ISRO kya hai?:इसरो क्या है?


अंतरिक्ष विज्ञान क्या है? (antariksh vigyaan kya hai?)  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन क्या है (Indian Space Research Organization kya hai ?) आइयें जानें इसरो क्या है? (ISRO  kya hai?) nsurance

आज हम विज्ञान युग में भ्रमण कर रहे है. 21 वीं शताब्दी में चल रहे है. आज विज्ञान के अनुशंधान से अंतरिक्ष में क्या चल रहा है. TVपर देखे जानेवाले सीरियल केबल लगाने से कैसे दीखते? मोबाईल से कैसे बात हो रही है अर्थात हवा में बातें हो रहती है यह घटनाएं कैसे घटित होती है. अंतरिक्ष में रॉकेट के माध्यम से क्या होता है. सैटेलाइट से क्या होता है. देश-दुनिया की ताजा ख़बरें हमें लाइव कैसे दिखती है. आदि बातें जानने के लिए इसरो क्या है? ISRO  kya hai?  यह लेख पढ़ते रहिये. Gas/Electricity


ISRO  kya hai?:इसरो क्या है?




प्रस्तावना: Preface

1962 में, जब भारत सरकार द्वारा भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (INCOSPAR) का गठन किया गया, तो भारत ने अंतरिक्ष में जाने का फैसला किया. दूरदर्शी डॉ. विक्रम साराभाई के साथ, ऊपरी वायुमंडलीय अनुसंधान के लिए तिरुवनंतपुरम में थुंबा स्थलीय रॉकेट लॉन्च सेंटर (TURLS) की स्थापना की.

1969 में गठित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने तत्कालीन INCOSPAR को अधिगृहीत कर लिया. राष्ट्र के विकास में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की भूमिका और महत्व को समझते हुए, डॉ. विक्रम साराभाई ने इसरो को विकास के लिए एक एजेंट के रूप में कार्य करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए. इसके बाद, इसरो ने देश को अंतरिक्ष-आधारित सेवाएं प्रदान करने और उन्हें स्वदेशी रूप से विकसित करने के लिए विकसित तकनीक प्रदान करने के लिए मिशन शुरू किया. Loans


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इसरो की उत्पत्ति:Origin of ISRO

