आम के पेड़ के लाभ | Benefits of ''mango'' tree


''Mango'' फलों का "kings'' है। "Mango'' हमारी सेहत के लिए बहुत ही गुणकारी फल है। वेदग्रन्द्थ में छह हजार साल पूर्व से उल्लेख किया जाता है। चीनी प्रवासी ''व्ह्युएनत्संग'' ने भारत से चीन तक आम का फल ले गए। यमन और यूरोपियन लोगों को "Mango'' पहली बार भारत में ही दिखा भारत से ही आम यूरोप, आफ्रिका, इ. देशों में भारत के भूमि से ही आम के पेड़ लेकर के गए। अगर देखा जाए तो आम की 500 प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से 50 प्रजातियां भारत में मौजूद हैं। सामन्य रूप से आम में Vitamin A , बी -1, बी-2, कोर्बोहेट्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, फ़ॉस्फ़रस, पोटॅशियम सोडियम, आयरन इत्यादि शामिल है। आम में विटामिन A, B-1, B-2, कॉर्बोफ्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम सोडियम, आयरन आदि होते हैं।

''शहद'' के बहुगुणी लाभ 
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''पुदीना'' के बहुगुणी लाभ 
''मोगरा'' पुष्प के बहुगुणी लाभ

पके आम के रस में विटामिन 'ए' और 'सी' का प्रमाण अधिक रहता है। विटामिन ' ए ' कीटनाशकों और ' सी ' त्वचा के लिए बहुत ही फायदे मंद साबित होता है। कच्चे आम में पोटैश, टार्टरिक, साइट्रिक और मैलिक ऐसिड रहता है। आम की पत्तिया, फल, मंजिरी, खोड़, जड़े , साल, कोय सभी गुणकारी रहते है। हिन्दू धर्म के पुजाविधि में आम के पत्तियों का बहुत ही महत्व है। पोला, दीपावली, दहशरा, शादी  इत्यादि उत्सव् में आम के पत्तियों की माला बनाके दरवाजे पर बाधते है। आम्रवृक्ष बहुत ही गुणकारी है। 

आम को संस्कृत में-आम्रफल, पिकमवसलभ, हिंदी में-आम, मराठी में - आंबा, और इंग्रजी में-मैंगो Mongo कहते है।


फलों के राजा आम के औषधिय गुणधर्म | Medicinal properties of kings  of fruit mangoes


"Mango'' के पेड़ को वसंत ऋतु में फूल आते है, उसे मंजिरी किंवा मोहोर कहते है। मोहोर को दही के साथ खाने से आव गिरना, जुलाब होना इत्यादि विकार दूर होते है।  

➤जीभली को टेस्ट नहीं आता हो, उलटि जैसे लगना तभी आम का मोहोर मुँह में पान के जैसा चघलते रहना है।

➤जिनको पेशाब से धात जाती होगी और अशक्त लगता होगा ऐसे लोगो ने मोहोर का चूर्ण शहद के साथ लेना चाहिए।रिजल्ट 20-25 दिन में मिल जायेगा। 

➤"Mango'' के पेड़ की सुखी हुई साल पानी में उबालकर उसे पानी छननी से छान कर थंडी करके बीमार आदमी को देना चाहिए। श्वेतप्रदर, पेचिस, रक्त मुळव्याध, मासिक पाड़ी का जादा का रक्तस्राव इत्यादि के लिए यह कढ़ा फायदे मंद है। इस कढ़े से सुबह कुरला करने से मुँह आना कम होता है। कढ़े में शहद मिलाने से अतिसार और पेट का मुरड़ा आदि विकार बंद होते है।

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कच्चा आम याने की '' कैरी '' है। कैरी से लोंच, चटनी, जेली, सक्खर आम, मेथी-आम इत्यादि माम्सुल पदार्थ ज्यादा समय तक रहनेवाले बनाये जाते है। इन पदार्थ को खाने से भोजन का पाचन होकर भूख बढ़ती है।  

➤ कैरी के साथ नमक और शहद के साथ खाने से उन्हाळी, अतिसार, हगवन, मूलव्याध, बद्धकोष्ठता, अपचन इत्यादि के लिए फायदे मंद रहती है। 

➤ आम के पेढ की पत्तियों को एक लोटे में पानी के साथ रखे और बाद में उसे पि ले इस से लु नहीं लगती।  

➤ आम के डेट से तेल निकलता है यह तेल ख़रूज, इसब, नायटे इत्यादि चर्म रोग पर काम करता है। 



