क्रांतिवीर उमाजी नाईक | Krantiveer Umaji Naik


भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ब्रिटिश सरकार के प्रति आंदोलन करनेवाले अंग्रजों को 16 साल तक नाक में दम करनेवाले भारत से अंग्रेजों को भगाने का सपना दिखानेवाले महाराष्ट्र के महान क्रांतिकारी '' उमाजी नाईक '' की गौरव गाथा लेख के माध्यम से अवश्य पढ़े ..... 

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Krantiveer Umaji Naik

क्रांतिवीर उमाजी नाईक का परिचय | Introduction to Umaji Naik

नाम : उमाजी नाईक 
जन्म दिनांक : 7 सितंबर 1791 
जन्म स्थल : भिवंडी, (तालुका पुरंदर), पुणे 
पिताजी का नाम : दादाजी खोमणे 
माताजी का नाम : लक्ष्मीबाई
फाशी : 03 फरवरी 1832, पुणे 

क्रांतिवीर उमाजी नाईक का जन्म पुणे जिले के भिवंडी गांव में 07 सितंबर 1791 में हुआ। उमाजी का नाम : उमाजी दादाजी खोमणे था और उनका बचपन पुरंदर किले के परिसर में गया। उमाजी को उनके माताजी ने तलवार चलाना, घुड़सवारी, भाला चलाना, दांडपट्टा आदि डावपेच सिखाये।

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नाईक की उपादि कैसे मिली  ? | How did the title of the hero get ?

उमाजी के परिवार पर पुरंदर किले की सरंक्षण करने की जबाबदारी थी। इसलिए उमाजी की माताजी शिवाजी महाराज की कहानियाँ बताती थी। शिवाजी महाराज की कहानियाँ सुनके उनके मन में क्रांति की भावना जागृत हुई। 

उमाजी बहुत ही हुशार लड़का था। उसने परंपरागत रामोशी हेर कला बहुत ही जल्द सिख लिया। अंग्रेज सरकार ने अपनी सत्ता स्थापित करना चालू किया। धीरे धीरे अंग्रेज सरकार ने मराठों का मुल्ख अपने कब्जे में किया और पुणे शहर को भी अपने स्वाधीन किया। 

1803 में अंग्रेज सरकार ने दूसरे बाजीराव को अपने नियमों से चलने को बताया। बाजीराव दूसरा इंग्रज सरकार के नियमों से काम करने लगा। सबसे पहले सभी किले की तरह पुरंदर किले के सरंक्षण की जबाबदारी रामोशी समाज से निकालकर इंग्रज सरकार ने अपने पहचान के लोगों को दी। इस कारण रामोशी समाज पर भूखे रहने की समस्या निर्माण हुई। अंग्रेज सरकार का अत्याचार बढ़ने लगा अंग्रेज सरकार का अत्याचार उमाजी अपने  आँखों से देख रहे थे।

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समाज सेवा | Social service

उमाजी नाईक के आदर्श शिवाजी महाराज थे उन्होंने विठूजी नाईक, कृष्ण नाईक, खुशाबा रामोशी और बाबु सोलसकर आदि क्रान्तिकारियों के साथ जेजुरी के खंडोबराय को भंडारा देकर अंग्रेज सरकार के विरुद्ध विद्रोह की घोषणा की। उमाजी नाईक ने इंग्रज, सावकर और बड़े वतनदार को लूटकर गरीब जनता की सेवा करने लगे। इंग्रज सकरकर ने 1818 में शनिवारवाडे पर युनियन जॅक फहराया। कम्पनी के जुल्मी अत्याचार को देखते हुए उमाजी नाईक ने पुरंदर में सैनिक को इकट्ठा करके विद्रोह की तैयारी करने लगे।




 देशभक्ति | Patriotism

अंग्रेजों को भगाने के लिए उमाजी नाईक प्रयत्न करने लगे अंग्रेज सरकार उमाजी से त्रस्त होने लगे इसलिए  अंग्रेज सरकार ने 1818 में उमाजी को अटक किया और एक साल की जैल हुई। जैल में उन्होंने पढ़ना लिखना सिखा जैल से छूटने के बाद अंग्रेजों के खिलाफ अपने क्रांतिकारियों के साथ अंग्रेजों को भगाने की योजना बनाने लगे। देश के लिए लड़ने लगे जनता भी उनका साथ देती थी।

