nag panchami kyon manate hai?:नाग पंचमी क्यों मनाते है?


नाग पंचमी का त्यौहार देश के कई कस्बों, गांवों में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है और इस दिन नाग देवता की पूजा करना शुभ माना जाता है ...

नाग पंचमी का महत्त्व क्या है? (nag Panchami ka kya mahatva kya hai?), नाग पंचमी निबंध (Nag Panchami Essay), नाग पंचमी कैसे मनाएं? ( nag Panchami kaise manaye), नाग देवता की पूजा कैसे करें? nag devata ki pooja kaise kare?) आइयें जानें नाग पंचमी क्यों मनाते है?(nag panchami kyon manate hai?) 
सावन मास में शिव पूजा को प्रथम स्थान है. सावन मास में नागपंचमी का पर्व आता है. हिन्दू धर्म में नाग देवता की बड़े धूम धाम से पूजा की जाती है. देओ के देव महादेव के गले में हमेशा खेलनेवाले नाग देवता की दूध पिलाकर पूजा की जाती है.  नाग देवता की पूजा कैसे की जाती है? नाग पंचमी क्यों मानते है? आदि के बारें में विस्तार से चर्चा करते है. 

भारतीय संस्कृति में नाग पंचमी का त्योहार सदियों से मानते हुए आ रहे है. श्रावण मास में आनेवाले नागपंचमी के पर्व पर नाग देवता को दूध पिलाकर पूजा की जाती है. यह त्योहार बहुत ही विशेष है. आज के दिन अपने घर पर ही गोबर का नाग देवता बनाकर पूजा के थाली को सजाकर मंदिर में जाकर दूध का अभिशेक लगाकर उसकी पूजा-अर्चना की जाती है.




प्राचीन काल से पूरे भारत में नाग पूजा चल रही है. श्रावण शुक्ल पंचमी के दिन नाग पंचमी का त्योहार पारंपरिक भक्ति और विश्वास के साथ मनाया जाता है. इस दिन सांपों की पूजा की जाती है. नाग दर्शन के लिए इस दिन का विशेष महत्व है.

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नागपंचमी की परिभाषा : 


नागपंचमी के दिन गांव, कस्बे और शहरों आदि  में पूजा की थाली सजाकर दूध, नरियल के साथ नाग देवता के मंदील में जाकर दूध का अभिशेक चढ़ाकर पूजा-अर्चना की जाती है. 

गांव, कस्बों में नागदेवता की पूजा करने के लिए गांव की भजन मंडली नाग देवता के भजन (देहाती भाषा में बारी) बोलते हुए गांव के पुरे मंदिरों को दूध का अभिशेक चढ़ाते हुए पूजा करते है और सबसे आखरी में गांव के नाग देवता के नाग ठाणे में दूध और नरियल चढ़ाकर पूजा करते है. इस तरह से ''नाग पंचमी'' का त्योहार मनाया जाता है. 


नागपंची के दिन यह काम न करें :


  • सांप को न मारें 
  • धरती की खुदाई न करें 
  • खेती के काम बंद रखे. 
  • पेड़ को नहीं काटना चाहिए 
  • बकरी के लिए खेत के पेड़ों से टहनियाँ न तोड़े 
  • कचरा न निकाले, घास न काटे
  • घर के बगीचे से कचरा न निकाले, पेड़ की टहनिया न तोड़े  
  • आज के दिन काम को छुट्टी रखे और नागपंचमी का त्योहार मनायें.


नागपंची का त्योहार कैसे मनाएं:


  • जल्दी उठो और घर की सफाई करो और दिनचर्या से निवृत्त हो जाओ.
  • उसके बाद स्नान करें और साफ और स्वच्छ कपड़े पहनें.
  •  नाग पूजा के लिए ताजा भोजन जैसे खीर आदि बनाएं.
  • नागदेवता की पूजा-अर्चना पुष्प और चन्दन चढ़ाकर कीजिए.
  • दिवार पर हल्दी, चंदन के शाही से नागदेवता की फोटों बनाए .
  • दही, दूर्वा, कुशा, गन्ध, अक्षत, फूल, जल, कच्चा दूध, रोली और चावल आदि से दीवार पर बनी नागदेवता की पूजा कर उन्हें सिंदूर और भोग चढ़ाया जाएं. इस तरह से नागदेवता की पूजा '' नागपंचमी'' के दिन कीजिए.





नागपंचमी का महत्व : 


  • हिन्दू धर्म में नाग देवता को पूजा जाता है. नागदेवता को देवादि देव महादेव के गले का हार और सृष्टि के रचना कर भगवान विष्णु शेष के गद्दी पर विराजमान है. 
  • सावन का माह अर्थात वर्षाऋतु का माह है वर्षा होने के कारण साप, बिच्छू  जमीन के अंदर से बहार निकलते है.  ऎसे समय में नागपंचमी के दिन नागदेवता की पूजा करना चाहिए और दूध चढ़ाना चाहिए अर्थात नागदेवता शांत हो जाते है और कोई नुकसान नहीं पहुचाते है.
  • ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि किसी के कुंडली में काल सर्प योग है तो उसे दूर करने के लिए, नाग देवता की पूजा और रूद्राभिषेख करना चाहिए.
 

