आर.सी.एम धुन | RCM Tunes


दोस्तों नमस्ते, आज मैं आपको आदरणीय गुरुदेव मनोज दीक्षित लिखित कविता प्रस्तुत करने जा रहा हु मुझे प्रकाशित करने का अवसर दिए इसलिए मैं सदैव आभारी हूँ।



आर सी एम धुन | RCM Tunes


आर सी एम धुन | RCM Tunes


ऐसा सुंदर सपना मेरे मन में जगा 
आर सी एम की धुन गन गुना ने लगा 
मन में विश्वास की आस भी पास थी 
स्वप्न सच सा हुआ अब दिखाने लगा।  
ऐसा सुंदर ...... 

लक्ष्य लक्ष्मी का इसमें न देखों कोई 
भावना इसमें सुख की नई से नई 
खुद से पहले खुदाई  सौगात है 
भाई भाई की इसमें मुलाखात है 
'मनोज' ने देखा सबको गले मिल रहें 
उसमें अपना गला भी मिलाने लगा। 
ऐसा सुंदर....

इसमें नेटवर्क का ही महावर्क है 
देखने और समझने का ही फर्क है 
आज तक जो मैं ग्राहक कहता रहा 
उसके बदले में हमको मिला कुछ नहीं 
इसलिए भीलवाड़ा को जाने लगा 
ऐसा सुंदर ......

इसकी पहली पहल छावड़ा जी ने की 
गाँधी के विचारों की ही बात थी 
देशद्रोही भगाये जो बापू ने थे
नाम उनका था लेकिन अकेले न थे 
ऐसी ही छावड़ा जी ने ठानी कसम 
आर सी एम गरीबी भगाने लगा 
ऐसा सुंदर ....... 

रचनाकार :- मनोज दीक्षित 
(आर सी एम.कविराज)

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