'' मिसाईल मैन '' की जीवनी | Biography of "Missile Man"


डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम एक आम आदमी से एक विशेष व्यक्ति कैसे बने ?  भारत के राष्ट्रपति पद तक कैसे पहुंचे ? स्कुल के समय के पहले 10 बजे तक न्यूजपेपर घर-घर पहुँचानेवाले कैसे बने देश के राष्ट्रपति ?

महान वैज्ञानिक गिओर्डेनो ब्रुनो 
महान वैज्ञानिक '' निकोलस कोपर्निकस ''


 '' मिसाईल मैन '' की जीवनी | Biography of "Missile Man"

वायुगति के जनक '' डॉ.सतीश धवन ''
महान वैज्ञानिक डॉ.हरीषचंद्र

डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम का पारिवारिक जीवन | Family life of  Dr. A . P. J. Abdul Kalam

डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम का पूरा नाम : डॉ.अब्दुल फकीर जैनुलबदिन अब्दुल कलाम था। लेकिन उनके नाम में कर्तत्व का रहस्य है। डॉ.कलाम का जन्म 15 अक्टुंबर 1931 को तमिलनाडु राज्य के रामेश्वरम शहर में हुआ। उनके पिताजी मच्छी का कारोबार करते थे और साथ में नाव तैयार करके मच्छवारों को किराये पर देते थे। इस कारोबार से जो भी कमाई होती थी उसे कलाम के पढ़ाई के लिए खर्चा करते थे। अब्दुल कलाम अपने पढ़ाई का खर्चा पूरा करने के लिए समाचार पत्र बाटकर स्कुल जाते थे। 

डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम का अध्यन | Study of Dr. A. P.J. Abdul Kalam  

 डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम ने त्रिची के '' सेंट जोसेफ '' महाविद्याय में पदार्थ विज्ञान, रसायनशास्त्र और गणित आदि विषयों से बी.एस्सी की पदवी सम्पादित की। चेन्नई के तकनीकी संस्था में प्रवेश पाने के लिए चुने गए। लेकिन प्रवेश पाने के लिए, पिताजी के पास पैसे नहीं थे। लेकिन अब्दुल कलाम की बहन ' जोहरा ' ने अपने आभूषणों को गिरवी रखी और अब्दुल को प्रवेश पाने के लिए पैसे दीए। उसके बहन की इच्छा थी की अब्दुल पड-लिख के अच्छा आदमी बने। सन 1957 में डॉ.कलाम ने चेन्नई के तकनिकी संस्था से विमानशास्त्र (Aeronautical Engineering) की तकनिकी डिग्री संपादित की। सन 1958 को रक्षा अनुसंधान और विकास  संघटना में प्रवेश लिया। सन 1963 में डॉ.कलाम ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्था (Indian Space Research Organisation) में प्रवेश लिया।   


डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम के कार्य | Functions of Dr. A.P.J.Abdul Kalam

हिंदुस्थान एरोनॉटिक्स लिमिटेड से डिग्री संपादित करके डॉ.कलाम के आगे दो रास्ते थे। पहला रास्ता भारतीय हवाई दल में सामिल होना और दूसरा रास्ता रक्षा मंत्रालय के तकनीकी विकास और उत्पाद संचानालय में सेवा करना आदि दोनों पद के लिए मुलाखत के लिए बुलाया गया। रक्षा मंत्रालय के अनुसंधान विभाग का पहली बार दिल्ली में साक्षात्कार था उसमे अब्दुल कलाम का चयन हुआ। उसके बाद उन्होंने हवाईदल देहरादून में साक्षात्कार दी लेकिन उनका चयन नहीं हुआ। वे नाराज हुए और देहरादून से ऋषिकेश तक पन्नास किलो मीटर अंतर पैदल चलते हुए आये। ऋषिकेश में उन्होंने गंगा नदी में स्नान किये। उसके बाद वे शिवानंद स्वामी से मिले स्वामी शिवानंद ने अब्दुल कलाम से कहा की , '' तेरा जन्म भारतीय हवाई दल का वैमानिक बनने के लिए नहीं हुआ है, तुझे क्या बनना है यह अभी तय नहीं हुआ है लेकिन यह सबसे पहले ही तय हुवा है, नाकामयाबी को भूल जा तुझे अच्छे रास्ते पर जाने के लिए नाकामयाबी जरुरी थी। '' इस उपदेश से कलाम दिल्ली चले गये और रक्षा मंत्रालय अनुसंधान विभाग में वरिष्ठ वैज्ञानिक सहाय्यक का कार्यभार स्वीकार किया। पदार्थ विज्ञान यह  कलाम का पसंदीदा विषय था।

डॉ.अब्दुल कलाम ने सन 1963 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्था में प्रवेश लेने के बाद रोहिणी-1 इस उपग्रह को स्वदेशी लॉन्च वाहन द्वारा अंतरिक्ष में प्रसारित करने का कार्य पूरा कर लिया था।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्था में उन्हों ने एस.एल.व्ही 3 के परियोजना में परियोजना की डिझाइन से लेकर उड़ान तक का कार्य बहुत ही बेहतरीन तरिके से पूरा करके भारतियों को आश्चर्य चकित किये।

डॉ.अब्दुल कलाम ने इस्त्रो में 19 साल काम करने के बाद सन 1982 में डॉ.कलाम डी.आर.डी.ओ. में वापस आये और स्वदेशी मिसाईल निर्माण और विकास कार्यक्रम में मग्न हुए। इस कार्यक्रम के अंतर्गत डॉ.कलाम ने पृथ्वी, अग्नि, आकाश, नाग और त्रिशूल आदि मिसाईल निर्माण किये।