नाग पंचमी क्यों मनाते है?:


पौराणिक कथा के अनुसार नागदेवता का साम्राज्य पाताल लोग में विराजमान था. दक्षिण भारत में हिमालय शृंखला के शिवालीनग पर्वत पर मनसा देवी का मंदिर विराजमान है. मनसा देवी का निर्माण शिवजी ने ही किया था. मनसा देवी के मंदिर में नागपंचमी के दिन भक्तों की बड़ी संख्या में भीड़ रहती है क्यों की नागपंचमी के दिन मनसा देवी की पूजा करने से मनोकामना पूर्ण होती है. तो चलिए जानते है क्यों मनाते है नागपंचमी...

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नाग पंचमी की पौराणिक कथा :

कथा-1 

कालिया नाग पन्नग जाति का नागराज था और उनके पिता का  नाम कद्रू था और  अपने परिवार के साथ रमन द्वीप में रहने लगे थे. लेकिन अचानक पक्षीराज गरुड़ से दोनों में दुश्मनी फ़ैल गई  और वे यमुना नदी में निवास करने लगे.

कालिया नाग जिस कुंड में रहता था उस जगह पर जहर फ़ैल गया था. उस कुंड में रहनेवाले जलचर जिव कालिया नाग के जहर से मर जाते थे. कुंड के ऊपर से उड़नेवाले पंछीयों को भी जहर का प्रभाव होता था और पंछी गिर कर कुंड में गिर जाते थे. 

कालिया नाग के उपद्रव से काना (श्रीकृष्ण) भलीभांति परिचित थे. एक दिन हो रहे अत्याचार  को दूर करने के लिए कुछ लीला रचाने के लिए कुछ मौका आना चाहिए इसलिय एक दिन श्रीकृष्ण ने अपने बालमित्रों को इकट्ठा किया ओर गेंद खेलने लगे. कुछ देर के बाद गेंद को काना ने केंद को कुंड में फेक दिया. बालमित्र कहने लगे की जिसने यह गेंद फेगा वह गेंद वापस लगएगा फिर काना कंदब के पेड़ पर चढ़ गया और यमुना के कुंड में छलांग लगाई.

श्रीकृष्ण ने कालिया नाग को समझाया की तेरी मनमानी बहुत हो गई तू इस कुंड से चला जा लेकिन कालिया नाग कुछ समझने की बजाय कृष्ण पर अपने फनों से वार करने लगा लेकिन श्रीकृष्ण पर जहर का प्रभाव कुछ भी नहीं हुआ और कालिया नाग देखते ही रह गया. कुछ देर बाद श्रीकृष्ण ने कालियानाग के पांच फनों पर नाचने लगे अर्थात प्रहार करने लगे और सभी वृन्दावनवासी देखने लगे. कहने लगा की प्रभु इस कुंड में जो भी जहर है मैं वापस लेता हु. यह दिन सावन की पंचमी का था. उसके बाद श्रीकृष्ण ने कालिया नाग को वरदान दिया की जो भी नागदेवता को दूध पिलाएगा उसकी मनोकामना पूर्ण होगी. इसी दिन से नाग पंचमी के त्योहार की सुरवात हुई. 


कथा -2 

समुद्र मंथन करने के लिए विष्णु भगवान को लीला रचानी पड़ी.उन्हों ने देव और असुरों के शक्तियों के माध्यम से समुद्र मंथन किया. समुद्र मंथन के लिए कारण निर्माण किया गया कारण यह था की ऋषि दुर्वासा ने इंद्र को शाप दिया की तू अपने लक्ष्मी से हिन् हो जाएगा. इस शाप से मुक्त होने के लिए देवराज इंद्र भगवन विष्णु के पास गए विष्णुजी ने कहा की देवता और असुरों के साथ समुद्र मंथन करना होगा. असुरों को अमृत का लालच दिया गया. इस तरह से समुद्र मंथन किया गया. 

समुद्र मंथन क्षीर सागर आज का हिन्द महासागर में हुआ था. भगवन विष्णु ने समुद्र मंथन में कच्छभ बनकर भाग लिया. मंथन के समय वे समुद्र के मध्य भाग में खड़े रहे उनके ऊपर मदरांचल पर्वत रखा गया. वासुगि नाग को रस्सी बनाया गया. एक तरफ देवता और दूसरी तरफ असुर रस्सी को खींचने लगे. इस तरह से समुद्र का मंथन चालू हुआ.

समुद्र मंथन करते समय पहली बार विष का कलश निकला. विष की ज्वाला बहुत गतिशील थी. विष का क्या करें इसका विचार देव और दानव करने लगे. दोनों का निष्कर्ष निकला की भगवन शिव की आराधना करना चाहिए. भगवन शिव प्रगट हुए. उन्हों ने विष को प्राशन किए लेकिन विष को गले के निचे उतरने नहीं दिया और उनका गाला नीला हुआ इसीलिए भगवान शिव को ''नीलकंठ '' कहते है. 

विष प्रशान करते समय विष का कुछ अंश धरती पर गिरा उसे साप, बिच्छू और जहरीले कीड़ों ने प्राशन किया. तभी से साप जहरीले हो गए. नागदंश से बचने के लिए ''नागपंचमी'' के दिन नागदेवता की पूजा करनी चाहिए. इस तरह से नागपंचमी के त्योहार का महत्व है. 

टिप : कोरोना वायरस रोग (covid -19) के कारण नागपंचमी का त्योहार मंदिर, सामूहिक स्थल पर ना मनाए, भजन मंडली न निकाले आदि बातों को ध्यान में रखते हुए नागदेवता की पूजा घर पर ही कर सकते है. घर पर रहे सुरक्षति रहे. 

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