भारत देश में अंतरिक्ष अनुसंधान गतिविधियों की शुरूआत 1960 के दौरान हुई, और उस समय संयुक्‍त राष्‍ट्र अमरीका में भी उपग्रहों का प्रयोगपरीक्षण चालू था. अमेरिकी उपग्रह 'Cincom-3' द्वारा प्रशांत महासागर में टोक्यो ओलंपिक खेलों का लाइव टेलीकास्ट, संचार उपग्रहों की क्षमता का प्रदर्शन किया गया और इस प्रदर्शन से भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ.विक्रम साराभाई का लक्ष्य अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की ओर गया.
  • डॉ. साराभाई तथा डॉ. रामनाथन के नेतृत्‍व में इन्कोस्‍पार (भारतीय राष्‍ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति) की शुरूआत हुई. 1967 में, अहमदाबाद स्थित पहले परीक्षणात्‍मक उपग्रह संचार भू-स्‍टेशन (ई.एस.ई.एस.) का प्रचालन किया गया. किसानों के लिए कृषि संबंधी सूचना देने हेतु टी.वी. कार्यक्रम ‘कृषि दर्शन’ की शुरूआत की गई.
  • टेलीविजन परीक्षण (साइट), जो वर्ष 1975-76 के दौरान ‘विश्‍व में सबसे बड़े समाजशास्‍त्रीय परीक्षण’ के रूप में सामने आया. इस परीक्षण से 6 राज्‍यों के 2400 ग्रामों के करीब 200,000 लोगों को लाभ पहुँचा तथा इससे अम‍रीकी प्रौद्योगिकी उपग्रह (ए.टी.एस.-6) का प्रयोग करते हुए विकास आधारित कार्यक्रमों का प्रसारण किया गया. एक वर्ष में प्राथमिक स्‍कूलों के 50,000 विज्ञान के अध्‍यापकों को प्रशिक्षित करने का श्रेय साइट को जाता है.
  • साइट के बाद, वर्ष 1977-79 के दौरान फ्रेंको-जर्मन सिमफोनी उपग्रह का प्रयोग करते हुए इसरो तथा डाक एवं तार विभाग (पी.एवं टी.) की एक संयुक्‍त परियोजना उपग्रह दूरसंचार परीक्षण परियोजना (स्‍टेप) की शुरूआत की गई.
  • साइट के बाद, ‘खेड़ा संचार परियोजना (के.सी.पी.)’ की शुरूआत हुई जिसने गुजरात राज्‍य के खेड़ा जिले में आवश्‍यकतानुसार तथा स्‍थानीय विशिष्‍ट कार्यक्रम प्रसारण के लिए क्षेत्र प्रयोगशाला के रूप में कार्य किया. के.सी.पी. को 1984 में कुशल ग्रामीण संचार सक्षमता के लिए यूनिस्‍को-आई.पी.डी.सी. (संचार के विकास के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय कार्यक्रम) पुरस्‍कार प्रदान किया गया.
  • 19 अप्रैल 1975 को रूस के बनाये स्पेस रॉकेट Kosmos-3M लॉन्च व्हीकल से आर्यभट्ट उपग्रह को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया..
  • निम्‍न भू कक्षा (एल.ई.ओ.) में 40 कि.ग्रा. को स्‍थापित करने की क्षमता वाले प्रथम प्रमोचक राकेट एस.एल.वी.-3 का विकास करना, जिसकी पहली सफल उड़ान 1980 में की गई.
  • 1980-90 के दशक में ऐप्‍पल, ए.एस.एल.वी., इन्‍सैट, आई.आर.एस.पी.एस.एल.वी, जी.एस.एल.वी आदि उपग्रह की उड़ान सफलत रही इस तरह से इसरो (ISRO) अपने कार्य में सफलतापूर्वक आगे बढ़ती गई. 
  • चंद्रयान 2 (Chandrayaan -2) भारतीय चंद्र मिशन है जो पूरी हिम्‍मत से चाँद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतरेगा जहां अभी तक कोई देश नहीं पहुंचा है - यानी कि चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र. इसका मकसद, चंद्रमा के प्रति जानकारी जुटाना और ऐसी खोज करना जिनसे भारत के साथ ही पूरी मानवता को फायदा होगा. इन परीक्षणों और अनुभवों के आधार पर ही भावी चंद्र अभियानों की तैयारी में जरूरी बड़े बदलाव लाना है, ताकि आने वाले दौर के चंद्र अभियानों में अपनाई जाने वाली नई टेक्‍नॉलोजी तय करने में मदद मिले. Attorney 


अंतरिक्ष सैटेलाइट का फायदा: Advantage of space satellite educational leadership doctoral programs online

