Uttarakhand tourist spot 'Valley of flowers' | उत्तराखंड पर्यटन स्थल ' फूलों की घाटी '


''नंदादेवी नेशनल पार्क'' के नजदीक ''फूलों की घाटी'' यह एक खूबसूरत पर्यटन स्थल है। जहां फूलों की बात करते हैं, वहां शांत, सौम्य वातावरण बनता है। यह घाटी में रंगीन फूलों, झरनों, खूबसूरत मैदानों, बर्फ से ढके झांकिया सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करते है। पौराणिक कथा के अनुसार, हनुमानजी लक्ष्मण को चेतना लाने के लिए इस घाटी पर संजीवनी बूटी के लिए आए थे।

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Uttarakhand tourist spot 'Valley of flowers' |  उत्तराखंड पर्यटन स्थल ' फूलों की घाटी '



 ब्रिटिश पर्वतारोही फैंक एस स्मिथ और उनके मित्र आर.एल. होल्डसवर्थ ने इस घाटी की खोज की। पर्वतारोही फ्रैंक एस स्मिथ 1937 में घाटी की प्रसिद्ध हसीन वादियों को देखने के लिए आए और 1938 में 'वैली ऑफ फ्लावर्स' नामक पुस्तक प्रकाशित की। हिम से ढकी हुई चोटियाँ और 550 से ज्यादा फूलों की प्रजातियों के दर्शन करनेवाला क्षेत्र '' फूलों की घाटी '' के नाम से प्रसिद्ध है।

उत्तराखंड राज्य के गढ़वाल क्षेत्र में चमोली जिले में स्थित '' फूलों की घाटी '' को विश्व संघटन यूनेस्को ने वर्ष 1982 में '' राष्ट्रिय उद्यान '' का दर्जा प्राप्त किया।

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' फूलों की घाटी ' की खास बातें | Specific points of 'Valley of Flowers'

 इस घाटी की ऊँचाई समुद्र तट से 3352 से 3658 मीटर की ऊँचाई पर मौजूद है, जो नंदा देवी पार्क का एक हिस्सा भी है।

 यह घाटी 87. 50 वर्ग मीटर में फैली है, जो लगभग 2 किलोमीटर चौड़ी और 8 किलोमीटर लंबी है।

➣ पर्वतारोही फ्रैंक एस स्मिथ ने 1938 में 'वैली ऑफ फ्लावर्स' नामक पुस्तक प्रकाशित की।

फूलों की घाटी भारत के उत्तराखंड राज्य के गढ़वाल क्षेत्र में है।

➣ वर्ष 1982 में, भारत सरकार ने फूलों की घाटी में भारतीय राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा प्राप्त किया।   

➣ घाटी की रमणीय जगह, अद्भुत सुंदरता, स्वच्छ वातावरण आदि को ध्यान में रखते हुए, इसे विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल किया गया।  

 घाटी में पौधों की 550 से अधिक रंगीन प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

➣ दून स्कूल के वनस्पति विज्ञान के प्रोफेसर रिचर्ड होल्सवर्थ ने अपनी टीम के साथ "वैली ऑफ फ्लावर्स" की खोज की थी।

इस घाटी में जुलाई से अगस्त के महा में फूलों की घाटी फूलों से खिल जाती है।

जुलाई, अगस्त, सितंबर तक, घाटी में फूल खिलते हैं। सैलानी खूबसूरत वादियों को देख सकते हैं।

➣ इस घाटी में खिलने वाले फूलों में औषधीय गुणों के कारण, फूलों का उपयोग दवा बनाने के लिए किया जाता है।

  स्ट्रॉबेरी, जर्मेनियम, मार्श, लिगुलिया, गेंदा, प्रीबुला, पोटेंटिला, जीएम, तारक, लिलियम, हिमालयन ब्लू पोपी, बछनाग, डेल्फीनियम, रुनानकुलम, कोरिडलिस, इंदुला, ससुरिया, कामानुला, पेडिकुलरिस, मोरीना, इम्पीटिनस, बिस्टेरता, एनीमोन आदि प्रजातियाँ पाई जाती हैं। 
  
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