaheed Bhagat Singh     

  • नाम : सरदार भगतसिंग 
  • जन्म दि : 28 सितंबर 1907  
  • जन्म स्थल : बंगा, जिला - लालपुर( पाकिस्तान )
  • पिताजी का नाम : किशनसिंग 
  • माताजी का नाम : विद्यादेवी 
  • शिक्षण : एंटमीजिएट परीक्षा उत्तीर्ण ( इ.सा. 1923 )
लाला हरदयाल ने ''गदर पार्टी '' के माध्यम से आंदोलन किया तभी भगतसिंग की उम्र 7 साल की थी। कर्तारसिंग सराबा को फाशी हुई तभी उनकी उम्र 8 साल की थी। रशियन क्रांति के समय उनकी उम्र 10 साल की थी। यह सभी चित्र भगतसिंग ने अपने आँखों से देखे और उन्होंने उम्र के 13 वे साल में अपने गांव में संघटना निर्माण किया। उम्र के 14 वे साल में लाहौर के डी.ए.व्ही स्कुल से अपने दादाजी को पत्र लिखा। और पत्र के शब्द उलटे लिखे थे। वे शब्द ऎसे थे, '' रेलवे संप की तयारी चालू है। ''  उत्तर प्रदेश के चोरीचौरा में अहिंसात्मक मार्ग से सत्याग्र करनेवाले सत्याग्रही पर गोलीबार हुआ। उस समय भगतसिंग 9 कक्षा में थे। 

शहीद भगतसिंग के कार्य | Functions of Shaheed Bhagat Singh 

1924 में भगतसिंग कानपूर रवाना हुए और न्यूजपेपर बेचकर अपना काम करते थे। उसके बाद उनकी पहचान क्रांतिकारी '' गणेश शंकर विद्यार्थी के साथ हुई। उनके '' प्रताप न्यूजपेपर के कार्यालय में भगतसिंग को काम मिला। 

1925, भगतसिंग और उनके सहकारी क्रांतिकारियों ने '' नवजवाण भारत सभा '' की स्थापना किए।  

दशहरे के दिन गांव में प्रभात फेरी निकली थी और प्रभात फेरी में कुछ लोगो ने बॉम्ब डाला था। इस बॉम्ब स्फोट में प्राणहानि हुई थी। बॉम्ब स्फोट के पीछे क्रांतिकारीयों का हाथ है ऎसी पुलिस की संका थी इसलिए भगतसिंग को पुलिस ने हिरासत में लिया लेकिन उनका गुन्हा कुछ भी नहीं था पुलिस ने उन्हें निर्दोष मुक्त किया।  



' हिन्दुस्थान रिपब्लिकन असोसिएशन ' इस संघटना के क्रियात्मक कार्यकर्ता थे।   
'कीर्ति' और 'अकाली ' न्यूजपेपर के लिए भगतसिंग लेख लिखते थे। 
समाजवादी विचारसरणी से प्रभावित हुये भगतसिंग, राजगुरु, सुखदेव, चंद्रशेखर आझाद आदि नौजवानों ने ' क्रांन्तिकारी संघटना ' स्थापना किये। यह सभी क्रांन्तिकारी धर्मनिरपेक्ष विचारसरणी के थे।  1938, दिल्ली फिरोजशाह कोटला मैदान के बैठक में ' हिदुस्थान सोशेलिस्ट रिपब्लिकन असोसिएशन ' संघना की स्थापना की। इस संघटना का उददेश भारत को ब्रिटिश सरकार के जुल्म से मुक्त करना था। संघटना के नाम में ' सोशेलिस्ट ' शब्द रखने का प्रस्ताव भगतसिंग ने रखा था और सभी ने प्रस्ताव को मंजूरी दी। हथियार इक्कठा करने का काम इस संस्था के स्वतंत्रा विभाग के तरफ था। इस विभाग का नाम ' हिन्दुस्थान सोशेलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी ' था। इस संघटना के प्रमुख चंद्रशेखर आझाद थे।        

 1927, भारत में कुछ सुधारना करने के उद्देश से ब्रिटिश सरकार ने '' सायमन कमीशन '' स्थापन की लेकिन इस सायमन कमीशन के 7 सदस्य इंग्रज ही थे, भारतीय नहीं थे, इसलिए भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस ने सायमन कमीशन का ' बहिष्कार ' किया। सायमन कमीशन लाहौर को आये तभी पंजाब केशरी लाला लजपतराय के नेतृत्व में निषेध करने के लिए जुलुस निकाला गया। ज्युलुस पर पुलिस ने हमला किया इस हमले में लाला लजपतराय बहुत जख्मी हुए और कुछ ही दिनों में लाला लाजपतराय का देहांत हुआ। 

लालाजी के देहांत के बाद '' हिन्दुस्थातन सोशालिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन '' ने लाला लजपतराय के मृत्यु का बदला लेने का फैसला लिया। लालाजी की मृत्यु '' स्कॉट '' ब्रिटिश अधिकारी के कारण हुई थी इसलिए उसे मारने की योजना बना रहते थे। इस योजना में भगतसिंग, राजगुरु , सुखदेव और चंद्रशेखर आझाद आदि क्रांतिकारी थे। 17 दिसंबर 1928 को स्कॉट को मारने की योजना बनाये और स्कॉट के बदले में सॉन्डर्स इंग्रज अधिकारी का खून हुआ।     
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इस घटना के बाद भगतसिंग भेस बदल कर कलकत्ता चले गए। कलकत्ता में उनकी मुलाखत जतीन्द्रनाथ दास से हुई। जतीन्द्रनाथ को बॉम्ब बनाते आता था। भगतसिंग और जतीन्द्रनाथ ने बॉम्ब बनाने का करखाना आग्रा में चालू किया था।    

इंग्रज सरकार ने ' ट्रेड डिस्पयूट बिल ' और ' पब्लिक सेफ्टी बिल ' यह दो विधेयक क़ायदेमंडल में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया। इस विधयेक का हिंदुस्थान सोशेलिश्ट रिपब्लिकन असोसिएशन ने क्रांतिकारी मार्ग से निषेध किया। विधयेक की चर्चा क़ायदेमंडल में चालू ही थी उसी समय सरदार भगतसिंग और बटुकेशर दत्त ने सभागृह में बॉम्बस्फोट किया सभी लोग भाग गए किसीको कोई नुकसान नहीं हुआ और सरदार भगतसिंग और बटुकेश्वर दत्त दोनों ही सभागृह में रुके थे। ' इन्कलाब जिंदाबाद ' और  ' भारतमाता की जय ' बोलते हुए , हसते हुए पुलिस के हवाले हुए। खटला 

जैल में भगतसिंग और क्रांतिकारियों पर ब्रिटिश सरकारन ने गुन्हा दाखल किया। प्रथम केस में क़ायदेमंडल  सभागृह में बॉम्बफेक का गुन्हा दाखल किया गया। इस केस में भगतसिंग और बटुकेश्वर दत्त को आजन्म कारावस की सजा हुई। लेकिन सैंडर्स के खून के आरोप में भगतसिंग, सुखदेव और राजगुर को फाशी की सजा सुनाई गई। 

भगतसिंग, सुखदेव और राजगुरु फासी | Bhagat Singh, Sukhdev and Rajguru hanging

23 मार्च 1931 को भगतसिंग, सुखदेव और राजगुरु तीनों महान क्रांतिकारियों को फांसी हुई। '' इन्कलाब जिंदाबाद '' कहते हुए हसते-हसते फांसी का फंदा गले में डाले। 
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