What is Ganesh festival? | गणेश उत्सव क्या है?


Ganesh festival महाराष्ट्र में बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है. शिवपुराण के नुसार मंगलमूर्ति मोर्या गणपति का जन्म भाद्रपत मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी के शुभ बेला पर हुआ है. एक बार शिवजी के तरफ सभी देवगन आए और उनसे कहा ब्रम्हांड की परिक्रमा लगा कर आना है. परिक्रमा लगाकर जो सबसे पहले यहाँ पहुचेगा उसका पूजन संसार में सबसे पहले होगा. गणेश ने शिव और माता पर्वती की परिक्रमा लगाई. इस कारण से, उन्हें पहले पूजा जाता है.

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गणेश उत्सव क्या है? (What is Ganesh festival?), गणेश उत्सव सामान्य ज्ञान (Ganesh Utsav General Knowledge), गणेश चतुर्थी क्या है? (What is Ganesh Chaturthi?),  गणेश पूजा भक्त क्या है? (What is Ganesh Puja?), गणेश भक्त क्या है? ( What is a Ganesh devotee?), गणेश भक्ति दस दिन कैसे करे? How to do Ganesh Bhakti for ten days?  श्री गणेश की पूजा सबसे पहले क्यों की जाती है? ( Why is Shri Ganesha worship first?) आदि की जानकरी लेख के माध्यम से मिलनेवाली है.


गणेश उत्सव सामान्य ज्ञान | Ganesh Utsav General Knowledge 

अगर हम इतिहास के पन्नों पर थोड़ा गौर करें, तो इस त्योहार की शुरुआत सातवाहन, राष्ट्रकुल और चालुक्य घराने से यह परम्परा चली आ रही है. हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज ने गणेशोत्सव को राष्ट्रीयता व संस्कृति को जोड़कर भारतीय संस्कृति का जतन करके परंपरा चालू रखी. पेशवे राजशाही के गणेशजी कुलदेव थे इसलिए राष्ट्रदेव के रूप में स्वीकार किया गया था. पेशवाओं के बाद में सन 1818 से 1892 इस अवधि के दौरान हिंदू समाज उत्सव मनाने लगे.

इस्ट इंडिया कंपनी के शासन काल में गणेश उत्सव सार्वजनि जगह पर मना नहीं सकते थे. बाल गंगाधर तिलक ने 1893 में पुणे में सार्वजनिक रूप से "गणेशोत्सव" मनाने की परंपरा शुरू की. इस कार्यक्रम के माध्यम से लोग एक जगह पर आते थे और विचार विनिमय करते थे. लोग एक साथ संघटित होते थे, गणेश उत्सव के माध्यम से स्वतंत्रता सग्राम के लिए एक साथ संघटित रहने का मौका मिला. ब्रिटिश शासन के दौरान, लोगों को एकजुट करने के लिए "गणेश उत्सव" शुरू किया गया था. लेकिन आज की तारीख में यह एक धार्मिक हिस्सा बन गया.



गणेश चतुर्थी क्या है? |  What is Ganesh Chaturthi?


प्रथम पूज्य श्री गणेश का जन्म हिन्दू पौराणिक कथाओं में वर्णित भाद्रपत मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी के मंगल बेला पर हुआ है. गणेश चतुर्थी वार्षिक उत्सव महारष्ट्र में भाई-चारे के साथ बड़े हर्षोउल्हास के साथ मनाया जाता है. गणेश चतुर्थी हिन्दू पवित्र त्यौहार है. प्रथम पूज्य, बुद्धि और समृद्धि के दाता श्री गणेश है. गणेश चतुर्थी के दिन भगवान श्री गणेश का जन्म होता है इस दिन को ही '' गणेश चतुर्थी '' कहा जाता है.  भगवान गणेश की मूर्ति को सार्वजनि स्थान पर या अपने घर पर ही 10 दिनों तक पूजा करते है. पूजा में दूर्वा का बड़ा महत्व है. चतुर्दर्शी को भगवान गणेश की मूर्ति  विसर्जित करते है. इस तरह ''गणेश उत्सव'' मनाते है.

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गणेश भक्ति दस दिन कैसे करे? |  How to do Ganesh Bhakti for ten days? 

