क्रांतिरत्न वासुदेव बलवंत फड़के | Kranti Ratna Vasudev Balwant Phadke


वासुदेव बलवंत फड़के स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिरत्न थे। भारतीय किसानों की अवस्था देख के ब्रिटिश सरकार के प्रति विद्रोह की भावना निर्माण हुई। जिनका नाम लेते ही युवकों में राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत होती थी। बंकिमचंद्र चटर्जी को '' वन्देमातरम '' गीत की स्फूर्ति वासुदेव फड़के से मिली। इस लेख के माध्यम से क्रांतिरत्न वासुदेव बलवंत फड़के की गौरव गाथा प्रस्तुत करने जा रहे है , ......   

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Kranti ratna vasudev balwant phadke

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वासुदेव बलवंत फड़के का परिचय | Introducing Vasudev Balwant Phadke

नाम : वासुदेव फड़के 
जन्म दिनांक : 04 नवंबर 1845 
जन्म स्थल : शिरढोण 
पिताजी का नाम : बलवंतराव फड़के 
माताजी का नाम : सरस्वती 

फड़के परिवार रत्नागिरी जिले के कुरघे गांव के है लेकिन उनके पुर्वोजोने तीनशे वर्ष पहले ही देशांतर करके कर्नाला किले के शिरढोर गांव में स्थलांतर हुए । शिरढोर के पावन भूमि पर ब्राम्हण अत्रि गोत्रीय घराने में 04 नवंबर 1845 ( कार्तिक शुद्ध 5, शके 1767 ) को  वासुदेव फड़के का जन्म हुआ। 

पारिवारिक जीवन की जानकारी | Family life information


वासुदेव की पढ़ाई कल्याण, मुंबई और पुणे में हुई। उनका विवाह दाजीबा सोमन की लड़की सई के साथ हुआ। उन्हें एक लड़का और एक लड़की थी। लड़का छोटा था तभी मृत्यु हुई। पुणे के ' कॉमिसारियट ऑफिस ' में नोकरी करता था उनके माताजी की तबियत ख़राब रहती थी एक दिन उनके माताजी की तबियत ख़राब हुई घर जाने के लिए सुट्टी माँगने लगा लेकिन उन्हें सुट्टी नहीं मिली जब सुट्टी मिली तो माताजी का अंतिम दर्शन भी नहीं हुआ। वासुदेव के माताजी के वर्षश्राद्ध के समय भी उन्हें सुट्टी नहीं मिली। अन्यायकारक व्यवहार के करण स्वाभिमानी वासुदेव को अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की भावना जागृत हुई। 

पुणे में सार्वजनिक काका के सार्वजनिक सभा में माधवराव रानडे के स्वदेशी व्यापर पर भाषण दिए इस भाषण से विद्रोह की भावना ज्यादा ही जागृत हुई। उन्होने विदेशी वस्तु पर बहिष्कार डाला इसमें उसकी पत्नी सईबाई का निधन हुआ। वासुदेव का दूसरा विवाह पडघवलि के काशीनाथशास्त्री कुंटे की लड़की गोनडुबाई से हुआ। यही वीरपत्नी गोपिकाबाई अथवा बाई फड़के है। 



जन जागृति | Public awareness

वासुदेव ने अपने साथियों के मदद से ' पूना नेटिव्ह इन्स्टिट्यूशन ' नाम की शिक्षण संस्था स्थापन किया। आगे भावे स्कुल नाम की स्कुल चालू हुई। जनजागृति के लिए वासुदेव ने सभी जगह पर जाकर के और दूर के गांव में भी व्याख्यान दिया। इंग्रज सरकार हमारे राष्ट्र पर जुल्म, अत्याचार कर रहे है। उनका व्याख्यान युवाओं के लिए स्फुर्तिदायक रहता था।