उमाजी को गिरफ्तार करने के लिए आये हुए इंग्रज अधिकारी मोकीन टॉस ने सासवड पुरंदर के मामलेदार को फर्मान निकालने को कहाँ। मामलेदार अंग्रेज सैनिकों के साथ उमाजी को गिरफ्तार करने के लिए गए लेकिन दोनों में बहुत ही जोरदार युद्ध हुआ उमाजी ने 5 इंग्रज सैनिकों की मुंडी काटकर मामलेदार के तरफ भेजा। अंग्रेज सरकार के मन में दहशद निर्माण हुई। उमाजी के सैनिक पर्वतों में रहते थे उनके पास 5000 /- पांच हजार सैनिक थे।

सन 1824 को बाबुट्री का खजिना लूट के मंदिरों की देखरख के लिए जनता में बाट दिया था। 30 नोहंबर 1827 को अंग्रेजों को बताया की, '' हजारों विद्रोह होते रहेंगे सतपुड़ा से लेकर सह्याद्रि तक, अंग्रेजजो आपको भारत से एक दिन भागना पड़ेगा। ''

21 दिसंबर 1830 को इंग्रज अधिकारी बाइंड और उनके सैनिकों को मांढरदेवी किले से बन्दुक चलाकर अंग्रेज सैनिक को भागना पड़ा।

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ऐलान नामा | Elan nama

16 फरवरी 1831 को इंग्रज सरकार के लिए उमाजी ने एक ऐलान नामा निकाला उसमे लिखा था की, '' लोगों ने अंग्रेज सरकार की नौकरिया छोड़ना चाहिए, देशवाशियों ने एकसाथ इकट्ठा होकर अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करना चाहिए। इंग्रजों का खजिना लूटना चाहिए, शेतसारा नहीं देना चाहिए, ब्रिटिश की सत्ता नष्ट होनेवाली है उनकी मदद नहीं करनी चाहिए।'' उमाजी छत्रपति शिवाजी महाराज की तरह कार्य करने लगे, लोग उमाजी को राजा कहने लगे। उमाजी का डर अंग्रेज सरकार को लगने लगा अंग्रेज सरकार ने उमाजी को पकड़ने के लिए साजिश बनाने लगे।


अंग्रेज सरकार की साजिश | Conspiracy of the British Government

उमाजी नाईक का पता बताने के लिए, ब्रिटिश सरकार ने उमाजी नाईक को गिरफ्तार करने के लिए 10,000 /-  रु रक्क्म और चारसे बिघा भूमि इनाम रखा। जमीन  सावकार, वतनदार आदि को प्रलोभन दिखाकर उमाजी के सैनिकों को फितूर किया गया। काळाेजी नाईक और नाना चव्हाण दोनों लोगोने उमाजी नाईक की गुप्त जानकारी अंग्रेज सरकार को दी।

15 दिसंबर 1831 को भोर तालुका के उतरोली गांव में उमाजी को अंग्रेज सरकार ने पकड़ा। पुना के मामलेदार कचेरी के एक खोली में रखा गया। मोकिन टॉस उमाजी नाईक की प्रतिदिन जानकारी लेता था। उमाजी पर देशद्रोह का खटला चलाया गया। न्यायधीश जेम्स टेलर ने फांसी की सजा सुनाई।


फांसी | Hanging

03 फरवरी 1832 को पुणे के खटकमल आली के मामलेदार कचेरी में उमाजी नाईक को फांसी दी गई। अंग्रेजों ने उमाजी नाईक की लाश को पेड़ से लटकाकर रखी थी क्यों की क्रांतिकारियों के मन में दहशद निर्माण हो और कंपनी सरकार के विरुद्ध कोई भी क्रांतिकारी विद्रोह ना कर सके।


उमाजी नाईक के प्रति निकले हुए शब्द    

'' मरावे परी कीर्ति रुपे उरावे '' इस मनी के नुसार इंग्रज अधिकारी मॉकिन टॉस कहता है, '' उमाजी का आदर्श छत्रपति शिवाजी महाराज था उसे फांसी नहीं दी जाती तो, दूसरा शिवाजी निर्माण हुआ रहता यह सत्य है। अगर साजिश करके अंग्रेजों ने गिरफ्तार नहीं किये होते तो, सायद भारत स्वतंत्र हुआ रहता। ''   


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