गणेश चतुर्थी के दिन से 10 दिन तक श्रीगणेश की सुबह-शाम, गणेश वंदना करनी चाहिए, भगवान श्रीगणेशा प्रथम पूज्य है. शुभ कार्य करने से पहले श्रीगणेशा की पूजा की जाती है. श्रीगणेशा के पूजा के लिए 16 प्रकार की सामग्री लगती है.......जैसे की,.....  जल क्लश, दूर्वा, लाल कपडा, पंचामृत, रोली, अक्षत, कलावा जेनेउ, गंगाजलु, सुपारी, इलाइची, चांदी का वर्क, लौंक पंचमेवा, घी और कपूर आदि से श्रीगणेशा की पूजा-अर्चना करते है. एक दिन खाना रखते है और सभी अपने पड़ोसियों को खाने पर बुलाते है. इस तरह से अपने पड़ोस में भाईचारे का माहुल रहता है, आपस में स्नेह बढ़ता है.

श्री गणेश की पूजा सबसे पहले क्यों की जाती है? | ( Why is Shri Ganesha worship first?) 

ॐ श्री गणेशाय नमः कोई शुभ काम करने से पहले लिखते है. दरवाजे पर श्री गणेशाय नमः की लाल रंग की पट्टी बंधी रहती है. सभी देवताओं में भगवान गणेश का स्थान सबसे पहले पूजनीय है. गणेश भगवान की पूजा सबसे पहले की जाती है. हमारे शुभ कार्य में विघ्न नहीं आना चाहिए जैसे की, पूजा, अनुष्ठान, कार्य में विघ्न - बाधा नहीं आना चाहिए इसलिए गणेशजी की प्रथम पूजा की जाती है. इसके पीछे का रहस्य पौराणिक कथा के माध्यम से बताने का प्रयास कर रहा हु.

पौराणिक कथा - एक बार इन्द्रलोग में नारद मुनि ने सभी देवताओं से एक सवाल पूछा , 'सबसे श्रेष्ठ देव कौन है' तभी देवताओं से उत्तर आया की, मैं श्रेष्ट हु याने की अपने आप को सभी श्रेष्ठ मानते थे. दूसरा सवाल, कौन से भगवन की पूजा धरती लोक पर सबसे पहले होती है. इस सवाल पर सभी देवलोग में चर्चा चालू हुई. इस प्रश्न का हल निकालने के लिए नारद मुनि ने सभी देवताओं को भगवन शिव की शरण में जाने के लिए कहा.

देवतागण कैलाश पर्वत पर पहुंचे शिव ने सभी देवतागण को देखते हुए एक शर्त रखी की, सभी देवतागण अपने-अपने वाहनों पर सवार होकर पुरे ब्रम्हांड की परिक्रमा करेंगे, जो सबसे पहले मेरे पास पहुँचेगा उसकी इस संसार में प्रथम पूजा और सर्वश्रेष्ठ भगवान माना जाएगा. इस शर्त में गणेश भी शामिल थे. सभी देवतागण अपने वाहनों पर सवार होकर ब्रम्हांड की परिक्रमा के लिए चले गए. लेकिन गौरी पुत्र गणेश कैलास पर्वत पर ही रुके रहे और अपने माता-पिता याने की शिव-पार्वती के सात परिक्रमा किए और चरणों में गिर गए.

देवतागण ब्रम्हांड की परिक्रमा कर के आए और पूछने लगे की सबसे पहले कौन पहुँचे, भगवान शिव ने कहा, ' गणेश ' यह सुनकर उनके मन में कुछ सवाल पैदा हुए और भगवान सिव को कहने लगे की, यह गणेश आपका पुत्र है इसलिए आपने प्रथम स्थान दिए. इस बात पर भगवान शिव कहने लगे, '' इस संसार में सबसे श्रेष्ठ स्थान माता-पिता का होता है''. यह स्थान देवताओं से भी कई गुना बढ़ा है. तभी से गणेश की प्रथम पूजा की जाती है. अपने बुद्धि के कारण गणेश भगवान सभी देवताओं में से सबसे पहले पूजे जाते है. गणेश चतुर्थी का पूजन खुशहाली और दुःखों को हरने वाला है. सभी भक्तों को शुभ कार्य करने से पहले गणेश की पूजा करनी चाहिए.


