दयालु बुढ़िया | Kind old woman


नमस्ते दोस्तों, आपका www.pravingyan.com में स्वागत है। मेरा नाम मालता है, मैं pravingyan के लिए Article लिखती हूँ। आज मैं, एक नन्ही सी लड़की और दयालु बुढ़िया की कहानी बताने जा रही हूँ। एक बुढ़िया नन्ही सी लड़की की मदद करके उसका मन जित लेती है। यह इस कहानी के माध्यम से आपको बताना चाहती हूँ। 

मल्ली नाम की एक छोटीसी लड़की अपने माता-पिता के साथ रहती थी। उसके पिता अपने बेटी से बहुत प्यार करते थे। लेकिन मल्ली की माँ सौतेली थी। उसका व्यवहार अक्सर मल्ली के प्रति ख़राब रहता था। मल्ली बहुत ही अच्छी तरह से और ध्यानपूर्वक घर का पूरा काम करती थी क्यों की उसकी माँ खुश होना चाहिए लेकिन माँ खुश होने की, बजाय नाराज होती थी।



दयालु बुढ़िया | Kind old woman

एक दिन मल्ली बहुत उदास थी। उसके साथ सब कुछ उल्टा ही उल्टा हो रहा था। उसकी माँ ने उसे रोटी बनाने को कहा। मल्ली रोटी बनाने लगी उतने में आवाज सुनाई आया और मल्ली आगे की और गई लेकिन उसकी रोटी जल गई। उसकी माँ ने उसे दूध की कटोरी को मेज पर रखने को कहा जैसे ही वह अंदर गई बहार से एक बिल्ली आकर दूध पी गई। वह दूध को देखती तभी एक कुत्ता आया और मेज पर रखी रोटी को उठाकर भाग गया। मल्ली को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि, उसके साथ ऎसा क्यों हो रहा है ? वह समझ गई की आज माँ की डाट पड़ेगी। मल्ली को डाट पड़ी और उसके माँ ने घर से निकाल दिया और मल्ली को कहा की जब तक तू पकी चेरी लेकर नहीं आएगी तब तक तुझे घर में कदम नहीं रखने दूंगी।

मल्ली रोने लगी और घर से बहार जाने लगी उसे पता था की अभी चेरी का मौसम नहीं है और अभी पकी हुई चेरी मिलना मुश्किल है। लेकिन उसके पास कोई उपाय नहीं था। वह जंगल की तरफ जाने लगी और जब तक चलती रही की उसे कोई घर ना दिखे। मल्ली घर से बहुत दूर चली गई उसे जंगल में कुछ समझ में नहीं आ रहा था। वह पूरी तरह से रास्ता भटक गई उसे डर लगने लगा वे रोने लगी।

मल्ली को बहुत जोर से प्यास लगी थी। प्यास बुझाने के लिए जंगल में इधर-उधर देखने लगी कुछ दुरी पर एक कुआँ दिखाई दिया। उसने कुवे से एक बकेट पानी निकाला और पिने लगी। मल्ली को एक आवाज सुनाई आया। सुनो बेटी, क्या तुम मेरा मटका भर देंगी।




मल्ली जंलग में इधर-उधर देखने लगी वे घबरा गई और कुछ ही दुरी पर उसे एक बुढ़ी बिमार बुढ़िया दिखाई दी। बुढ़िया के हाथ में एक मटका था। मल्ली ने उसे कहा, '' मोतरमा , मुझे अपना मटका दीजिये मैं इसे अभी भर देती हु। मल्ली ने उसका मटका भर दिया और दोनों घर की तरफ जाने लगे। घर पहुँचने के बाद बुढ़िया ने उसे एक बैग दिया और कहने लगी, '' मैं बहुत गरीब हूँ। मेरे पास तुम्हे देने के लिए कुछ भी नहीं है। इसमें कुछ चीजे है जो तेरे काम आ सकते है।