डॉ.अब्दुल कलाम ने मिसाईल निर्माण के परियोजना में डॉ.विक्रम साराभाई, डॉ.सतीश धवन आदि का मार्गदर्शन था। डॉ.अब्दुल कलाम के कार्य बरगद के पेड़ की तरह फैले थे।

भारत के लिए खुद की प्रतिभा अर्पण करनेवाले महान वैज्ञानिक की सन 1992 में रक्षा मंत्रालय में वैज्ञानिक सल्लागार के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति हुई।

सन 1999 में प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी के प्रमुख सल्लागार के पद पर डॉ.अब्दुल कलाम की नियुक्ति की गई थी। डॉ.कलाम ने सन 2001 में अपने पद का राजीनामा दिया और स्कुल, महाविद्यालय में पढ़नेवाले छात्र विज्ञान शाखा में प्रवेश नहीं लेते इस बात की चिंता अब्दुल कलाम को थी। इसलिए उन्हों ने स्कुल में छात्रों को मिलने के लिए अभियान चालू किया।

आय झैक न्यूटन की जीवनी 
अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा 
अंतरिक्ष यात्री '' कल्पना चावला ''



डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम की खास बातें | The salient features of Dr. APJ Abdul Kalam

डॉ.कलाम कहते है, '' सन 1973 में मै भारत की सैटेलाइट लॉन्चर परियोजना का ऑपरेटर बना। हमारे आगे लक्ष्य था की भारत का रोहिणी सैटेलाइट 1980 तक अंतरिक्ष कक्षा में जाना चाहिए और मुझे बताया गया था की परियोजना का काम 1980 तक पूरा होना चाहिए इस परियोजना के लिए वैज्ञानिक और हजारो कि संख्या में तकीनीकी टीम तैयार की गई सन 1971 में लगा की परियोजना का काम पूरा हुआ मैं परियोजना ऑपरेटर के नाते सैटेलाइट लॉन्चर परियोजना नियंत्रण केंद्र पहुँचा। सैटेलाइट लॉन्च करने के लिए चार मिनट बचे थे उस समय सैटेलाइट की जाँच करना कम्प्यूटर ने चालू किया। एक मिनट में कम्प्यूटर ने सैटेलाइट लॉन्च कार्यक्रम रोख दिया। स्क्रीन पर मेसेज आया की कुछ नियंत्रण घटक बराबर नहीं है लेकिन कुछ तंज्ञ वैज्ञानिकों ने बताया की घबराने की जरूरत नहीं उसमें अंक नजर आये और इंधन पर्याप्त है इस बात से मैंने कम्प्यूटर का मेसेज नजर अंदाज किया और लॉन्च की बटन दबाया और अग्निबाण प्रज्वलित किया प्रथम टप्पे में सभी अच्छा ही था लेकिन दूसरे टप्पे में समस्या निर्माण हुई और सैटेलाइट अंतरिक्ष में जाने के बजाय बंगाल के खाड़ी में गिरा।

यह एक बड़ी विफलता थी उस दिन, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्था (इस्त्रो) के अध्यक्ष प्रा.सतीश धवन ने पत्रपरिषद बुलाया सैटेलाइट का लॉन्च 7 बजे था और देश-विदेश के पत्रकार आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा के अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र में 7 बजकर 45 मिनट को उपस्थित हुए इस्त्रो के प्रमुख डॉ.सतीश धवन ने पत्रपरिषद लिया उसने इस विफलता की जबाबदारी खुद पर ली और कहने लगे की, ' हमारे टीम ने बहुत मेहनत ली लेकिन, उसके पहले तकनिकी आधार की जरूरत है और आनेवाले साल में हमारी टीम सफल होगी यह विश्वास मिडिया को दिया। 

डॉ.कलाम कहते है, '' मैं परियोजना का ऑपरेटर था और यह विफलता मेरी थी, लेकिन संस्था प्रमुख के नाते प्रा.धवन ने विफलता की जबाबदारी अपने सर पर लिए थे और जुलाई 1980 में सैटलाइट लॉन्च परियोजना सफल हुई। पत्रपरिषद बुलाई गयी प्रा.धवन ने मुझे बुलाया और बोले की , '' आज के दिन की पत्रपरिषद आपको लेना है ?

उस दिन मैं एक बात शिका जब विफलता आती है तो जबाबदारी संस्था प्रमुख ने लेना चाहिए और सफलता आती है तो उसका श्रेय अपने टीम को देना चाहिए। 


पुरस्कार | Award    

अपने चार दशक के सेवा कल में अनेक पुरस्कार लिए 
  • सन 1997 '' भारतरत्न ''
  • पद्ममभूषण   
  • पद्मविभूषण  
  • टेक्नीकल अवार्ड
'' मिसाईल मैन '' 12 वे राष्ट्रपति बने और भारत देश के सर्वोच्च आसन पर विराजमान हुए। भारत देश को डॉ.कलाम पर गर्व है । 

 यह भी जरूर पढ़े
             
Share on Google Plus

About Blog Admin

He is CEO and Faunder of www.pravingyan.com He writes on this blog about Tech, Poems, Love story, General knowledge, Earn money, Helth tips, Great lord and motivational stories. He do share on this blog regularly.