  • INSAT-3A, 3C, 4A, 4B, 4CR और इसी प्रणाली के अंदर आने वाले GSAT-6, 7, 8, 9, 10, 12, 14, 15, 16 और 18. ये सभी सैटेलाइट 200 ट्रांसपोंडर्स की मदद से टेलीफोन, मोबाइल, टीवी, समाचार, आपदा प्रबंधन, मौसम पूर्वानुमान जैसे कार्यों में मदद कर रहे.
  • रिसोर्ससेट-1, 2, 2ए, कार्टोसेट-1, 2, 2ए, 2बी, रीसेट-1 और 2, ओशनसेट-2, मेघाट्रॉपिक्स, सरल, स्कैटसेट-1, इनसेट-3डी, कल्पना, इनसेट-3ए, इनसेट-3डीआर. ये सभी उपग्रह कृषि विकास, शहरी और ग्रामीण विकास की योजनाओं, जलस्रोत, खनिज संपदा, पर्यावरण, जंगल और आपदा प्रबंधन में मदद करते हैं.
  • इसरो (ISRO) अंतरिक्ष में छात्रों, विश्वविद्यालय, कॉलेज द्वारा बनाए गए उपग्रहों को 2009 के बाद से जारी किया गया है. 10 उपग्रहों जैसे कि आउस्टीसेट, स्टडसेट, जुगनू, एसआरएमएससेट, स्वेअम, सत्यमबसेट, पिसेट, प्रथम, एनआईयूसेट और कलमासेट-वी 2 आदि, इनमें से कोई भी विफल नहीं हुआ। इसरो के छोड़ने का यह एक बड़ा कारण है क्योंकि छात्रों का विज्ञान के प्रति रुझान बढ़ सकता है.
  • इसरो (ISRO) ने देश की सेना, नौसेना, वायु सेना, कार्गो सुविधाओं, पानी के जहाजों, छोटे नाविकों, नागरिक उड्डयन के लिए GAGAN और IRNSS-नेविगेटर जैसे नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम विकसित और लॉन्च किए हैं। जीसैट -8 और जीसैट -10 के ट्रांसपोंडर के माध्यम से गगन प्रणाली की सुविधाओं का लाभ उठाया जा रहा है। वहीं, IRNSS-नेविगेटर के 8 उपग्रह (IRNSS-1A, 1B, 1C, 1D, 1E, 1F, 1G और 1I) काम कर रहे हैं
  • इसरो (ISRO) के वैज्ञानिकों ने रिमोट सेंसिंग, वायुमंडलीय, पेलोड विकास, रिकवरी तकनीक सहित कई आयामों पर अध्ययन करने के लिए प्रायोगिक उपग्रह भरत का पहला उपग्रह आर्यभट्ट, रोहिणी (विफल रहा), रोहिणी RS-1, Apple, यूथसेट, INS-1B, INS-1A और INS-1C। लॉन्च किए हैं.
  • 1987 के बाद से, इसरो के वैज्ञानिकों ने दूर के ग्रहों के अध्ययन के लिए 7 उपग्रह लॉन्च किए हैं. पहले चार उपग्रह प्रयोगात्मक थे. इसके बाद, 22 अक्टूबर 2008 को चंद्रयान -1 को लॉन्च किया गया. 2013 में मंगलयान और 2015 में एस्ट्रोसेट लॉन्च किया गया. 1987 के बाद से केवल एक लॉन्चिंग विफल रही है. 

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इसरो के बारें में ...... About ISRO...... business doctoral programs online