मल्ली ने उस बैग को खोलकर देखा उसमे नीले रंग के दो रिबन, एक गेंद, एक तेल की डिब्बी और एक गुलाब के पेड़ की जड़ थी। मल्ली को कुछ समझ में नहीं आया की यह चीजे मेरे किस काम की है। मल्ली ने बैग ले लिया। मल्ली जंगल की तरफ जाने लगी। कुछ दुरी पर जाने के बाद उसे एक घर दिखाई दिया। मल्ली उस घर के पास गई तो, वे देखते ही रह गई। क्यों की मकान पेड़ पर बना था। पेड़ के मकान तक पहुंचने के लिए बहुत ही बढ़िया रास्ता बनाया गया था। मल्ली उस रास्ते से मकान के दरवाजे तक पहुँची और आवाज दी, कोई है ? अंदर से आवाज आई , कौन है ? मल्ली ने कहा मैं लकड़हारे की बेटी, आप कौन हो। अंदर से फिर आवाज आई आप अंदर आ जावो।  मल्ली अंदर गई। अंदर एक कुत्ता और बिल्ली दिखाई दिए फिर मल्ली की नजर एक चुड़ैल पर गई। चुड़ैल ने मल्ली से पूछा की, '' तू कैसे पहुँचि, इतने भयानक जंगल में, मल्ली ने कहाँ, मैं भटक गई। मुझे काम चाहिए। चुड़ैल बोली मेरे पास काम है, तू मेरे काले जादू में मदद करेगी।

मल्ली को गलत काम करना पसंद नहीं था वे चुड़ैल को कहने लगी की मैं यहाँ नहीं रहनेवाली हु मुझे यहाँ से जाना होगा। चुड़ैल बोली, '' यहाँ से जाना मुश्किल नहीं नामुमकिन है। तभी चुड़ैल के बहन की आवाज आई और चुड़ैल अपने बहन के साथ बहार गई और मल्ली से कहा की यहाँ से भागना नहीं।




मल्ली ने बिल्ली से कहाँ की मुझे यहाँ से जाने में मदद करें। बिल्ली ने कहाँ , '' मेरे पास नीले रंग के रिबन नहीं है। अगर आपके पास नीले रंग के रिबन है तो मैं आपकी मदद कर सकती हूँ। तभी मल्ली के दिमाग की बत्ती जली की बुढ़िया ने उसे बैग दिया था उसमे यह सभी चीजें है। मल्ली ने बैग से दो रिबन निकालकर बिल्ली को दिया। बिल्ली बोली मैं तुम्हे जाने दूँगी लेकिन कुत्ते को कुछ खेलने के लिए देना होगा। मल्ली ने अपने बैग से गेंद निकाली और कुत्ते को दी कुत्ता भी खुश हुआ। दरवाजे की बहुत जोर से आवाज आती थी तभी मल्ली को ध्यान आया की मेरे बैग में तेल की डिब्बी है उसने दरवाजे के कब्जे में डाला और उसका आवाज बंद हुआ। इस तरह से मल्ली चुड़ैल के चंगुल से भाग रही थी। उतने में चुड़ैल आई।

चुड़ैल मल्ली के पीछे दौड़ने लगी मल्ली भागने लगी फिर थोड़ी देर में मल्ली को ध्यान आया की, मेरे बैग में एक जड़ी है। उस जड़ी को मल्ली ने चुड़ैल की तरफ फेका और काँटों की झाड़ियाँ बनी उसमे चुड़ैल फस गई। अब मल्ली के पिछे दौड़नेवाला कोई नहीं था। कुछ देर चलने पर मल्ली को पकी हुई चेरी दिखाई दी। मल्ली चेरी बड़े ख़ुशी के साथ तोड़ने लगी। 

चेरी तोड़ते समय वहाँ पर चेरी का मालिक राघव आ गया मल्ली ने अपनी कहानी राघव को बताई राघव को दया आई और मल्ली को बहुत सारि चेरी तोड़ के दिया। 

राघव ने मल्ली को उसके घर छोड़ दिया और उसके माँ को समझाया उसके माँ ने अपने गलती का प्राचित्त किया और मल्ली को कभी दुःख नहीं दूंगी उसे अपनी बेटी समझूँगी यह कह कर राघव को अपने घर से विदा किये। 

इस तरह से बुढ़िया के दिए गए चीजों से मल्ली को उसका परिवार दोबारा मिला।    


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