आम के कोयि में टॉनिक और व्हिटामिन ' सी ' रहता है। कोयी में औषधि युक्त गुण रहते है। कोयी के तुकडे को नियमित पान के जैसा चबाते हुए रहे तो मुँह की दुर्गन्धि और दांत से दुर्गन्धि युक्त स्त्राव दूर होता है। कोयी का चूर्ण बनाके मसूडो को लगाने से मसूडो से रक्त निकलना, मसूडा बढ़ा होना इन रोगो से छुटकारा पाते है। चूर्ण को शहद में दिए तो मूलव्याध और स्त्री का रक्तचाप दूर होता है।  

➤ आम की कवली पत्ति पान के जैसा चबाकर थूकना चाहिए इस कारण आपका आवाज स्पस्ट आता है। खोकला कम होता है। मसूड़ों का पायोरिया रुकता है। 

➤ पेड़ के पत्ते तोड़ने के बाद उसके डेठ से सफेद रस निकलता है उस रस को अपने फटे हुए एड़ी को लगाए तो फटी हुई एड़िया भर जाती है। 

➤ आम के पतों की राख खोब्रा तेल के साथ मिलाकर लगाए तो दर्द  की आग और किसी का हाथ या पैर जला हो उस दर्द पर यह लेप लगाने से होनेवाली आग कम होती है।  

➤ आम की नई पालवी के पत्ते छाव में सूखा कर उसका बारीक़ चूर्ण बनाकर हर दिन 1 चमच चूर्ण सुबह ब्रश करने के पहले सेवन करना चाहिए ऐसा 06 माह तक करना चाहिए। इससे मलमा निकल जायेगा। 
➤ आम के पेढ में आम्ल और खनिज रहता है इसलिए इसका लकड़ा पानी में ख़राब नहीं होता उसका उपयोग जहाज और होड़ी बनाने के लिए काम में आता है।  

➤ पका आम खाने से शरीर येष्ठि सुंदर और तेजस्वी बनती है। पका आम खाने से कप की शिकायत दूर होती है। हीमोग्लोबिन बढ़ता है। दूध के साथ खाने से वीर्यवृद्धि होती है। पाचन संस्था का रोग, फुफ्फुस का रोग, खून की कमी इत्यादि रोग पका आम और रस खाने से दूर होते है। 

➤ पके आम के रस में दूध मिलाए तो हाजमा जल्दी होता है।  

➤ आम, दूध और शहद इन्हे मिलाकर खाने से अपने शरीर को टॉनिक मिलती है और सभी इंद्रियों की कार्य करने की क्षमता बढ़ती है। 

➤ आम के सीजन में पके आम खाने से विटैमिन और खनिज की कमतरता पूरी करता है।

➤ आम के पेड को घाव किये तो लाल-काला ( पेड़ का खून ) रंग बहार निकलता है। कुछ देर बाद वो सुख जाता है सूखा हुआ खून , एरंडेल तेल और हल्दी एकसाथ मिलाकर कम आच पर रखे थोड़ी देर में उसका लेप तैयार हो जाएगा उसे थंडा होने पर लगाए। लेप कहा लगाए - संधा निखड़ने, लचकने, उस भरना, इसके लिए यह लेप काम में आता है।  

➤ आम का रस  अमृत है। इसके लिए मिट्टी के हंडे में ठंडे पानी में भिगोकर रख दें। उसके बाद आम को चूस के खाए उसके बाद दूध पिए बाकि कुछ न ले ऐसा करने से शरीर को स्फूर्ति, उत्साह, नवयौवन शक्ति, हृदयविकार, दमा, क्षय और मलावरोध इत्यादि के लिए बहुत ही उपयोगी होता है।

➤ पके आम के कोय का गाभा बहुत ही गुणकारी होता है। उसमे आम्ल ज्यादा रहता है इसलिय उसकी टेस्ट तुरट रहती है। उसकी चटनी खाने से पेट के जंतु(कृमि) चले जाते है।

 आम स्वास्थ्य और वित्तीय दृष्टि से बहुआयामी है।। थका हुआ बीमार आदमी  आम के छाव में बैठता है। आम के पड़ से आगपेटी और पैकिंग पेटी बनाते है। construction में आम के लकड़ियों का उपयोग ज्यादा होता है। आम के मगजबीज से तेल निकाला जाता है यह तेल बहुत ही औषधियुक्त है। विश्व के आहार तंञ ने आम का अभ्यास करके आम यह फल यूरोप के सेफ फल से ज्यादा ही पोस्टिक होता है।

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