  • इसरो (ISRO) - भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organization
  • डॉ.विक्रम ए. साराभाई को भारत में अंतरिक्ष कार्यक्रमों का संस्थापक जनक माना जाता है.
  • इसरो (ISRO)का गठन 15 अगस्त, 1969 को हुआ था.
  • अंतरिक्ष विभाग (अं.वि.) और अंतरिक्ष आयोग को सन् 1972 में स्‍थापित किया गया. 01 जून, 1972 में इसरो को अंतरिक्ष विभाग के अंदर शामिल किया गया.
  • इसरो (ISRO) का प्रमुख उद्देश्य अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का विकास तथा विभिन्न राष्ट्रीय आवश्यकताओं में उनका उपयोग करना है.
  • इसरो (ISRO) ने दो प्रमुख अंतरिक्ष प्रणालियों की स्थापना की है, संचार, दूरदर्शन प्रसारण तथा मौसम-विज्ञान सेवाओं के लिए इन्सैट, और संसाधन मॉनिटरन और प्रबंधन के लिए भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रह (आईआरएस) प्रणाली. इसरो ने अभीष्ट कक्ष में इन्सैट और आईआरएस की स्थापना के लिए दो उपग्रह प्रमोचन यान, पीएसएलवी और जीएसएलवी विकसित किए हैं.
  • उपग्रहों को इसरो उपग्रह केंद्र (आईजैक) में बनाया जाता है.
  • राकेट/ प्रमोचन यान विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी), तिरुवनंतपुरम में बनाए जाते हैं.
  • इसरो (ISRO) की प्रमोचन सुविधा एसडीएससी शार में स्थित है, जहाँ से प्रमोचन यानों और परिज्ञापीराकेटों का प्रमोचन किया जाता है. तिरुवनंतपुरम स्थित टर्ल्स से भी परिज्ञापीराकेटों का प्रमोचन किया जाता है.
  • आप राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी), हैदराबाद से आँकड़े प्राप्त कर सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट: www.nrsc.gov.in देखें.
  • भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का प्रारंभ तिरुवनंतपुरम के निकट थुम्बाभूमध्यरेखीयराकेट प्रमोचन केंद्र (टर्ल्स) में हुआ.
  • पृथ्वी की भू-चुंबकीय भूमध्यरेखा थुम्बा से हो कर गुज़रती है.
  • परिज्ञापी का तात्पर्य, ऊपरी वायुमंडल के भौतिक प्राचलों के मूल्यांकन के लिए प्रयुक्त रोकेट है.
  • RH परिज्ञापी राकेट 'रोहिणी' का द्योतक है और अगले अंक राकेट के व्यास को सूचित करते हैं.
  • पहला रॉकेट, नैकी-अपाची, संयुक्त राष्ट्र अमेरिका से प्राप्त किया गया था, जिसे 21 नवंबर, 1963 को प्रमोचित किया गया.