श्री गणेश का जन्म कैसे हुआ | How was shree ganesh born

पौराणिक कथा के नुसार, '' माता पार्वती स्नान करने गए तब उन्हों ने मैल से एक बालक का निर्माण किया था. इस बालक को उहोंने अपने रक्षा के लिए द्वार पर रखा था. भगवान शंकर जब प्रवेश करने लगे तब उस बालक ने उन्हें रोका, जाने नहीं दिया भगवान शिव क्रोधित हुए और अपने शिवगणों को कहा की इस बालक को इस द्वार से बाजु करों सभी शिवगण बालक से लढने लगे लेकिन बालक को कुछ नहीं हुआ. भगवान शिव को क्रोध आया और उन्हों ने अपने हाथ की त्रिशूल से बालक के शिर पर प्रहार किया और शिर धड़ से अलग हुआ. माता पार्वती बहार निकली तो बालक मूरचित पड़ा था. माता क्रोधित हुई और तीनो लोकों में हा-हा कार मचा दिया, सभी देवतागण देवी के क्रोध से भयभीत हुए और माँ दुर्गा की आराधना करने लगे माँ दुर्गा ने पर्वती माता को शांत किया.

भगवान शिव ने विष्णु भगवान से उत्तर दिशा में जाकर के कोई भी जिव मिले उसका सिर काटकर के लाइये. भगवन विष्णु ने हाथी का सिर काट कर लाए और उस बालक के धड़ पर रखे बालक जीवित हुआ और माता पार्वती खुश हुई. भाद्रपत मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी चन्द्रमा प्रकाशित होने के समय उतपन्न हुआ और उसका नाम गणेश रखा गया. इस बालक को सभी देवताओं में पूजनीय स्थान मिला.

भगवान गणेश की कहानी | Story of Lord Ganesha 

एक दिन भगवान शिव और माता पर्वती नर्मदा नदी के तट पर विहार करने के लिए गए. पार्वती ने भगवान शिव से चौपड़ खेलने के लिए कहा, तब भगवान शिव बोले, '' देवी,  हम खेलेंगे लेकिन हमारे अंक लिखनेवला कोई नहीं है. तब माता पर्वती ने कुछ पेड़ की पत्तीयों को इक्क्ठा किया और पुतला बनाया उसे भगवान शिव ने जीवित किया. इस तर से एक बालक का निर्माण किया.

खेल चालू हुआ माता पर्वती जितने लगी और भगवान शिव हारने लगे. जब बालक को पूछा गया की कोण जीता तब बालक ने जवाब दिया '' माते, मेरे पिताजी शिव जीते'' इस बात पर माता पार्वती क्रोधित हुई और बालक को शाप दिया की, '' तेरा एक पैर लगड़ा होगा और तू कीचड़ में पड़ के यातना सहन करेंगा'

बालक बोला माते नादानी से बोल दिया मुझे क्षमा कर दो और शाप से मुक्त होने का मार्ग बताइए, माता पर्वती ने कहाँ, '' गणेश पूजन के दिन नाग कन्याए पूजन के लिए आती है उनके साथ व्रत करके शाप से मुक्त होगा सकता है. इतना कहकर माता पार्वती कैलाश पर्वत चली गई.

एक साल के बाद नाग कन्याएँ गणेश पूजन के लिए आईं. बालक को व्रत कैसे करना चाहिए इसके बारे में बताये. बालक ने 12 दिन तक गणेशजी का व्रत किया. गणेशजी प्रसन्न हुए और बोले आपको क्या वरदान चाहिए जल्दी बोलो बालक ''बालक कहने लगा, '' मेरे पाँव में इतनी शक्ति देना की मैं कैलाश पर्वत पर पहुंच जाऊ और मुझे देखकर माता पिता प्रसन्न हो जाए. गणेशजी बोले, '' तथास्तु ''

भगवान शिव से माता पार्वती नाराज थी भगवान शिव ने गणेशजी का 21 दिन का व्रत किया और माता पार्वती खुश हुई.

इसी तरह माता पार्वती ने पुत्र कार्तिक से मिलने के लिए भगवान गणेश का 21 दिन का व्रत किया. (21 दूर्वा के तिनके, 21 फूल और 21 लड्डू का भोग चढ़ाया) व्रत सफल हुआ और कार्तिक माता पार्वती से मिलने के लिए कैलाश पर्वत दौड़े चले आये.

उन्हों ने माता से पूछा, '' आपने क्या किये माते,  माता पार्वती ने 21 दिन के गणेश व्रत के बारे में बताया उन्हों ने विश्वामित्रजी को बताया और गणेश व्रत करके गणेश भगवान को प्रसन्न करके विश्वामित्रजी ने ''ब्रम्ह - ऋषि '' होने का वर प्राप्त किया. इसी तरह गणेश भगवान की पुरे श्रद्धा और आस्था के साथ पूजा, अर्चना और व्रत करने से मनोकामना पूर्ण होती है.

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