सशस्त्र विद्रोह | Armed uprising

मल्हारराव गायकवाड़ को इंग्रजों ने सिंहासन से निचे उतारा, 1876 के अकाल से प्राणहानि हुई। अकालग्रस्त जनता को आधा शेर धान दिया जाता था। अंग्रेज सरकार का अत्याचार बढ़ता ही जा रहा था। अंग्रेज सरकार का अत्याचार देखते हुए सशस्त्र विद्रोह करने की भावना जागृत हुई। वासुदेव ने अशिक्षित स्वाभिमानी रामोशी जनता को इकट्ठा किया। कोली और भिल्ल को भी अपने साथ लिया। शस्त्र शिक्षण में उनके दो शिष्य थे एक उनकी पत्नी बाई फटके और लोकमान्य तिलक।

 वासुदेव फड़के के आदर्श छत्रपति शिवाजी महाराज थे। उनके कमरे में शिवाजी महाराज की फोटो रहती थी। 1879 में वासुदेव ने अपने सैनिक इकट्ठा किये। युद्ध सामग्री के लिए धनिक लोगों से मदद मांगने लगे और कहने लगे '' स्वराज्य मिलने के बाद आपका पैसा दिया जायेगा '' ऎसा कहने लगे लेकिन किसीने भी मदद नहीं की इसलिए धनिक लोगों पर छापे मारने लगे। रशिया और आयर्लंड के क्रांतिकारियों ने भी धनिक लोगों को लूट के युद्ध सामुग्री के लिए पैसा इक्कट्ठा किये।

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प्रथम लूट धमारी गांव में किये वासुदेव के साथ दौलतराव नाईक, गोपाल मोरेश्वर साठे और विष्णुपंत गद्रे आदि क्रांतिकारी एक साथ रहते थे। धनिक लोगों की लूट करने लगे अंग्रेज अधिकारी मेजर डॅनियल का सक वासुदेव फड़के पर गया। क्रांतिकारियों के डर से मुंबई गव्हर्नर की सुरक्षा करने लगे। वासुदेव फड़के को पकड़नेवाले को चार हजार रु (4,000) का इनाम दिया जायेगा। वासुदेव फड़के ने भी गव्हर्नर और कलेक्टर की मुंडिया काटनेवालों के लिए बहुत बड़ा इनाम रखा। 

पुणे के बुधवारवाड़ा और विश्रामबागवाड़ा को जला दिया गया। आग किसने लगाई किसी को कुछ भी पता नहीं चला लेकिन कुछ लोगों का वासुदेव ने आग लगाई ऎसा समज हुआ लेकिन वासुदेव उस समय पठान को नोकरी में रख कर और अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करने की योजना में लगे थे। दौलतराव नाईक एक चकमक में मारे गए। दूसरा क्रांतिकारी विश्वासराव डावरे को अंग्रेज सरकार ने जलाकर मार डाला। 

मेजर डॅनियल ने वासुदेव फड़के का पीछा करना चालू किया वासुदेव को पैसा इकट्ठा करना मुश्किल हुआ। रामोशी लोगों की संघटना दौलतराव का मृत्यु होने के कारण नहीं बनी। 


क्रांतिरत्न वासुदेव फड़के मृत्यु |  Krantiratna Vasudev Phadke death

वासुदेव गाणगापुर में आये वहा पर गोगटया के पत्नी के कारण अंग्रेजों के हाथ लगे और उन्हें पुणे में लाया गया। उनपर खटला चलाया गया उनके वकील गणेश वासुदेव जोशी उर्फ़ सार्वजनिक काका थे। वासुदेव को आजीवन कारावास की सजा हुई। उन्हें एडन के जेल में रखा गया। वे 12 सितंबर 1880 को फरार हुए लेकिन अंग्रेज सरकार ने पुन्हा गिरफ्तार किया। उन्हें दर्द दिया जाता था दर्द के कारण ही वे 17 फरवरी 1883 को शाम के समय 4.20 को अपना नश्वर शरीर छोड़कर चले गए। 

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