  • भारत का पहला स्वदेशी लगने वाला रॉकेट, RH-75, 20 नवंबर 1967 को लॉन्च किया गया था.
  • अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी केंद्र (एसएसटीसी) का पुनर्नामकरण के सम्मान में किया गया विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) के रूप में किया गया. डॉ. विक्रम साराभाई का 30 दिसंबर, 1971 को असामयिक निधन हो गया था.
  • देश भर में इसरो छह प्रमुख केंद्र तथा कई अन्य इकाइयाँ, एजेंसी, सुविधाएँ और प्रयोगशालाएँ स्थापित हैं.
  • विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) तिरुवनंतपुरम ,
  • इसरो उपग्रह केंद्र (आईएसएसी) बेंगलूर में,
  • सतीशधवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी-शार) श्रीहरिकोटा में,
  • द्रव नोदन प्रणाली केंद्र (एलपीएससी) तिरुवनंतपुरम,
  • बेंगलूर और महेंद्रगिरी में, 
  • अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (सैक), 
  • अहमदाबाद में और राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी), हैदराबाद में स्थित हैं.
  • वीएसएससी, तिरुवनंतपुरम में प्रमोचन यान का निर्माण किया जाता है, 
  • आइजैक, बेंगलूर में उपग्रहों को अभिकल्पित और विकसित किया जाता है,
  • एसडीएससी, श्रीहरिकोटा में उपग्रहों और प्रमोचन यानों का एकीकरण और प्रमोचन किया जाता है, 
  • एलपीएससी में निम्नतापीय चरण सहित द्रव चरणों का विकास किया जाता है, 
  • सैक, अहमदाबाद में संचार और सुदूर संवेदन उपग्रहों के लिए संवेदकों तथा अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग संवंधित का कार्य किए जाते हैं, 
  •  एनआरएससी, हैदराबाद द्वारा सुदूर संवेदन आँकड़ा अभिग्रहण, संसाधन और वितरण का कार्य सँभाला जाता है. 
  • भारत का पहला प्रमोचन यान को नाम उपग्रह प्रमोचन यान-3 (एसएलवी-3) था.
  • एसएलवी-3 का प्रथम सफल प्रमोचन एसडीएससी, शार से 18 जुलाई, 1980 को संपन्न हुआ.
  • एसएलवी-3 के अलावा, भारत ने संवर्धित उपग्रह प्रमोचन यान (एएसएलवी), ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचन यान (पीएसएलवी) और भू-तुल्यकाली उपग्रह प्रमोचन यान (जीएसएलवी) का विकास किया.
  •  उपग्रहों को मोटे तौर पर दो वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है, यथा संचार उपग्रह और सुदूर संवेदन उपग्रह
  • संचार उपग्रह आम तौर पर संचार, दूरदर्शन प्रसारण, मौसम-विज्ञान, आपदा चेतावनी आदि की ज़रूरतों के लिए भू-तुल्यकाली कक्षा में कार्य करते हैं.
  • सुदूर संवेदन उपग्रह प्राकृतिक संसाधन मॉनिटरन और प्रबंधन के लिए अभिप्रेत है और यह सूर्य-तुल्यकाली ध्रुवीय कक्षा (एसएसपीओ) से परिचालित होता है.
  • एनएनआरएमएस राष्ट्रीय प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन प्रणाली के लिए परिवर्णी शब्द है. एनएनआरएमएस एकीकृत संसाधन प्रबंधन प्रणाली है जिसका लक्ष्य परंपरागत प्रौद्योगिकी के साथ सुदूर संवेदन आंकड़ों के प्रयोग द्वारा देश के प्राकृतिक संसाधनों का इष्टतम उपयोग तथा उपलब्ध संसाधनों का सुव्यवस्थित सूचीकरण करना है.
  • पहले भारतीय उपग्रह का नाम आर्यभट्ट था. इसका प्रमोचन 19 अप्रैल, 1975 को पूर्व सोवियत संघ से किया गया.
  • दिनांक 2 सितंबर, 2007 को जीएसएलवी-एफ़04 द्वारा प्रमोचित 2130 कि.ग्रा. भार वाला उपग्रह इन्‍सैट-4सी.आर. भारत द्वारा प्रमोचित सर्वाधिक भारी उपग्रह है.
  • अब तक (मार्च 2013) 38 प्रमोचक राकेट मशिन संपन्‍न हुए हैं.
  • अब तक (मार्च 2013) 68 + 35 (विदेशी) उपग्रह कक्षा में स्थापित किए गए.
  • पीएसएलवी भारत का पहला प्रचालित प्रमोचक राकेट है। अब तक इसकी तीन विकासात्मक उड़ानें और आठ कार्यकारी उड़ानें संपन्न हुई हैं.
  • चंद्रयान-1 अंतरिक्ष-यान द्वारा-चंद्रमा का वैज्ञानिक अन्वेषण है. भारतीय भाषाओं (संस्कृत और हिन्दी) में- चंद्रयान का तात्पर्य है “चंद्र अर्थात चंद्रमा, यान अर्थात वाहन” अर्थात, चंद्रमा अंतरिक्ष-यान। चंद्रयान-1 प्रथम भारतीय ग्रहीय विज्ञान और अन्वेषण मिशन है.
  • चंद्रयान-1, श्रीहरिकोटा (शार), भारत में स्थित सतीशधवन अंतरिक्ष केंद्र से 22 अक्तूबर, 2008 को प्रमोचित किया गया.
  • चंद्रयान-1 28 अगस्‍त 2009 तक 312 दिनों के लिए प्रचालन में रहा.
  • चंद्रयान-1 मिशन का उद्देश्य - दृश्य, निकट अवरक्त, न्यून ऊर्जा एक्स-किरण और उच्च ऊर्जा एक्स-किरण क्षेत्रों में चंद्रमा की सतह का उच्च विभेदन सुदूर संवेदन करना है. इसके विशेष वैज्ञानिक लक्ष्य हैं : चंद्रमा के निकटस्थ और दूरस्थ (5-10 मी. उच्च स्थानिक और तुंगता विभेदन सहित) दोनों ओर के त्रि-आयामी एटलस तैयार करना। मैग्नीशियम, एल्यूमीनियम, सिलिकॉन, कैल्शियम, आइरन तथा टाइटेनियम जैसे खनिजों और रासायनिक तत्वों तथा उच्च परमाणु संख्या के रेडॉन, यूरेनियम और थोरियम जैसे उच्च स्थानिक विभेदन वाले तत्वों का चंद्रमा की संपूर्ण सतह पर उपस्थिति का रासायनिक और खनिजीय मानचित्रण करना. हम समकालिक प्रकाशीय भूवैज्ञानिक और रासायनिक मानचित्रण से विभिन्न भूवैज्ञानिक इकाइयों की पहचान और चंद्रमा के उद्भव व प्रारंभिक विकास के इतिहास से संबंधित परिकल्पना की जांच करने में समर्थ होंगे जिससे चंद्रमा की सतह की प्रकृति को समझने करने में मदद मिलेगी.
  • अंतरिक्षयान चंद्रयान-1 पर ग्यारह वैज्ञानिक उपकरण लगे हैं. इनमें पाँच भारतीय और छह विदेशी नामतः, ईएसए के तीन, नासा के दो तथा बल्गेरियाई विज्ञान अकादमी का एक वैज्ञानिक उपकरण शामिल है. इनका चयन इसरो के अवसर की घोषणा (एओ) के माध्यम से किया गया. दो ईएसए उपकरणों में भारतीय सहयोग शामिल है.
  • चंद्रमा पर तापमान चरम सीमाओं पर पहुँच जाता है – सूरज की रोशनी में प्रकाशित चंद्रमा का पहलू लगभग 130 ºसें तक झुलसाने जितना गरम हो जाता है, और रात में यही पहलू -180 ºसें. पर अत्यधिक ठंडा हो जाता है.
  • अभी तक किसी भी चंद्र मिशन ने चंद्रमा पर जीवन की उपस्थिति का कोई संकेत नहीं दिया है.
  • परिक्रमा करते हुए चंद्रमा पृथ्वी को हमेशा अपना एक पहलू ही दर्शाता है. यह इसलिए है कि पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण ने चंद्रमा के नियमित प्रचक्रण की गति इतनी कम कर दी कि वह उसके पृथ्वी की परिक्रमा के समय के बराबर हो गया. अतः चंद्रमा को पृथ्वी के चारों ओर घूमने में उतना ही समय लगता है जितना कि उसे अपने अक्ष पर घूमने में लगता है.
  • प्रस्तावित भारतीय चंद्रमा मिशन चंद्रयान-1 को साकार करने के लिए बजटीय अनुमान 386 करोड़ रुपए (लगभग $76मिलियन) है। इसमें नीतभार विकास के लिए 53 करोड़ रुपए (लगभग $11 मिलियन), अंतरिक्षयान बस के लिए 83.00 करोड़ रुपए (लगभग $17 मिलियन), गहन अंतरिक्ष नेटवर्क की स्थापना के लिए 100 करोड़ रुपए (($20 मिलियन), पीएसएलवीप्रमोचन यान के लिए 100 करोड़ रुपए (($20 मिलियन) और वैज्ञानिक डेटा केंद्र के लिए 50 करोड़ रुपए ($10 मिलियन), बाह्य नेटवर्क समर्थन और कार्यक्रम प्रबंधन व्यय शामिल हैं. 
  • एंट्रिक्स इसरो का वाणिज्यिक स्कंध है. यह विश्व भर में भारतीय अंतरिक्ष उत्पाद और सेवा क्षमताओं के विपणन हेतु एकल खिड़की एजेंसी है. best doctoral programs in education

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Postscript: अनुलेख

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Description: इसरो (ISRO) के बारे में लेख के माध्यम से जानकारी देने का प्रयास कर रहे हैं। यह जानकारी आपके सामान्य ज्ञान के ज्ञान को बढ़ावा देने में सक्षम है

Author: अमित 

Tags: ISRO  kya hai?